यूपी में बाढ़ का संकट: गंगा-रामगंगा उफान पर, बैराज से छूटा 1.20 लाख क्यूसेक पानी; 20 से ज्यादा गांव जलमग्न
गंगा नदी में जलस्तर बढ़ने से अमरोहा और आसपास के खादर क्षेत्रों में बाढ़ का संकट गहरा गया है, जिससे ...और पढ़ें

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HighLights
ग्रामीणों की परेशानी देखते हुए प्रशासन ने मुकरामपुर गांव में फिर भेजी नाव
संवाद सहयोगी, मंडी धनौरा/कैसरा (अमरोहा)। इन दोनों गंगा खादर क्षेत्र में बाढ़ आई हुई है। जिस कारण ग्रामीण क्षेत्र में जनजीवन अस्त व्यस्त चल रहा है। इसलिए कुछ दिनों से गंगा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। उधर, देवीपुरा उर्फ मोहसनपुर-सीपिया मार्ग पर पुलिया बहने के बाद आवागमन के लिए लगाई गई नाव को हटाकर मुकरामपुर भेज दिए जाने की खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया।
ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए मुकरामपुर भेजी गई नाव को दोबारा देवीपुरा उर्फ मोहसनपुर-सीपिया मार्ग पर भेज दिया गया। नाव के वापस पहुंचने से ग्रामीणों को काफी राहत मिली है। अब बाढ़ के पानी के बीच ग्रामीण नाव के सहारे मार्ग पार कर सकेंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया बहने के बाद से नाव ही आवागमन का प्रमुख साधन बनी हुई है। ऐसे में नाव हटाए जाने से जरूरी काम के लिए आने-जाने में काफी परेशानी हो रही थी।
नाव वापस मिलने से लोगों को राहत मिली है। ग्रामीणों ने प्रशासन से बाढ़ की स्थिति सामान्य होने तक नाव की व्यवस्था बनाए रखने की मांग की है। प्रशासन की टीम क्षेत्र में जलस्तर और संपर्क मार्गों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
बैराज से 1,20,443 क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया
गजरौला : गंगा के जलस्तर में मंगलवार को एक बार फिर पांच सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई। तिगरी में गंगा का गेज बढ़कर 200.70 मीटर पर पहुंच गया है। जलस्तर अब खतरे के निशान 202 मीटर से महज 1.30 मीटर नीचे रह गया है।
जलस्तर बढ़ने से खादर क्षेत्र के गांवों के खेतों में पहले से भरे बाढ़ के पानी में और इजाफा हो गया है। इससे किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। बिजनौर स्थित चौधरी चरण सिंह बैराज से मंगलवार को 1,20,443 क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया।
इससे आने वाले समय में जलस्तर में और वृद्धि की आशंका बनी हुई है। सोमवार को बैराज से 1,32,811 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। अधिक मात्रा में पानी छोड़े जाने के चलते मंगलवार को गंगा के जलस्तर में वृद्धि की संभावना पहले ही जताई गई थी।
बाढ़ ड्यूटी में लापरवाही पर संग्रह अनुसेवक निलंबित
स्वार: बाढ़ और आपदा के दौरान ड्यूटी में लापरवाही बरतना तहसील के संग्रह अनुसेवक राजपाल सिंह को भारी पड़ गया। पसियापुरा गांव में बाढ़ संबंधी ड्यूटी के दौरान जिम्मेदारी का ठीक से निर्वहन नहीं करने और वसूली कार्य में ढिलाई बरतने के आरोप में एसडीएम राजकुमार भाष्कर ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
एसडीएम ने कहा कि बाढ़ और आपदा जैसी परिस्थितियों में प्रशासनिक कर्मचारियों की जिम्मेदारी सामान्य दिनों से अधिक होती है। प्रभावित लोगों तक समय से सहायता पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है। ड्यूटी में किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी कर्मचारियों को अपने दायित्वों का गंभीरता से पालन करने के निर्देश दिए हैं।
बाढ़ में डूबीं पशुशालाएं, भूसा सड़ा तो गहराने लगा चारे का संकट
जुनावई : नरौरा बैराज से लगातार छोड़े जा रहे पानी के कारण तटवर्ती गांवों में बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। रतोतापुर और बझांगी गांव में बाढ़ का पानी कई किसानों की पशुशालाओं में घुस गया है। इससे पशुओं को सुरक्षित स्थान पर बांधने के साथ ही चारे का संकट भी खड़ा हो गया है। पशुशालाओं में रखी भूसे की बोंगियां पानी में भीगकर खराब हो गईं, जिससे किसानों को हजारों रुपये का नुकसान हुआ है।
रतोतापुर निवासी किसान भरोसेराम ने बताया कि पशुशाला में पानी भरने से करीब 20 हजार रुपये कीमत का भूसा खराब हो गया। ग्रामीण मुकेश शर्मा के अनुसार गांव में एक दर्जन से अधिक किसानों का भूसा खराब हुआ है।
बझांगी निवासी सोहन पाल सिंह ने बताया कि पानी बढ़ने पर पशुओं को निकालकर काशीपुर-साधुमढ़ी लिंक रोड पर बांधना पड़ रहा है ग्रामीणों ने बताया कि जिन किसानों का भूसा ऊंचे स्थानों पर सुरक्षित है, उनसे मांगकर प्रभावित किसान पशुओं का पेट भर रहे हैं।
वहीं, उदिया नगला निवासी मदनपाल सिंह ने बताया कि पुष्पेंद्र कुमार की पशुशाला में भी पानी पहुंच गया है, जिससे उन्हें पशुओं और जरूरी सामान को रिश्तेदारों के यहां ले जाना पड़ा। रघुपुर पुख्ता गांव में भी चारों ओर बाढ़ का पानी पहुंच गया है।
वीर सिंह नेथ ने बताया कि धान और चारे के लिए बोई गई फसल के नष्ट होने की आशंका है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल पशु चारे की व्यवस्था कराने और फसलों व भूसे के नुकसान का सर्वे कराकर आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की है।
