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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 19, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

खिचड़ी वाले बाबा ब्रह्मलीन

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Published: Tue, 19 Feb 2013 02:09 AM (IST)Updated: Tue, 19 Feb 2013 02:11 AM (IST)

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मोरना: मानव सेवा के मार्ग का एक पथिक स्वर्गलोक की यात्रा पर चला गया। खिचड़ी वाले बाबा की बावुचर कुटिया के वयोवृद्ध मुख्य महंत शारदादास जी महाराज (खिचड़ी बाले बाबा) गत रात्रि ब्रह्मलीन हो गए। गंगा घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। बाबा अनेक वर्षो से देशी जड़ी-बूटियों से पीड़ितों का इलाज कर रहे थे। देशभर में बाबा के बड़ी संख्या में शिष्य हैं।

गंगा खादर क्षेत्र में भोकरहेड़ी के जंगल स्थित श्री श्रीचंद उदासीन खिचड़ी वाले बाबा कुटी पर करीब चालीस वर्ष पूर्व शारदादास जी महाराज गुरु प्रयागदास जी महाराज की शरण में आ गए थे। गुरु का शरीर पूरा होने पर बाबा को गद्दी का मुख्य महंत बनाया गया था। शारदा दास जी महाराज भी अपने गुरु की तरह ही कुटी पर देशी जड़ी- बूटियों से पीड़ितों का निशुल्क इलाज करने लगे। धीरे-धीरे उनकी ख्याति दूर-दूर तक फैल गई। लंबे समय से 96 वर्षीय बाबा उदर रोग से पीड़ित थे। रविवार की देर रात बाबा ने मेरठ के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। वहां से बाबा के पार्थिव शरीर को शुक्रताल के आश्रम पर लाया गया। सूचना मिलते ही साधु-संतों के अलावा हजारों भक्त बाबा के अंतिम दर्शन को आश्रम पहुंचना शुरू हो गए। इसके बाद बैंड बाजों के बीच बाबा की अंतिम यात्रा नगरी के विभिन्न मार्गो से होती हुई गंगा घाट पर पहुंची। उनके शिष्य महामंडलेश्वर मोहनदास महाराज ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान स्वामी ओमानंद महाराज, स्वामी केशवानंद, स्वामी वेददास, बाबा कृपालदास, महंत धर्मदास, भगवत स्वरूपाचार्य, गीतानंद, रामगिरी, आचार्य विष्णु, भाजपा नेता डा. वीरपाल निर्वाल, चैयरमैन कैप्टन ज्ञानेंद्र कुमार, पूर्व चैयरमैन राजेश कुमार, प्रधान नीरज शास्त्री, भाकियू के अमित राठी समेत हजारों लोग उपस्थित रहे।

रामधन से शारदादास तक

मोरना : बाबा शारदादास महाराज के बड़े भाई रामरतन शर्मा ने बताया कि उनका जन्म गांव खेड़ी दुधाधारी में 1917 में हुआ था। इनका नाम रामधन था। हाईस्कूल तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद ये गांव रहमतपुर में अपनी बुआ राजदेई के यहां रहने लगे। शादी के बाद इनके तीन बच्चों ने जन्म लिया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद पत्‍‌नी सहित तीनों बच्चों की मौत हो गई। इसके बाबा को वैराग्य हो गया और भोकरहेड़ी के जंगल में खिचड़ी वाले बाबा प्रयागदास से दीक्षा ली। इनका संन्यासी नाम शारदादास रखा गया।

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करोड़ों की संपत्ति का उत्तराधिकारी कौन ?

मोरना : महंत बाबा शारदादास जी महाराज ने तीर्थनगरी शुक्रताल के अलावा भी खानपुर, हरिद्वार, मेरठ, तुगलपुर में आश्रम बनवाए हैं। इसके अलावा आश्रम के पास करीब 29 बीघा जमीन भी है। एक शिष्य ने बताया कि महाराज श्री के कई शिष्य हैं, लेकिन उत्तराधिकारी की घोषणा उनकी सतरहवीं पर ही की जाएगी।

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ऐसे बने खिचड़ी वाले बाबा

मोरना: शारदादास महाराज प्रयागदास महाराज के शिष्य थे। प्रयागदास महाराज बाबा बुद्धदास महाराज के शिष्य थे। बुद्धदास महाराज हमेशा अपने भक्तों को खिचड़ी का प्रसाद का वितरित करते थे। आश्रम में उनके वक्त से ही खिचड़ी वितरित की जाती है। इसी कारण लोग शारदादास महाराज को खिचड़ी वाला बाबा के नाम से पुकारने लगे।

श्रद्धासुमन

स्वामी शारदा दास महाराज उच्च कोटि के संत थे। उन्होंने समाज को एक अच्छी दिशा देने का प्रयास किया।

स्वामी ओमानंद, शुकतीर्थ

स्वामी शारदा दास महाराज ने वर्षो तक जड़ी-बूटी दवाई पीड़ितों को देकर उनकी सेवा की। पीड़ित हमेशा उनके आभारी रहेंगे।

केशवानंद महाराज, शुकतीर्थ

आश्रम में हर आने वाले की सेवा की जाती थी। वह काफी सरल स्वभाव के थे। समाज में उन्हें हमेशा याद रखेगा।

बाबा कृपाल दास महाराज, शुकतीर्थ

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