राजेश राज, गजरौला (अमरोहा) : बदलता दौर है, स्वार्थ और लूट खसौट की तरफ भीड़ दौड़ती दिख रही है। इन्हीं लोगों की बेशुमार भीड़ में कुछ ऐसे भी चेहरे निकल रहे हैं, जो अपनी चुनौतियों को स्वीकारने के साथ दूसरों की भी परवाह कर रहे हैं। ये दूसरे वे हैं जिन्हें कपड़ों समेत रोजमर्रा की आवश्यक चीजों की जरूरत होती है, लेकिन आर्थिक तंगी और अन्य कारणों से वे पूरा नहीं कर पाते। इन लोगों की जरूरत को एक अलमारी पूरा कर रही है, जिसके द्वार हमेशा खुले रहते हैं। यह अलमारी गजरौला के थाना चौराहे के पास सार्वजनिक स्थान पर रखी गई है। अलमारी में मौसम के हिसाब से कपड़े रहते हैं, जिसको भी चाहिए होता है वह दरवाजा खोलता है और ले लेता है। दो युवकों ने की शुरुआत

इसकी शुरुआत दो युवकों गजरौला निवासी कुंदन सिंह भंडारी और ज्ञान प्रकाश नेगी ने की। दोनों एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं। उनको आइडिया आया कि हर घर में कुछ न कुछ ऐसा सामान होता है, जो उनके काम का नहीं होता। यही सामान दूसरों को मिल जाए तो उनके काम आ सकता है। लिहाजा इसी मकसद से उन्होंने घरों से अनुपयोगी कपड़ों को एकत्र कर जरूरतमंदों को पहुंचाना शुरू कर दिया। काम करने पर पता चला कि लोगों को सर्दी-गर्मी के हिसाब से कपड़ों की जरूरत तो होती है, लेकिन वह किसी से लेने में संकोच करते हैं। इसे महसूस करते हुए एक अलमारी की व्यवस्था की गई और उसे गजरौला में थाना चौराहे के पास सार्वजनिक स्थान पर रख दिया गया। इसमें कभी लॉक नहीं लगता। इसके साथ ही उन्होंने एक वाट्सएप ग्रुप भी बना दिया। हेल्पिंग हैंड नाम से बने ग्रुप में लोगों को जोड़ा और सभी लोग निशुल्क सेवा में लग गए। कुंदन सिंह भंडारी, ज्ञान सिंह नेगी और उनकी मुहिम से अब दो सौ से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं।

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दो माह से अलमारी लोगों की जरूरत पूरी कर रही

दो माह से यह अलमारी ऐसे ही लोगों की आवश्यकता को पूरा कर रही है। हर रोज 50 से अधिक लोग अपनी आवश्यकता के हिसाब से कपड़े छाटकर ले जाते हैं। दूसरों के हित के इस काम को सभी सराह रहे हैं। अभी पिछले रविवार को भीष्म सिंह आर्य एडवोकेट ने अपने घर रखा काम नहीं आने वाला चालू हालत वाला फ्रिज, रेंजर साइकिल और छोटे बच्चों वाला पालना अलमारी के पास रख दिया था। इसे कुछ ही समय बाद कोई जरूरतमंद ले गया। मुहिम से जुड़े लोग इस तरह की अलमारी की व्यवस्था शहर में दूसरी जगह भी करने की योजना बना रहे हैं ताकि और ज्यादा लोगों की मदद हो सके।

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कमेटी करती है निगरानी

कुंदन सिंह भंडारी बताते हैं कि अलमारी और स्थान की निगरानी के लिए एक कमेटी बनाई गई है। इसमें 15 लोगों को रखा गया है, जो दिन में अलग-अलग समय पर जाकर अलमारी के सामान को चेक और व्यवस्थित करते हैं। इसके अलावा आसपास के दुकानदार भी स्थान की निगरानी करते हैं, जिससे सामान सिर्फ जरूरतमंदों को ही मिलता है।

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