मुरादाबाद में 5 लाख लोगों को 'दम' लगाने का शौक: हाई कोर्ट की रोक के बाद भी बार से लेकर पार्टियों तक सुलग रहा हुक्का
मुरादाबाद में पांच लाख से अधिक लोग हुक्के के शौकीन हैं, जहां प्रतिदिन 45 से अधिक डिजिटल हुक्के और 25 ...और पढ़ें

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HighLights
मुरादाबाद जिले में रोजाना बिक रहे हैं 45 से अधिक डिजिटल हुक्का
सचिन चौधरी, मुरादाबाद। हुक्का अब सिर्फ गांव की चौपाल या पारंपरिक महफिलों तक सीमित नहीं रह गया है। मुरादाबाद में यह शौक तेजी से एक बड़े बाजार का रूप ले चुका है। जिले में पांच लाख से अधिक लोग हुक्के के शौकीन हैं। शहर में प्रतिदिन 45 से अधिक ई-हुक्के बिक रहे हैं तो चिलम में सुलगाने के लिए 25 से अधिक फ्लेवर बाजार में उपलब्ध हैं।
इन फ्लेवर को खरीदने प्रतिदिन 100 से अधिक लोग दुकानों तक पहुंच रहे हैं। यानी हुक्के का धुआं जितना गहरा हो रहा है, इसका कारोबार भी उतना ही फैलता जा रहा है।
भले ही अब जिले में किसी के पास हुक्का बार का लाइसेंस न हो, लेकिन अवैध तरीके से साठगांठ करके जिले में दस से अधिक स्थानों पर हुक्का बार चल रहे हैं।
हाई कोर्ट द्वारा प्रदेश में हुक्का बार पर लगाई गई रोक के बाद अब पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी शासन से निर्देश मिलने का इंतजार कर रहे हैं। गांवों की चौपालों में बुजुर्गों में हुक्का गुड़गुड़ाना कोई नई बात नहीं है। लेकिन अब हुक्का डिजिटल हो गया है।
इस डिजिटल हुक्के ने शहर के लोगों के बीच पिछले कुछ वर्षों में तेजी से अपनी पकड़ बनाई है। इसलिए रेस्त्रां, रेस्टोरेंट और शादियों में डिजिटल हुक्का नजर आता है। लेकिन उन हुक्का के बीच से सामने आने वाली तस्वीर हैरान करने वाली होती है।
इसका कारण युवाओं की पसंद हैं। बीते डेढ़ साल में 172 लोगों ने पार्टियों के दौरान एक दिन के लिए हुक्का बार का लाइसेंस लिया। यानी हुक्का अब केवल स्थायी ठिकानों तक सीमित नहीं, बल्कि निजी आयोजनों और पार्टियों का भी हिस्सा बन चुका है।
शहर में हुक्के से जुड़े कारोबार का दायरा भी बड़ा है। प्रतिदि 45 से अधिक डिजिटल हुक्के बिक रहे है। हुक्के में इस्तेमाल होने वाले फ्लेवर की मांग भी बनी हुई है।
शहर के बाजार में 25 से अधिक तरह के फ्लेवर उपलब्ध हैं। उधर मुरादाबाद के रैली मुहल्ले में स्थित हुक्का की पांच दुकानें हाई कोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई के अंदेशा के चलते बुधवार को बंद रहीं।
यह हैं हुक्का के प्रमुख फ्लेवर
मुरादाबाद शहर में करीब पांच दुकानें हुक्का बेचने की है। जिन पर हुक्के की चिलम में सुलगने वाले फ्लेवर मिंट/पुदीना, मेंथाल, स्ट्राबेरी, ब्लूबेरी, रास्पबेरी, आम, तरबूज, अनार, अंगूर, सेब, आड़ू, लीची, नींबू, नींबू-मिंट फ्लेवर मिल रहे हैं।
इनके अलावा, चेरी, पाइनएप्पल, नारियल, केला, आरेंज, पैशन फ्रूट, ब्लैक करंट, मिक्स बेरी, मैंगो-आइस, ब्लूबेरी-आइस, वाटरमेलन-आइस, ग्रेप-आइस फ्लेवर बाजार में बिक रहे हैं। युवा सबसे अधिक स्ट्राबेरी, रास्पबेरी जैसे फ्लेवर को पसंद कर रहे हैं।
बार से पार्टी तक पहुंचा हुक्के का धुआं
शहर के कई शराब बार में हुक्का चलने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। कुछ स्थानों पर नियमों की अनदेखी कर हुक्का परोसा जा रहा है। निजी पार्टियों में एक दिन के लाइसेंस के जरिए हुक्का बार लगाने का चलन भी बढ़ा है।
अब हाई कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस और प्रशासन के सामने इन गतिविधियों पर रोक लगाने की चुनौती है। पांच लाख से अधिक लोगों के शौकीन होने का दावा और रोजाना डिजिटल हुक्के व फ्लेवर की बिक्री बताती है कि इसका पूरा बाजार खड़ा हो चुका है।
रामगंगा विहार से लेकर दिल्ली रोड के बार में सुलग रहा हुक्के
आबकारी विभाग के अनुसार जिले में किसी के पास भी हुक्का बार का लाइसेंस नहीं है, लेकिन कई बार में हुक्का सुलग रहा है। रामगंगा विहार स्थित एक बार में हुक्का खुलेआम सुलग रहा है।
दिल्ली रोड स्थित एक बार में भी युवा हुक्का के दम लगाते हैं। कोतवाली क्षेत्र में एक बड़े शराब बार में हुक्का पार्टी होती है। लेकिन अधिकारी वहां से नजरे बचाए हुए हैं।
सेहत के लिए नुकसानदायक है हुक्का
जिला अस्पताल डाक्टर आशीष कुमार सिंह बताते हैं कि डिजिटल हुक्का यानी ई-हुक्का युवाओं में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, लेकिन इसमें मौजूद निकोटिन और अन्य रसायन शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।
इसके सेवन से निकोटिन की लत लगने, हृदय गति और रक्तचाप बढ़ने व फेफड़ों में जलन और सांस संबंधी परेशानी हो सकती है। एरोसोल में मौजूद सूक्ष्म कण और रसायन लंबे समय में फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
जिले में एक भी हुक्का बार का लाइसेंस नहीं है। हमें जानकारी नहीं है कि किसी शराब बार में हुक्के भी मौजूद है। अगर ऐसा है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
- रविंद्र प्रताप सिंह, जिला आबकारी अधिकारी
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