मुजफ्फरनगर: श्रीराम कॉलेज में जापानी कंपनी ताईसेई सॉयल की ओर लगाए जाने वाले जल संशोधन प्लांट की तैयारी तेज हो गई है। 1.25 करोड़ लागत से निर्माण कार्य होगा। जिसकी सामग्री बीते दिनों ही महाविद्यालय में आई थी। जापान से एक प्रतिनिधिमंडल ने सर्वे कार्य को अंतिम रूप दिया है।

बता दें कि बीते दिनों जापान की कंपनी का श्रीराम कॉलेज के साथ इस बारे में करार हुआ था। कंपनी के प्रतिनिधिमंडल ने कॉलेज प्रशासन को भरोसा दिलाया है कि जनवरी माह में निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। जिसके लिए 1.25 करोड़ रुपये के यंत्र कॉलेज में पहुंच गए हैं। गुरुवार को श्रीराम कॉलेज में प्रोजेक्ट के बारे में कार्यशाला हुई, जिसमें महाविद्यालय के चेयरमैन डॉ. एससी कुलश्रेष्ठ ने बताया कि जल संशोधन संयंत्र का निर्माण महाविद्यालय में होना उनके लिए अभूतपूर्व उपलब्धि है। इस संयंत्र से टायलेट सीवेज से निकलने वाले दूषित अपशिष्ठ जल का शुद्धिकरण करके उसे खेतों में ¨सचाई योग्य बनाया जायेगा। संयंत्र की शोधन क्षमता 8000 लीटर प्रतिदिन होगी। संयंत्र में तीन टैंक होंगे, जिनमें से एक फिल्ट्रेशन टैंक होगा। फिल्ट्रेशन टैंक प्रदूषित जल से अपशिष्ट पृथक कर उनको अलग-अलग डाइजेशन चेंबर्स में भेज देता है। डाइजेशन चेंबर से यह जल प्राइमरी फिलट¨रग चेंबर में जाता है। दूषित जल को स्वच्छ करने के लिए मिट्टी अवशोषण प्रणाली का उपयोग किया जाता है। डॉ. कुलश्रेष्ठ ने बताया कि यह तकनीक मिट्टी की सतह से जल के वाष्पीकरण को बढ़ावा देती है। साथ ही पौधों की जड़ों से पानी को खींचकर उनकी पत्तियों से वाष्पोत्सर्जन को बढ़ावा देती है। इस प्रोजेक्ट से भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत अभियान को भी बल मिलेगा। साथ की शोध कार्य में रूचि बढ़गी। इस दौरान डॉ. आदित्य गौतम, डॉ. अभिषेक बागला, डॉ. पूनम शर्मा, देवेंद्र चौधरी, डॉ. शाहनवाज हुसैन, रूचि श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे।

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