मुजफ्फरनगर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, नशे के लिए इस्तेमाल होने वाले कैप्सूल और इंजेक्शन के साथ 3 तस्कर पकड़े
मुजफ्फरनगर पुलिस ने नशे के लिए इस्तेमाल होने वाले कैप्सूल और इंजेक्शन के साथ तीन तस्करों को पकड़ा है।

मुजफ्फरनगर के पुलिस लाइन सभागार थाना सिविल लाइन पुलिस द्वारा पकड़े गए आरोपितों के बारे में जानकारी देते एसएसपी संजय कुमार वर्मा
HighLights
मुजफ्फरनगर पुलिस ने तीन नशा तस्करों को किया गिरफ्तार।
72 हजार कैप्सूल, 549 इंजेक्शन और बलेनो कार बरामद।
हापुड़ से ऑनलाइन ऑर्डर कर बेचते थे नशे का सामान।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरनगर। सिविल लाइंस पुलिस ने नशे के लिए इस्तेमाल होने वाले कैप्सूल और इंजेक्शन के साथ तीन तस्कर पकड़े हैं। यह गिरोह हापुड से ऑनलाइन आर्डर करके कैप्सूल और इंजेक्शन मंगवाता था, जिसे बाजारों और दुकानों के अलावा मेडिकल स्टोर पर सप्लाई करता था। इनके कब्जे से सात लाख रुपये के लगभग 72 हजार कैप्सूल और 549 इंजेक्शजन समेत बलेनो कार बरामद हुई है। पिछले तीन माह में गिरोह करीब 50 लाख रुपये का माल बेच चुका है।
पुलिस लाइन के सभागार में पत्रकार वार्ता में एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि सिविल लाइंस पुलिस मंगलवार रात को रेलवे रोड के निकट चेकिंग कर रही थी।
तभी बलेनो कार को आता देखकर रुकने का इशारा किया, लेकिन कार सवार भागने लगे। पीछा करने के बाद माल रोड से कार सवारों दीपक पुत्र रोहताश निवासी ग्राम कुतुबपुर छपार व हाल पता रेलवे स्टेशन के पास खतौली इसके साथी कलीम पुत्र अशफाक निवासी बधौली, खरखौदा, जुनैद पुत्र इकबाल निवासी मुफ्ती कय्यूम मदरसा के पास, जूस वाली गली लोहिया नहर, मेरठ को पकड़ लिया गया।
जांच की गई तो कार में रखे कार्टन में स्पास्मोविल कंपनी के 48 हजार ट्रामाडोल (भूरा रंग) तथा 24 हजार नीला रंग के कैप्सूल के अलावा एविल कंपनी के 50 और पैंटासिल कंपनी के 499 इंजेक्शन बरामद हुए। बरामद कैप्सूल एवं इजेक्शन की कीमत लगभग सात लाख रुपये है।
यह गिरोह पिछले तीन माह से सक्रिय था। 12वीं पास आरोपित दीपक रेलवे रोड पर अपने पिता के साथ कंफैक्शनरी की दुकान चलाता है, जबकि 12वीं पास कलीम मेरठ व आसपास में मेडिकल सर्जिकल उपकरण के साथ दवाई सप्लाई करता है।
वहीं आरोपित जुनैद बीएससी स्नातक करने के बाद चिकित्सकीय सामग्री वाली एफटीसी कंपनी में नौकरी करता था, लेकिन वर्तमान में वह भी सर्जिकल उपकरण बेचता था। आरोपित दीपक को कमीशन का लालच देकर साथ जोड़ा था।
इस तरह करते थे तस्करी
एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि आरोपित जुनैद और कलीम हापुड़ में रहने वाले तस्कर से वाट्सएप पर आनलाइन आर्डर भेजते थे। वहां से कैप्सूल और इंजेक्शन के कार्टन को बस समेत वाहन से खतौली में मंगवाते थे।
उसके बाद दाेनों आरोपित दीपक को माल देकर उसे दुकानों, मेडिकल स्टोर समेत झोलाछाप चिकित्सकों को सप्लाई करते थे। कैप्सूल के पत्ते पर और इंजेक्शन पर गिरोह 50 से 100 रुपये कमाता था। उसके बाद रुपयों को आपस में बाट लेते थे। पुलिस हापुुड़ के तस्कर की तलाश में लगी है।
लाइसेंसधारक बेच सकते हैं कैप्सूल
आरोपितों के पास से बरामद कैप्सूल व इंजेक्शन रजिस्ट्रर्ड चिकित्सक द्वारा लिखे गए प्रसक्रिप्शन पर लाइसेंस धारक मेडिकल स्टोर संचालक, मेडिकल एजेंसी संचालक ही बेच सकता है। औषधि विभाग अनुसार इस तरह की सभी सामग्री का रिकार्ड रखना अनिवार्य रहता है।
