ग्रेटर नोएडा, संवाददाता : मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा गाजियाबाद में मेट्रो रेल परियोजना के दूसरे चरण को शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिए जाने पर ग्रेटर नोएडा मेट्रो रेल परियोजना पर जल्द काम शुरू होने की उम्मीद जगी है। पैसे के अभाव में परियोजना की फाइल को एक साल से ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। मेट्रो परियोजना शुरू करने की सारी औपचारिकताएं ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने पूरी कर ली थी। परियोजना का निर्माण कार्य शुरू होने वाला था, उससे पहले जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों ने आंदोलन शुरू कर दिया। आंदोलन के कारण प्राधिकरण अधिकारियों ने परियोजना की तरफ ध्यान नहीं दिया। अगर समय से निर्माण कार्य शुरू हुआ होता तो अब तक आधे से ज्यादा कार्य पूरा हो चुका होता।

नोएडा से ग्रेटर नोएडा मेट्रो रेल परियोजना को लाने के लिए प्राधिकरण ने दिसंबर 2010 से काम शुरू कर दिया था। इसे 2013 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। मेट्रो रूट का खाका व डीपीआर भी तैयार कर लिया गया था। नोएडा सिटी सेंटर से होकर सेक्टर 49 होते हुए नोएडा व ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे होकर परी चौक, विप्रो कंपनी के बराबर से बोड़ाकी रेलवे स्टेशन तक मेट्रो ले जाने की योजना तैयार की गई थी। नोएडा से ग्रेटर नोएडा के बीच 22 स्टेशन बनाने की योजना तैयार हुई थी, जिसमें 19 स्टेशन नोएडा में आते हैं। डीपीआर तैयार करने का जिम्मा दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन को सौंपा गया था। परियोजना पर कुल पांच हजार करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान था। पहले प्राधिकरण ने परियोजना को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर बनाने का निर्णय लिया। बाद में प्राधिकरण ने दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन का निर्माण का जिम्मा सौंपने का निर्णय लिया। परियोजना पर निर्माण कार्य शुरू करने की सारी औपचारिकताएं मार्च 2011 में पूरी हो गई थी। अप्रैल 2011 से निर्माण कार्य शुरू होना था। नोएडा व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने मिलकर निर्माण का खर्च उठाने का जिम्मा उठा लिया था। परियोजना पर निर्माण कार्य शुरू होने से पहले जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों का आंदोलन शुरू हो गया। प्राधिकरण अधिकारियों का ध्यान आंदोलन की तरफ चला गया। इसलिए मेट्रो रेल परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया। मेट्रो रेल परियोजना को लेकर शहरों के लोगों को उम्मीद टिकी थी। ग्रेटर नोएडा को नोएडा व दिल्ली से जोड़ने के लिए परिवहन की बेहतर सुविधा न होने के कारण शहर की आबादी नहीं बढ़ पाई। मास्टर प्लान के अनुसार 2011 तक शहर की आबादी सात लाख होनी चाहिए थी। लेकिन अब तक सिर्फ तीन लाख तक आबादी पहुंच पाई है। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा मेट्रो रेल परियोजना को लेकर गंभीरता दिखाए जाने पर एक बार फिर लोगों की उम्मीद जगी है कि ग्रेटर नोएडा में जल्द ही मेट्रो पर काम शुरू हो जाएगा।

मोबाइल पर ताजा खबरें, फोटो, वीडियो व लाइव स्कोर देखने के लिए जाएं m.jagran.com पर