AI का 1980 रेट्रो लुक कहीं न बना दे साइबर ठगी का शिकार, फोटो से चेहरा-लोकेशन तक ठगों के हाथ लगने का खतरा
एआई से 1980 के दशक के रेट्रो लुक वाली तस्वीरें बनाने का चलन बढ़ रहा है, लेकिन यह बायोमेट्रिक डेटा ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
एआई रेट्रो फोटो से बायोमेट्रिक डेटा चोरी का खतरा।
फोटो बैकग्राउंड, लोकेशन से ठग कर सकते हैं पहचान।
डीपफेक और डिजिटल धोखाधड़ी से बचने को रहें सतर्क।
मुनीश शर्मा, नोएडा। आटिफिशियल इंटेलीजेंस(एआइ) से 1980 के दिनों वाले पोट्रेट और रेट्रो लुक की खुमारी आम से लेकर खास के सिर चढ़कर बोल रही है। यहां तक नेताजी से लेकर कारोबारी तक अपने फोटो चैट जीपीटी को देकर उन दिनों की आभासी दुनिया का आनंद ले रहे हैं।
खुद को स्टाइलिश राकस्टार, विंटेज बालीवुड स्टार या उस दौर के ट्रेंडी साड़ी लुक में देख गदगद हो रहे हैं लेकिन वह जाने-अनजाने में भूल कर रहे हैं। उनका चेहरा, फोटो बैकग्राउंड, वाहन नंबर, लोकेशन आदि ठगों के हथियार भी बन सकते हैं। बायोमेट्रिक डाटा चोरी और डीपफेक ब्लैकमेलिंग में हो सकती है।
काेरोना काल के बाद देश में साइबर ठगी का दायरा बढ़ा है। ठग इंटरनेट मीडिया से प्राप्त जानकारी कर नोएडा में लोगों को डिजिटल अरेस्ट और इन्वेस्मेंट फ्राड कर एक बार नौ करोड़ रुपये तक ठग चुके हैं।
चेहरा भी होता है पर्सनल डेटा
इनमें इंजीनियर, डाक्टर, सेवानिवृत्त कर्नल, हाईकोर्ट की अधिवक्ता से लेकर पढ़े लिखे लोग शामिल हैं। अब लोग एआइ को अपने फोटो देकर नए डिजिटल खतरे को न्यौता दे रहे हैं। साइबर एक्सपर्ट कमल कुमार ने बताया कि किसी भी व्यक्ति का चेहरा भी पर्सनल डेटा होता है।
चेहरे में बायोमेट्रिक पहचान होती है। ठग हाई-क्वालिटी फोटो का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे डीपफेक और डिजिटल फ्राड होने का खतरा रहता है। साथ ही असली फोटो फाइल में फोन का माडल, फोटो खींचने का सही समय, तारीख और कई बार सटीक जीपीएस लोकेशन भी छिपी होती है।
यह भी पढ़ें- एआई दूरसंचार में अवसर, पर मानवीय निगरानी और सुरक्षा उपाय अनिवार्य: ट्राई चेयरमैन
यह भी पढ़ें- हैकर्स का जोर ऑटोमेशन पर, साइबर हमलों की राह आसान कर रहा एआई
इससे ठग घर या कार्यालय का पता कर सकते हैं। फोटो के बैकग्राउंड में नजर आने वाला घर का नंबर, सड़क, वाहन की नंबर प्लेट या कार्यालय का बोर्ड अनजाने में निजी जिंदगी की जानकारी दूसरों तक पहुंचा सकता है।
एआई एप पर फोटो डालने का नुकसान
-फोटो डेटा के रूप में कंपनी प्रबंधन के पास पहुंच जाता है।
-चेहरे के रूप में बायोमैट्रिक डेटा चोरी हो सकता है।
-फर्जी आइडी और केवाइसी फ्राड हो सकता है।
-डीपफेक वीडियो बन सकता है
डेटा को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी
एआइ एप प्रबंधन को फोन की अनुमति न दें। किसी भी थर्ड-पार्टी लिंक या एप पर अपनी असली फोटो अपलोड करने से बचें। एप पर कांटेक्ट लिस्ट या लोकेशन मांगी जाती है, तो उसका प्रयोग करने से बचें।
