जेएनएन, मुजफ्फरनगर। कोर्ट ने सुनवाई के बाद आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा की बीएड की फर्जी डिग्री के आधार पर शिक्षक की नौकरी पाने के आरोपित का जमानत प्रार्थना-पत्र खारिज कर दिया। आरोपित धोखाधड़ी तथा अन्य आरोपों में तीन माह पूर्व गिरफ्तार किया गया था। वह तब से ही जेल में है। आरोपित की नियुक्ति इटावा जिले में हुई थी और वह ट्रांसफर कराकर जिले में सेवा दे रहा था।

अभियोजन के अनुसार थाना छपार के सिभालकी गांव निवासी अनिल चौधरी पुत्र धनपाल का 2010 में इटावा जिले में बतौर प्राथमिक शिक्षक चयन हुआ था। अनिल चौधरी ने डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा से 2005 में संस्थागत बीएड की परीक्षा उत्तीर्ण करने के आधार पर नौकरी पाई थी। 2010 में नियुक्ति के उपरांत अनिल चौधरी अंतरजनपदीय स्थानांतरण के आधार पर 2016 में जिले के प्राथमिक विद्यालय, बझेड़ी में तैनाती पा गया था, लेकिन 2017 में सचिव बेसिक शिक्षा प्रयागराज के पत्र में जानकारी दी गई थी कि डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय-आगरा बीएड सत्र 2005 के टैबुलेशन चार्ट में कतिपय अधिक छात्रों का परीक्षा परिणाम अंकित किया गया अथवा टेंपर्ड अंकतालिका वितरित की, जिनसे बहुत से छात्र सेवायोजित हुए। एसआइटी जांच में अनिल की बीएड डिग्री टेंपर्ड पाई गई।

हाईकोर्ट में नीलम चौहान बनाम उप्र. राज्य व अन्य के तहत 607 याचिकाओं का निस्तारण किया गया, जिसमें 2823 फर्जी छात्रों की सूची उपलब्ध कराई गई। इसमें अनिल चौधरी का नंबर 886वां था। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अनिल को निर्दोष बताते हुए अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट-1 में जमानत प्रार्थना-पत्र दिया गया, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया।

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