Exclusive: कैंसर के इलाज में क्लीनिकल ट्रायल से मिलेगी मरीजों को बड़ी मदद, आधुनिक लैब और रिसर्च सेंटर पर जोर
देश में कैंसर के बढ़ते मामलों पर नियंत्रण पाने और नए उपचार विकसित करने के लिए क्लीनिकल परीक्षण महत्वपूर्ण हैं। ...और पढ़ें

हर कैंसर पेशेंट को उसकी जरूरत को देखते हुए इलाज देना जरूरी है। एआई इमेज
HighLights
क्लीनिकल परीक्षण कैंसर उपचार के नए रास्ते खोलते हैं।
मरीजों और स्वजनों को क्लीनिकल ट्रायल के लिए जागरूक करें।
आधुनिक लैब और शोध केंद्रों का विकास अत्यंत आवश्यक।
आशीष चौरसिया, ग्रेटर नोएडा। देश में कैंसर के बढ़ते मामलों पर नियंत्रण पाने और उपचार के नए विकल्प विकसित करने के लिए सही डायग्नोस्टिक के साथ क्लीनिकल परीक्षण (क्लीनिकल ट्रायल) को बढ़ावा देना जरूरी है।
क्लीनिकल परीक्षण के माध्यम से कैंसर के उपचार की नई संभावनाएं सामने आती हैं। खासकर आनुवांशिक और गैर-आनुवांशिक कैंसर के मरीजों में एक ही प्रकार का कैंसर होने के बावजूद उपचार की प्रक्रिया अलग हो सकती है।
इमर्जिंग फ्रंटियर्स इन कैंसर रिसर्च में किए दावे
ऐसे में मरीजों पर किए जाने वाले क्लीनिकल परीक्षण भविष्य में अन्य मरीजों के लिए भी उपचार का बेहतर विकल्प तैयार करने में मददगार साबित हो सकते हैं। यह बातें अमेरिका के रोसवेल पार्क काम्प्रिहेंसिव कैंसर सेंटर में कार्यरत भारतीय मूल के प्रोफेसर ध्यानचंद्र ने गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय 21वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'इमर्जिंग फ्रंटियर्स इन कैंसर रिसर्च' के दौरान दैनिक जागरण से खास बातचीत में कही।
गतिविधियों पर लगातार नजर रखना भी जरूरी
प्रो. ध्यान चंद्र ने कहा कि जितने अधिक क्लीनिकल परीक्षण होंगे, कैंसर के उपचार के उतने ही नए रास्ते खुलेंगे। इसके लिए देश में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। मरीजों और उनके स्वजन को भी क्लीनिकल परीक्षण के महत्व को समझते हुए इसके लिए आगे आना चाहिए। कैंसर की स्टेज का पता लगाने के साथ ही उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखना भी जरूरी है।
मरीज को जरूरत के अनुरूप मिलेगी मदद
केवल स्टेज के आधार पर उपचार की पूरी प्रक्रिया शुरू कर देना कई बार मरीजों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। चिकित्सकों को पहले कैंसर की प्रकृति और उसकी गतिविधियों का आकलन करना चाहिए। इसके बाद मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार की रणनीति तैयार करनी चाहिए। इससे उपचार को अधिक प्रभावी और मरीज की जरूरत के अनुरूप बनाने में मदद मिल सकती है।
क्लीनिकल परीक्षण को लेकर भ्रांतियां दूर करना जरूरी
राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के सीनियर कंसल्टेंट एवं आंकोलाजी विशेषज्ञ डा. साहिल बम्ब्रू ने कहा कि भारत में अभी भी बड़ी संख्या में लोग क्लीनिकल परीक्षण कराने से बचते हैं। इसके पीछे जागरूकता की कमी और इससे जुड़ी भ्रांतियां प्रमुख कारण हैं। लोगों को समझाना होगा कि उचित नैतिक और चिकित्सकीय निगरानी में किए जाने वाले क्लीनिकल परीक्षण कैंसर के उपचार के नए विकल्प तलाशने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आधुनिक लैब और शोध केंद्रों का विकास जरूरी
भारत में क्लीनिकल परीक्षण को गति देने के लिए आधुनिक लैब और शोध केंद्रों का विकास करना भी आवश्यक है। इससे देश में ही कैंसर पर उन्नत शोध और नए उपचार विकल्पों के परीक्षण की संभावनाएं बढ़ेंगी। साथ ही भारतीय मरीजों को भी कैंसर के उपचार से जुड़े नवीनतम शोध का लाभ मिल सकेगा।
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