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Kanwar Yatra: दादी की इच्छा पूरी करने निकले दो युवक; हरिद्वार से उठाई 'श्रवण कुमार कांवड़', हरियाणा में करेंगे जलाभिषेक

Kanwar Yatra Muzaffarnagar पिछले कई वर्षाें से अकेले कांवड़ यात्रा करने वाले दोनों युवकों के सामने जब दादी ने अपनी इच्छा व्यक्त की तो उन्होंने तत्काल हामी भर ली। दोनों युवकों ने एक पालकी में एक तरफ दादी और दूसरी तरफ उनके वजन के बराबर गंगाजल हरिद्वार से उठाया है। वे शिवरात्रि को हरिद्वार में शिव मंदिर पर ये गंगाजल चढ़ाएंगे।

By Jagran News Edited By: Abhishek Saxena Tue, 09 Jul 2024 11:45 AM (IST)
Muzaffarnagar News: पुरकाजी से पालकी में दादी को बैठाकर गंतव्य की ओर जाते हुए शिवभक्त युवक।

संवाद सूत्र जागरण पुरकाजी/मुजफ्फरनगर। हरियाणा के दो युवक दादी की इच्छा पूरी करने के लिए निकले हैं। पालकी में एक तरफ बुजुर्ग दादी हैं तो दूसरी ओर गंगाजल लेकर हरिद्वार से हर-हर महादेव के जयकारों के साथ 'श्रवण कुमार कांवड़' लेकर अपने गंतव्य को चले हैं। दादी राजबाला का कहना है कि आज मेरा सपना पूरा हो गया। आज मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मेरे पोते मेरे लिए ये कावड़ लेकर जा रहे है।

हरियाणा के हैं युवक

हरियाणा के जिला झज्जर के गांव बहादुरगढ निवासी विशाल व जतिन पुत्रगण अनील कुमार, जो मेहनत−मजदूरी करते है। कई वर्षों से अकेले कांवड़ लेकर आ रहे हैं। दादी ने पोतों से कांवड़ लाने की इच्छा जताई। दोनों पोतों ने दादी की इच्छा कराने को लेकर श्रवण कुमार कांवड से दादी की इच्छा पूरी कराने की मन में सोची।

हर की पौड़ी से निकले दो युवक

बडे़ पोते विशाल ने बताया कि वे एक जुलाई को देव नगरी हरिद्वार की हर की पौड़ी से गंगा स्नान कर अपनी दादी के वजन का गंगाजल तथा दूसरी पालकी में दादी को बैठाकर भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद से चले थे। प्रत्येक दिन 7-8 किलोमीटर चलने के बाद श्रवण कुमार कांवड़ के साथ कस्बे में पहुंचे हैं। उन्हें देखने के लिए कस्बे में लोगों को भीड़ एकत्रित हो गई। लोगों ने दोनों पोतों को जमकर प्रशंसा की है।

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दादी को पालकी में बैठाकर निकले पोते

विशाल ने बताया कि दोनों भाई हरिद्वार से दादी को पालकी में बैठ कर ला रहे हैं। भगवान भोलेनाथ की ऐसी कृपा है कि उन्हें कोई अभी तक परेशानी नहीं हुई। वे अपने गांव के शिव मंदिर में शिवरात्रि जलाभिषेक करेंगे।

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दादी बोली सपने में न सोचा था

बुजुर्ग राजबाला ने नम आखों से बताया कि उन्होंने कभी सपने में नहीं सोचा था कि उनके पोते हरिद्वार से पालकी में बैठाकर कांवड़ यात्रा कराएंगे। भगवान भोलेनाथ की कृपा से उनका जीवन सफल हो गया। दादी ने दोनों पोतों को आशीर्वाद दिया।