शराब पार्टी के लिए बनवाया था वन-डे लाइसेंस... जालसाज ने कर दिया फर्जीवाड़ा, यूं पकड़ा में आया मामला
मुजफ्फरनगर में एक दीपावली पार्टी के लिए बनवाया गया वन-डे शराब लाइसेंस फर्जी निकला। आबकारी विभाग ने जांच के बाद ...और पढ़ें

(प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
दीपावली पार्टी के लिए फर्जी शराब लाइसेंस बनवाया गया।
जालसाज ने स्थान और तारीख बदलकर लाइसेंस दिया।
आबकारी विभाग ने आयोजक व जालसाज पर केस दर्ज किया।
संवाद सहयोगी, जागरण. मुजफ्फरनगर। होटल में आयोजित की जाने वाली दीपावली पार्टी में शराब पीने के लिए वन-डे लाइसेंस बनवाया गया। आरोप है कि आबकारी विभाग की ओर से दो दिन के लिए लाइसेंस जारी करना दर्शाकर दस हजार रुपये वसूल लिए गए। जालसाज ने फर्जी लाइसेंस बनाकर दे दिया। स्थान व तारीख भी बदल दी गई। जांच पड़ताल के बाद आबकारी विभाग के निरीक्षक ने पार्टी के आयोजनकर्ता व एक जालसाज के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
छह नवंबर को होटल स्वर्ण इन एंड सुईटस में देर शाम दीपावली पार्टी का आयोजन किया जाना था। पार्टी में शराब पिलाने के लिए इवेंट बार लाइसेंस वन-डे लाइसेंस (एफएल-11) आबकारी विभाग से लिया जाना होटल के मैनेजर को बताया गया था। इस बारे में होटल के फ्रंट कार्यालय के मैनेजर ने आबकारी विभाग के निरीक्षक अनिल कुमार को जानकारी दी। बताया कि लाइसेंस पर हार्दिक ओबराय लिखा है। मामला संदिग्ध मानते हुए निरीक्षक अनिल कुमार अपनी टीम के साथ होटल में पहुंचे।
उन्होंने बताया कि लाइसेंस फर्जी पाया, क्योंकि जबकि जिला आबकारी अधिकारी कार्यालय से यह लाइसेंस पांच नवंबर को किसी अन्य व्यक्ति के नाम से होटल ग्रांड रेडिएंट इन मेरठ रोड मंसूरपुर के लिए जारी किया था। लाइसेंस के संबंध में पार्टी के आयोजनकर्ता हार्दिक ओबेराय निवासी गांधी कालोनी मुजफ्फरनगर से पूछताछ की गई।
उसने बताया कि उसने यह लाइसेंस अपने परिचित अर्पित चौधरी से बनवाया था। निरीक्षक अनिल कुमार ने बताया कि जांच में लाइसेंस फर्जी पाया गया। जालसाज ने जिस होटल में पार्टी होनी थी उसका स्थान, तारीख भी असली लाइसेंस में फर्जीवाड़ा कर बदल दी थी।
तलाशी में होटल के परिसर में किसी भी प्रकार की अवैध शराब नहीं मिली। प्रथम दृष्टया जांच में सरकारी विभाग द्वारा जारी आधिकारिक दस्तावेज में अनधिकृत परिवर्तन, फर्जीवाड़ा एवं फर्जी दस्तावेज को वास्तविक दस्तावेज के रूप में उपयोग करना सामने आया है। उन्होंने बताया कि सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। उधर, इस मामले में आबकारी विभाग के कर्मचारी की मिलीभगत होने की चर्चा चल रही है। जिला आबकारी अधिकारी रवि शंकर का कहना है कि सरकारी दस्तावेज में फर्जीवाड़ा करना गंभीर अपराध है। आबकारी विभाग द्वारा वन-डे लाइसेंस 11 हजार रुपये में जारी किया जाता है जबकि फर्जी लाइसेंस दस हजार रुपये में दो दिन के लिए जारी किया गया है।