मुजफ्फरनगर में 13 से सजेगा ऐतिहासिक गोगा म्हाड़ी मेला, पुलिस-प्रशासन मुस्तैद; कई राज्यों से पहुंचेंगे लाखों श्रद्धालु
मुजफ्फरनगर के दूधली गांव में 13 सितंबर से तीन दिवसीय ऐतिहासिक गोगा म्हाड़ी मेले का आयोजन होगा, जिसमें उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से श्रद्धालु पहुंचेंगे।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
दूधली गांव में 13 सितंबर से तीन दिवसीय गोगा म्हाड़ी मेला।
उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से लाखों श्रद्धालु पहुंचेंगे मेले में।
मेले की सुरक्षा व्यवस्था हेतु पुलिस-प्रशासन ने दिए आवश्यक निर्देश।
संवाद सूत्र, चरथावल। दूधली गांव स्थित ऐतिहासिक गोगा म्हाड़ी पर 13 सितंबर से तीन दिवसीय मेले का आयोजन किया जाएगा। मेले को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। आस्था के इस बड़े आयोजन में उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड और राजस्थान समेत कई राज्यों से श्रद्धालु पहुंचकर जाहरवीर गोगा की म्हाड़ी पर प्रसाद चढ़ाकर मन्नतें मांगते हैं।
वहीं, मेले की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एसडीएम सदर व थाना प्रभारी सत्यनारायण दहिया ने पुलिसकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बुजुर्ग ग्रामीण बताते हैं कि गांव दूधली स्थित गोगा म्हाड़ी का इतिहास करीब पांच सौ वर्ष पुराना है। मान्यता है कि दूधली के मजरे आलमगीरपुर निवासी एक किसान की मन्नत पूरी होने पर वह अपने घोड़े के नीले रंग के बछेरे को लेकर पैदल ही राजस्थान के बागड़ में जाहरवीर को अर्पित करने गया था।
किसान की भक्ति से प्रसन्न होकर जाहरवीर ने स्वयं प्रकट होकर उसे पांच ईंटें देकर गांव में म्हाड़ी बनाने का आदेश दिया था। भक्त को चेताया था कि लौटते हुए रास्ते में कहीं भी यह ईंट जमीन पर न रखे, अन्यथा ईंटें वही स्थापित हो जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के नजदीक आने पर किसान संकल्प को भूल गया और उसने रास्ते की थकावट के चलते गांव दूधली में ईंट जमीन पर रख दी।
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कुछ देर आराम करने के बाद चलते समय जब किसान ने ईंटें उठानी चाही तो ईंटें अपने स्थान से नहीं उठ सकी। तब जाहरवीर द्वारा कही बात किसान को याद आई। उसके बाद ईंट रखे स्थान पर ही म्हाड़ी बनाई गई थी। ग्रामीण बताते हैं तब से वही परिवार आज तक भी पुजारी के रूप में देखभाल करता है। इस स्थान पर तब ही से तीन दिवसीय मेला लगता है।
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दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, राजस्थान सहित दूर-दूर से श्रद्धालु म्हाड़ी पर प्रसाद चढ़ाकर मन्नतें मांगते हैं। इस मेले में दंगल व मनोरंजन के लिए झूले, वैरायटी शो, खेल खिलौने की दुकानें लगाई जाती हैं।
