अब बिना लाइसेंस नहीं चलेगी डिलीवरी बाइक: Zomato-Swiggy राइडर्स पर कड़ा एक्शन, बैग लेकर निकले तो होगी कार्रवाई
उत्तर प्रदेश सरकार ने गिग वर्कर्स के डिलीवरी वाहनों के लिए नए नियम लागू किए हैं, जिसके तहत बिना लाइसेंस, ...और पढ़ें

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HighLights
निजी बाइक से डिलीवरी पर भी होगी कार्रवाई, बैग लेकर निकलने पर रखना ही होगा लाइसेंस
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। कंधे पर कंपनी का बैग, मोबाइल फोन में आर्डर और बाइक की रफ्तार...अब इतनी तैयारी से डिलीवरी करने निकलना काफी नहीं होगा। सड़क पर दौड़ने वाली डिलीवरी बाइक को परिवहन विभाग की नजर से गुजरना होगा।
स्विग्गी, जोमैटो समेत आनलाइन सामान और खाना पहुंचाने वाली सेवाओं से जुड़े वाहनों के लिए शासन ने नियमों का जाल कस दिया है। बिना जरूरी लाइसेंस, पंजीकरण और परमिट शर्तों का पालन किए डिलीवरी करने वाले वाहनों पर कार्रवाई होगी।
प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश मोटर यान (33वां संशोधन) समूहक और वितरण सेवा प्रदाता नियमावली, 22 मई 2026 लागू की है। इसके तहत समूहक और वितरण सेवा प्रदाताओं को लाइसेंस लेना अनिवार्य है।
मौजूदा सेवा प्रदाताओं को अधिसूचना के 90 दिन के भीतर लाइसेंस लेना होगा, जबकि नए सेवा प्रदाताओं को संचालन शुरू करने से पहले ही लाइसेंस लेना पड़ेगा।
डिलीवरी के लिए निजी श्रेणी में पंजीकृत बाइक इस्तेमाल करने का मामला परिवहन विभाग के निशाने पर है। विभाग अब यह जांच करेगा कि जिस वाहन से सामान पहुंचाया जा रहा है, उसका पंजीकरण और परमिट सेवा के अनुरूप है या नहीं।
केवल कंपनी से जुड़कर फोन पर आर्डर मिल जाना वाहन को व्यावसायिक संचालन की अनुमति नहीं देता। यही वजह है कि परिवहन विभाग ने डिलीवरी सेवा से जुड़े वाहन चालकों और कंपनियों को आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराने के निर्देश दिए हैं।
मंगलवार को जिले के दो सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों ने संबंधित कंपनियों के कार्यालय पहुंचे थे जिन्होंने दस्तावेज और नियमों के पालन की जानकारी दी है। अधिकारी 24 घंटे का अल्टीमेटम देकर चले आए हैं।
कंपनी भी घेरे में, वाहन भी जांच के दायरे में
नई नियमावली में वितरण सेवा प्रदाता की जिम्मेदारी भी तय की गई है। ऐसे व्यक्ति या संस्था, जो विक्रेता, ई-कामर्स इकाई या प्रेषक को सामान पहुंचाने वाले चालक और वाहन से जोड़ते हैं अथवा वाहनों के बेड़े का संचालन, प्रबंधन या उन्हें सेवा में लगाते हैं, नियमों के दायरे में आएंगे।
लाइसेंस के लिए कंपनी को केवल नाम-पता देना ही नहीं होगा। प्रस्तावित वाहनों की संख्या, प्रत्येक वाहन का पंजीकरण और परमिट विवरण, जीपीएस व जीपीआरएस सुविधा, सर्वर में डाटा रखने का स्थान और वित्तीय विवरण तक देना होगा।
जांच में कमी मिलने पर रुक सकती है डिलीवरी
वाहन का पंजीकरण, परमिट, चालक से जुड़े दस्तावेज और सेवा प्रदाता की अनुमति की जांच होगी। नियमों का उल्लंघन मिलने पर मोटर वाहन अधिनियम और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
वाहन सीज भी किया जा सकता है। यानी अब फोन पर भले ही लिखा आए कि आर्डर रास्ते में है लेकिन, डिलीवरी वाहन का रास्ता तभी साफ होगा, जब उसके कागज पूरे होंगे।
समूहिक रूप से वाहनों का इस्तेमाल वाणिज्यिक करने वाली कंपनी को संभागीय परिवहन विभाग से लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है। ओला की तरह जो लोग एप के माध्यम से वाहन बुक करके सेवा दे रहे हैं, उनको भी लाइसेंस लेना है। सेवा देने में इस्तेमाल होने वाले वाहनों का पंजीकरण वाणिज्यिक श्रेणी में होगा।
- संदीप सिंह, संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन)
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