मुरादाबाद :

रामगंगा मुरादाबाद की एक सुहानी तस्वीर बनाती है। नदी के चलते लोगों को भूमिगत जल की समस्या नहीं होती, लेकिन बरसात के दिनों में नदी के किनारे की ओर की कालोनियों और मुहल्लों के लोगों के लोगों की दिल की धड़कन बढ़ जाती है। उनको 2010 में आई बाढ़ का डर सताने लगता है। यही कारण है रामगंगा के किनारे बंधा बनाने की मांग उठी थी। जिस पर मायावती सरकार ने दिलचस्पी दिखाते हुए प्रस्ताव भी स्वीकृत किया था। इसके लिए 1200 करोड़ रुपये निर्धारित हुए। बंधे की योजना ने कई गतिरोध के बाद थोड़ी रफ्तार भी पकड़ी थी। सभी संबंधित विभागों के साथ पटना से तटबंध विशेषज्ञों की टीम ने भी दौरा किया। टीम ने तटबंध बनाने के लिए पहले रामगंगा नदी के धारा तक कर लिए गए कब्जे हटाने के निर्देश दिए थे। रिपोर्ट में साफ लिखा था कि जब तक कब्जे नहीं हटेंगे तब तक बंधा नहीं बन सकता। प्रशासन को निर्देश भी मिले, लेकिन कुछ कब्जे गिराए भी गए, लेकिन सरकार बदलने के बाद सब कुछ ठंडे बस्ते में चला गया। राजनीतिक कारणों से मामला इस दिशा में रुचि नहीं दिखाई गई।

रामगंगा तटबंध निर्माण संघर्ष समिति ने लड़ी लड़ाई

बाढ़ के दौरान सबसे ज्यादा दिक्कत रामगंगा विहार और आशियाना, लालबाग, नवाबपुरा, जामा मस्जिद के आसपास के क्षेत्र के लोगों को हुई थी। इसके बाद रामगंगा तटबंध निर्माण संघर्ष समिति बनाई गई। समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने हर मंच पर तटबंध निर्माण के लिए मांग उठाई। मुरादाबाद में जब भी कोई मंत्री आया समिति की ओर से ज्ञापन दिया तो उन्हें आश्वासन मिलते रहे, लेकिन स्थिति जस की तस रही। इसके बाद समिति न्यायालय की शरण में चली गई।

सात साल में और ज्यादा बिगड़े हालात

2010 में आई बाढ़ के बाद से आगे के दो तीन साल तक लोगों के दिल में पानी का खौफ इस कदर था कि बारिश के दिनों में हर दिन पानी के इंच-इंच बढ़ने और उतरने की खबर रखते थे। बारिश शुरू होते ही लोग अपना सामान पहली मंजिल पर शिफ्ट करना शुरू कर दिया था। शासन के निर्देश पर नदी का पानी महानगर में आने से रोकने का इंतजाम करने के निर्देश भी दिए गए। लेकिन पिछले साल सालों में हालात सुधरने के बजाय बिगड़ते चले गए हैं। नदी में अवैध कब्जा हटने के बजाय बढ़ता जा रहा है।

एमडीए ने बताया थी खूबसूरत योजना

तटबंध के लिए एमडीए की ओर से भी खूबसूरत योजना तैयार की थी। जिसके तहत जामा मस्जिद पुल से लेकर विवेकानंद पर बने दूसरे पुल तक बंधा बनाया जाता। बंधे पर सड़क बनाए जाने की योजना थी। जो महानगर को जाम से मुक्ति दिलाती। घनी आबादी का ट्रैफिक कांठ रोड के बजाय बंधे से होता हुआ महानगर के बाहर निकलता। बंधे के किनारे मनोरंजन पार्क विकसित किए जाते। जिससे लोगों को पिकनिक मनाने के लिए शहर में ही जगह मिल जाती। लेकिन अवैध कब्जों ने सारी योजना पर पानी फेर दिया।

हाईकोर्ट ने सरकार से आठ हफ्ते में मांगा जवाब

हाईकोर्ट ने पिछले दिनों इस मामले में सुनवाई करते हुए आठ हफ्ते में सरकार से की गई कार्रवाई पर जवाब मांगा है। कोर्ट के आदेश के बाद शासन भी हरकत में आया है। इस मुद्दे को लेकर 28 अगस्त को बैठक बुलाई गई है। बैठक की अध्यक्षता सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन करेंगे। बैठक में कोर्ट में याचिका दायर करने वाले सभी दस लोगों को समिति के समक्ष अपने साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए बुलाया गया है। उन्होंने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है। सदस्य अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि हमने इस मामले को लेकर एक बैठक बुलाई है जिसमें आगे की रणनीति तैयार करेंगे।

Posted By: Jagran

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