मनीष शर्मा, मुजफ्फरनगर।

कबीर माया पापणीं, हरि सूं करे हराम।

मुखि कडियाली कुमति की, कहण न देई राम।।

अर्थात, 'यह माया बड़ी पापिन है। यह प्राणियों को परमात्मा से विमुख कर देती है तथा उनके मुख पर दुर्बुद्धि की कुंडी लगा देती है और राम-नाम का जप नहीं करने देती'। कभी छठीं-सातवीं कक्षा में महान संत कबीरदास जी का यह दोहा पढ़ा था लेकिन एक बार फिर मौजूं नजर आया अब जिला पंचायत अध्यक्ष पद चुनाव में, ..जब सियासतदानों की कलाबाजी देखी। बरसों-बरस पहले निकली संत कबीरदास की वाणी आज भी उस वक्त मौजूं हो उठी जब जिला पंचायत अध्यक्ष पद के मतदान की रणनीति से पहले मिजाज और सिद्धातों के मुखालिफ मिठाइयों के दौर चलते दिखे, वहीं राजनीति से खुद को जुदा रखते-बताते समाजी जिम्मेदारों के सिर पर सियासत का सेहरा बाधा गया। जीत और खेमे में होने के दावों के बीच खिंचते जिला पंचायत सदस्य की हालत विचित्र ही है।

केंद्र के साथ प्रदेश में भाजपा की सरकार है। पिछली जिला पंचायत में भाजपा ने अपने सात समíथत सदस्यों के बूते पूरे पाच साल राज किया। सपा की बहुलता के बावजूद सदन के गठन का पूरा श्रेय केंद्रीय राज्यमंत्री डा.संजीव बालियान को गया। इस बार भाजपा के 13 समíथत सदस्य चुनाव जीते हैं, लेकिन सहमति बनाने के लिए समर्थन जुटाना टेढ़ी खीर साबित होता दिख रहा है। नतीजतन, हर दल के सिपहसालार जीत का तिलिस्म बुनने को विचारधारा और सिद्धातों से आखें चुराने को मजबूर दिख रहे हैं। मसलन, तीन दिन पहले वार्ड 39 से जीते जिला पंचायत सदस्य शाहनवाज के साथ भाजपा के दिग्?गजों की जुगलबंदी ने चर्चागोशी बढ़ा दी। जिला पंचायत अध्यक्ष की जोड़तोड़ में जिन शाहनवाज की भाजपा के तमाम कद्दावर मनुहार करते दिखे, उनके खिलाफ ककरौली थाने में कई ऐसे मुकदमे दर्ज हैं? जिनकी लड़ाई भाजपा सड़क से संसद तक लड़ती रही है। यही नहीं, पुलिस के साथ धक्कामुक्की की वीडियो देख तब खुद सारे जनप्रतिनिधियों के मुंह गुस्से से सूर्ख हुए थे। मौजूदा मंजर ने आमजन को सोच में डाल दिया था कि उनके नुमाइंदे तब गलत थे या अब?

उधर, भारतीय किसान यूनियन पूरी तरह से अ-राजनीतिक रही है। इस बार बालियान खाप के चौधरी और भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत को सारे विपक्ष को एकत्र करने की जिम्मेदारी सौंपने और उनके अभी तक निभाने का संकेत पुख्ता कर दिया कि माया वास्तव में पापणीं है। केंद्रीय राज्यमंत्री डा. संजीव बालियान के तहेरे भाई सत्येंद्र बालियान को विपक्ष का प्रत्याशी घोषित कर ढाई-ढाई साल की साझेदारी पर मुहर ने जता दिया कि अ-राजनीतिक भाकियू में कहीं न कही राजनीतिक सोच विकसित हो चली है। इतना ही नहीं, भाजपा ने एक ऐसी जिला पंचायत सदस्य को अपने खेमे में मिलाया, जिस पर रालोद और काग्रेस दोनों अपनी-अपनी दावेदारी करते रहे हैं। वार्ड-37 से जीतीं मोहम्मद जर्रार की पत्नी जूली जाटव की आमद के बाद से मजहबी और वैचारिक सुगबुगाहट ने भगवा अलंबरदारों के सुर बदल दिए हैं। बहरहाल, जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर भगवा ब्रिगेड की प्रतिष्ठा दाव पर लगी है, वहीं विपक्ष भी सतह के नीचे गुल खिलाने को आतुर है।

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बाक्स

2021 में चुनाव जीते जिला पंचायत सदस्य

-- राजनीतिक दल जीते सदस्य भाजपा : 13 आजाद समाज पार्टी : 6 राष्ट्रीय लोकदल : 3 समाजवादी पार्टी : 00 काग्रेस : 00 बहुजन समाज पार्टी :03 भारतीय किसान यूनियन : 01 निर्दलीय : 17 -------------

2015 में चुनाव जीते जिला पंचायत सदस्य

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राजनीतिक दल जीते सदस्य भारतीय जनता पार्टी : 7 समाजवादी पार्टी : 12 बहुजन समाज पार्टी : 4 राष्ट्रीय लोकदल : 2 काग्रेस : 0 भारतीय किसान यूनियन : 2 निर्दलीय: 16

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