क्या BJP ने गुर्जरों को दरकिनार कर खेला दलित कार्ड? सुरेंद्र नागर हुए बाहर, भोला सिंह टीम में
भाजपा की राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश से आठ पदाधिकारियों को जगह मिली है, लेकिन गुर्जर चेहरा सुरेंद्र नागर को ...और पढ़ें

BJP राष्ट्रीय टीम में गुर्जर चेहरा सुरेंद्र नागर की छुट्टी
HighLights
सुरेंद्र नागर को भाजपा की राष्ट्रीय टीम से बाहर किया गया।
डॉ. भोला सिंह को राष्ट्रीय मंत्री पद पर नियुक्त किया गया।
पश्चिमी यूपी में भाजपा का गुर्जर-दलित समीकरण साधने का प्रयास।
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। भाजपा की राष्ट्रीय टीम की सोमवार को घोषणा कर दी गई। विधानसभा 2027 की और बढ़ रहे उत्तर प्रदेश को भाजपा की राष्ट्रीय टीम में खास तवज्जो दी गई है।
पार्टी ने उत्तर प्रदेश से आठ पदाधिकारियों को राष्ट्रीय टीम में जगह दी है, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ा चेहरा माने जाने वाले सुरेंद्र नागर को इस बार राष्ट्रीय टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। उनकी जगह बुलंदशहर से सांसद डॉ. भोला सिंह को राष्ट्रीय मंत्री बनाया गया है।
लोकसभा में डॉ. भोला सिंह तीसरी बार बुलंदशहर का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। राज्यसभा सदस्य और सदन में उपसभापति की जिम्मेदारी संभाल चुके सुरेंद्र नागर भाजपा में गुर्जर समाज का बड़ा चेहरा हैं।
सुरेंद्र नागर रहे हैं भाजपा का गुर्जर चेहरा
गुर्जर समाज को साधने में भाजपा उनका उपयोग करती रही है। लोकसभा चुनाव में गुर्जरों को साधने के लिए उन्हें हरियाणा में सह प्रभारी की जिम्मेदारी सौंप गई थी, लेकिन उत्तर प्रदेश चुनाव से ठीक पहले सुरेंद्र नागर को राष्ट्रीय टीम में जगह न मिलने से गुर्जर समाज को बड़ा झटका लगा है।
हालांकि भाजपा ने नवाब सिंह नागर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश का क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाकर गुर्जरों को पहले ही साधने की चाल चल दी है। पार्टी ने पहले सुरेंद्र नागर को प्रदेश संगठन में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी थी।
बाद में उन्हें जेपी नड्डा की टीम में शामिल करते हुए 2023 में राष्ट्रीय सचिव बनाया था। इसके बाद सुरेंद्र नागर की भाजपा की केंद्रीय टीम में भी मजबूत पकड़ होती गई।
नितिन नबीन की टीम में नहीं मिली जगह
नितिन नबीन की टीम में भी उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा था। उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गुर्जर मतदाता कई सीटों पर सीधे तौर पर प्रभाव डालते हैं। इसलिए पार्टी प्रदेश संगठन से लेकर सरकार में गुर्जर समाज को प्रतिनिधित्व देती रही है।
इसी के चलते नितिन नबीन की टीम में भी सुरेंद्र नागर को जिम्मेदारी मिलने की पूरी संभावनाएं जताई जा रही थी, लेकिन पार्टी ने उनकी जगह पश्चिमी उत्तर प्रदेश से डॉ. भोला सिंह और एएमयू के पूर्व कुलपति प्रोफेसर तारीक मंसूर को राष्ट्रीय टीम में शामिल कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनावी समीकरण को साधने का प्रयास किया है।
भोला सिंह को चुनने के पीछे की वजह?
अनुसूचित जाति से आने वाले डॉ. भोला सिंह बीजेपी अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री रह चुके हैं। कल्याण सिंह के भी करीबी रहे हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव गुर्जर मतदाताओं को साधने में लगे हुए हैं।
ऐसे में सुरेंद्र नागर को राष्ट्रीय कार्यकारिणी से बाहर किए जाने का फायदा सपा उठाने का प्रयास करेगी। गुर्जर मतदाताओं के जरिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी पकड़ को मजबूत करेगी।
डॉ. भोला सिंह दलित वोट बैंक में सपा को कितना नुकसान पहुंचा पाएंगे, वहीं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए प्रो. तारिक मंसूर अल्पसंख्यकों को ओर खींचने में कितना कामयाब होंगे, यह विधानसभा चुनाव के परिणाम सामने आने पर ही पता चलेगा।
