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रूढ़िवाद की बेड़ियां टूटीं: यूपी में पिता की तेरहवीं पर बेटी के सिर बंधी पगड़ी, संभालेगी परिवार की बागडोर

Published: Tue, 20 Oct 2026 09:05 AM (IST)

मुजफ्फरनगर के जावन गांव में मेधावनी ने पिता की तेरहवीं पर पगड़ी पहनकर पितृसत्तात्मक परंपरा को तोड़ा और परिवार की जिम्मेदारी संभाली।

खतौली जावन गांव में पिता की रस्मी तेरहवीं में बेटी मेधावनी को पगड़ी बांधने स्वजन और समाज के लोग

खतौली जावन गांव में पिता की रस्मी तेरहवीं में बेटी मेधावनी को पगड़ी बांधने स्वजन और समाज के लोग

HighLights

  1. मेधावनी ने पिता की तेरहवीं पर पगड़ी पहनी।

  2. पितृसत्तात्मक समाज की रूढ़िवादी बेड़ियां तोड़ी गईं।

  3. बेटी ने परिवार की जिम्मेदारी संभालने का संकल्प लिया।

संवाद सहयोगी, मुजफ्फरनगर। रूढ़िवाद की बेड़ियां एक बार फिर टूटीं और पितृसत्तात्मक समाज को चुनौती मिली। जिस तरह हमारा समाज खुद ही प्रासंगिकता खो चुकी परंपराओं का त्याग करता है, वैसा ही हुआ। जावन गांव में पिता की तेरहवीं पर समाज ने बेटी के सिर पर पगड़ी बांधकर परिवार की जिम्मेदारी सौंपी। आमतौर पर यह जिम्मेदारी बेटे के सिर बांधी जाती है, लेकिन 19 वर्षीय इकलौती बेटी मेधावनी ने हौसला दिखाया और मिसाल बन गई।

पुुरुष प्रधान समाज में रूढ़िवाद की सबसे भारी बेड़ियां बेटियों के पैरों में बंधी होती हैं। बेटियों को लड़की होने का हवाला देकर कमजोर साबित किया जाता है। कई स्वाभिमानी बेटियां अब ऐसी मानसिकता को आईना दिखा रही हैं। जावन गांव की मेधावनी ऋषिकेश में योग प्रशिक्षित है। 15 अक्टूबर को उसके 60 वर्षीय पिता शिवकुमार का निधन हो गया था।

मुजफ्फरनगर की एक प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले शिवकुमार के कोई बेटा नहीं था। वे अपनी इकलौती बेटी को पुत्र समान समझते थे। मेधावनी ने भी कभी अपने पिता को बेटे की कमी नहीं खलने दी। पिता की मृत्यु के बाद मुखाग्नि भी उसी ने दी। सोमवार को गांव में शिव कुमार की रस्म तेरहवीं थी। मेधावनी ने पगड़ी बंधवाने की इच्छा जताई थी। इस पर समाज और परिवार के लोगों ने सहमति प्रदान की थी। परिवार व रिश्तेदारों की मौजूदगी में पगड़ी की रस्म निभाई गई।

बेटी को बेटे के समान मानते थे पिता

भाजपा नेता मनवीर सिंह, जयप्रकाश तोमर, यशपाल, सुधीर कुमार, मा. प्रमोद, मा. चेतन ने पिता की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभालने का दायित्व सौंपे जाने की रस्म के रूप में बांधी जाने वाली पगड़ी मेधावनी के सिर बांधी गई। इस कदम की सभी ने सराहना की।

मेधावनी ने बताया कि उनके पिता उसे बेटे के समान मानते थे। बेटियों के प्रति समाज का नजरिया बदलने और रूढ़िवादी रीति-रिवाज में बदलाव के लिए यह पहल की है। इससे वह गर्व महसूस कर रही है। बेटे की तरह अपनी मां की देखभाल करेगी। मां पारुल का कहना है कि उसने कभी मेधावनी को बेटी होने पर कमजोर महसूस नहीं करने दिया।

वह उसकी मां होने पर गर्व महसूस करती है। मेधावनी के परिवार के सुधीर कुमार का कहना है कि उसने बेटा बनकर पिता की मृत्यु के बाद सभी रस्म निभाने की इच्छा व्यक्त जताई थी। परिवार और समाज के लोगों को कोई आपत्ति नहीं थी। मेधावनी की यह सराहनीय पहल है।

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