मुजफ्फरनगर, जेएनएन। काली नदी (पश्चिमी) कूड़े और कचरे से अट गई है। अधिकारियों की लापरवाही का दंश नदी को झेलना पड़ रहा है। निकायों को काली नदी की सफाई और जागरूकता के लिए बजट मिला, लेकिन उसका सही प्रयोग नहीं किया जा सका है। नदी को सबसे अधिक निकायों के नाले प्रदूषित कर रहे हैं। नालों में प्रदूषित जल बह रहा है, जिसे नदी में डाला जा रहा है। वहीं, औद्योगिक इकाइयों का रंगीन पानी भी नदी में पहुंच रहा है।

काली नदी का साफ करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। गांव नियाजूपुरा क्षेत्र में काली नदी में कूड़े और कचरे का जगह-जगह ढेर लगा है। यहां पानी की मात्रा कम है। ऐसे में कूड़े के कारण दुर्गध उड़ रही है। वहीं, रविवार को अनेक स्थानों पर दशानन और उसके कुटुंब के पुतले दहन किए गए हैं। उनका कूड़ा-कचरा भी नदी में डाल दिया गया। इससे नदी और अधिक प्रदूषित हो गई है। पालिका के करीब छह नाले सीधे नदियों में गिरते हैं। इनमें कई गुणा खतरनाक स्तर का पानी बहता है। जानसठ क्षेत्र में जट मुझेड़ा, धंधेड़ा नालों से भी दूषित पानी भी नदियों तक पहुंचता है। ईपीसीए के चेयरमैन भूरेलाल द्वारा फटकार लगाने के बाद क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दोनों नालों का सफाई कार्य शुरू कराया है। नगर पालिका मुजफ्फरनगर को 17 लाख और बुढ़ाना नगर पंचायत को दो लाख रुपये काली नदी की स्वच्छता, जागरूकता के लिए फैलाने के लिए बजट दिया था।

इन्होंने कहा

औद्योगिक इकाइयों से दूषित जल काली नदी में नहीं बहाया जाए। इसके लिए कड़ी निगरानी की जा रही है। धंधेड़ा, जट मुझेड़ा नाले की सफाई कराने के साथ इकाइयों को शत प्रतिशत दूषित जल को साफ करने के निर्देश दिए हैं।

-अंकित सिंह, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी, मुजफ्फरनगर।

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