लाल-नारंगी श्रेणी के उद्योगों पर बढ़ी निगरानी, मानक से अधिक धुआं निकलने पर लखनऊ-दिल्ली तक पहुंचेगा अलर्ट
मुजफ्फरनगर और शामली में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए लाल-नारंगी श्रेणी के उद्योगों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।

ये तस्वीर AI द्वारा जनरेट की गई है।
HighLights
लाल-नारंगी श्रेणी के उद्योगों पर निगरानी बढ़ी।
ओसीईएमएस से अधिक धुएं पर तुरंत अलर्ट।
ग्रैप पाबंदियां दीपावली से पहले लागू होंगी।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरनगर। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को लेकर निगरानी कड़ी कर दी गई है। ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) की पाबंदियां लागू होने से पहले क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुजफ्फरनगर और शामली की 200 से अधिक इकाइयों में ऑनलाइन सतत निगरानी प्रणाली (ओसीईएमएस) लगाई गई है। इन इकाइयों को विभाग के सर्वर से जोड़ा गया है।
चिमनी से मानक से अधिक धुआं निकलते ही अलर्ट दिल्ली स्थित वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ लखनऊ स्थित बोर्ड तक पहुंचेगा। संबंधित उद्योग में टीम भेजने के साथ स्थानीय विभाग को भी सूचित किया जाएगा।
नवंबर से सर्द मौसम शुरू होगा और जनपद की आठ शुगर मिलों में गन्ना पेराई शुरू हो जाएगी। सर्दियों में हवा का दबाव बढ़ने से पार्टिकुलेट मैटर के बारीक कण पर्यावरण को दूषित करते हैं।
इससे हवा प्रदूषित और दमघोंटू हो जाती है। दीपावली से पहले ग्रैप की पाबंदियां लागू होंगी और उद्योगों को नियमों के अनुसार संचालन करना होगा। जनपद में छह से अधिक उद्योगों में ओसीईएमएस पूरी तरह काम नहीं कर रहा है। विभाग ने उन्हें चेतावनी दी है।
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क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शुगर मिल, डिस्टलरी, फर्नेस और लोहा इकाइयों को लाल श्रेणी में रखा है। पेस्टीसाइड, फार्मर उद्योग और सरिया बनाने वाली इकाइयां नारंगी श्रेणी में हैं। इसके अलावा 200 से अधिक हरी श्रेणी की इकाइयों की भी जांच की जा रही है।
ओसीईएमएस के दायरे में आने वाली सभी इकाइयों की जांच और नई व्यवस्था का सत्यापन किया जा रहा है। ओसीईएमएस लगाने वाले उद्योगों को सीएक्यूएम और सीबीसीपी के सर्वर से जोड़ा जा रहा है। ग्रैप की पाबंदियों को लेकर विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
- गीतेशचंद्र, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी, मुजफ्फरनगर।
