हैकर्स का जोर ऑटोमेशन पर, साइबर हमलों की राह आसान कर रहा एआई
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने साइबर हमलों को अंजाम देना आसान बना दिया है, जिससे हैकर्स अब कम तकनीकी विशेषज्ञता के ...और पढ़ें
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साइबर हमलों की राह आसान कर रहा एआई।
HighLights
एआई ने साइबर हमलों को स्वचालित और आसान बनाया है।
एंथ्रोपिक रिपोर्ट ने एआई के बढ़ते दुरुपयोग पर चिंता जताई।
सरकारी और रक्षा संगठनों को एआई-आधारित हमलों का निशाना बनाया गया।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने जटिल साइबर हमलों को अंजाम देना आसान बना दिया है। अब अकेले काम करने वाला हैकर भी टोह लेने, फिशिंग करने, कंप्यूटर सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाने और डाटा चोरी जैसे कई काम एआई की मदद से स्वचालित तरीके से कर सकता है। इससे साइबर हमलों के लिए जरूरी तकनीकी विशेषज्ञता और मेहनत, दोनों कम हो रहे हैं।
अमेरिकी एआई कंपनी एंथ्रोपिक की ‘डिटेक्टिंग एंड काउंटरिंग मिसयूज ऑफ एआई : सितंबर 2026’ रिपोर्ट में एआई के बढ़ते दुरुपयोग की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, साइबर हमलों में एआई का इस्तेमाल अब सामान्य चैटबाट तक सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल ऐसे मल्टी-एजेंट सिस्टम में भी हो रहा है, जो किसी लक्ष्य की जानकारी जुटाने, सिस्टम की कमजोरियां तलाशने और डाटा निकालने जैसे कई काम कर सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि “अब जटिल हमलों के लिए जटिल हमलावरों की जरूरत नहीं रह गई है।”
एंथ्रोपिक के अनुसार, उसकी थ्रेट इंटेलिजेंस टीम ने पिछले छह महीनों में ऐसे कई साइबर अभियानों की पहचान की और उन्हें रोका, जिनमें हमलावरों ने ‘क्लाड’ एआई मॉडल का इस्तेमाल किया था। इनमें संदिग्ध सरकारी मदद वाले समूहों के अलावा पैसे के लिए साइबर अपराध करने वाले और राजनीतिक मकसद वाले लोग भी शामिल थे।
हमले के हर चरण में एआई की मदद
रिपोर्ट के अनुसार, एआई का इस्तेमाल अब साइबर हमले की पूरी प्रक्रिया में हो रहा है। इसमें लक्ष्य की पहचान करने और उसके बारे में जानकारी जुटाने से लेकर फिशिंग तैयार करने, सिस्टम में घुसने, पासवर्ड और अन्य जानकारी चुराने तथा चोरी किए गए डाटा को व्यवस्थित करने तक के काम शामिल हैं।
एंथ्रोपिक ने जीटीजी-20006 का उदाहरण देते हुए बताया कि एक हमलावर ने हमले की गति बढ़ाने और कई कामों को स्वचालित करने के लिए एआई का इस्तेमाल किया। इसके लिए एक विशेष टूलकिट तैयार की गई थी।
इसमें विंडोज आधारित इम्प्लांट, मोबाइल सिस्टम को निशाना बनाने वाला उपकरण, ब्राउजर में सुरक्षित पासवर्ड की जानकारी चुराने वाला टूल और सरकारी संगठनों की नकल करने वाला फिशिंग प्लेटफार्म शामिल था। इसके अलावा, चोरी किए गए खातों और सिस्टम तक पहुंच संभालने के लिए एक प्रशासनिक कंसोल भी बनाया गया था।
इन उपकरणों को एआई की मदद से चलाया और बदला जाता था। अगर सुरक्षा प्रणाली किसी उपकरण को पहचान लेती थी तो हमलावर एआई की मदद से उसमें बदलाव कर उसे दोबारा तैयार और तैनात कर सकता था। एआई का इस्तेमाल यह देखने के लिए भी किया गया कि उसके उपकरण सुरक्षा उपायों से कितनी प्रभावी तरीके से बच पा रहे हैं।
20 से ज्यादा संगठनों को बनाया निशानारिपोर्ट के मुताबिक, इस अभियान में एआई का इस्तेमाल लक्ष्य तलाशने से लेकर नेटवर्क में घुसपैठ और चोरी किए गए डाटा को निकालने तक किया गया। हमलावरों ने सैकड़ों गीगाबाइट डाटा निकालने और उसे व्यवस्थित करने के लिए भी एआई की मदद ली।
साथ ही, अकाउंट में सेंध लगाने और सिस्टम तक अपनी पहुंच बनाए रखने के काम को भी स्वचालित किया गया।एंथ्रोपिक की जांच में ऐसे 20 से ज्यादा संगठनों की पहचान हुई, जिन्हें हमलावरों ने निशाना बनाया था।
इनमें सरकारी मंत्रालय, रक्षा और खुफिया एजेंसियां, दूतावास और राजनयिक मिशन, थिंक टैंक और रक्षा क्षेत्र की कंपनियां शामिल थीं। इनमें ज्यादातर संगठन यूक्रेन और यूरोप से जुड़े थे, जबकि पश्चिम और पूर्व एशिया में समुद्री मामलों से संबंधित सरकारी एजेंसियां भी निशाने पर थीं।
(समाचार एजेंसी एएनआई के इनपुट के साथ)
