मुरादाबाद, जागरण संवाददाता। विधानसभा चुनाव सिर पर है। भाजपा चुनाव की तैयारियों में जोर-शोर से जुटी है। इस क्रम में भाजपा हाईकमान ने पश्चिमी यूपी में न सिर्फ 100 बड़े चेहरे मैदान में उतार दिए हैं, बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद लगातार रैली कर रहे हैं। गाजियाबाद, नोएडा. अमरोहा व रामपुर में वह रैली कर चुके हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा व गृहमंत्री अमित शाह भी जनता से रूबरू हो चुके हैं। लेकिन सपा गठबंधन व अन्य दल भाजपाई तेवर के आगे अभी फीके हैं। चुनावी विशेषज्ञों का कहना है कि किसान आंदोलन के बाद पश्चिमी यूपी में गठबंधन खुद को मजबूत मान कर चल रहा है। जिसके चलते अमरोहा में स्थानीय नेताओं के कंधे पर ही चुनावी बिसात बिछाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

राजनीतिक दृष्टि से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शामिल 30 जिलों में 139 विधानसभा सीट शामिल हैं। वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पश्चिमी यूपी में 109 सीट पर जीत दर्ज की थी। शेष पर सपा व अन्य दल रहे थे। जिनमें सपा दूसरे नंबर पर रही थी। अब आगामी चुनाव की तैयारी भी सभी दलों ने शुरू कर दी है। इनमें भाजपा अग्रणी है। भाजपा की जनविश्वास यात्रा भी पश्चिमी यूपी के बिजनौर से शुरू की गई थी। वहीं सपा गठबंधन द्वारा पश्चिमी यूपी में केवल मेरठ, मुजफ्फरनगर के बुढाना व अलीगढ़ के इगलास में ही रैली की जा सकी हैं। अलीगढ़ में अखिलेश यादव पहुंच नहीं सके थे।चुनावी विशेषज्ञों की मानें तो किसान आंदोलन के आधार पर गठबंधन द्वारा पश्चिमी यूपी को चुनावी दृष्टिकोण से मजबूत माना जा रहा है। जिसके चलते यहां बड़े नेताओं का ध्यान कम है। स्थानीय नेताओं पर जिम्मेदारी सौंपी गई है। बसपा तो इस मामले में दूर तक नजर नहीं आ रही है।

पश्चिमी यूपी में गठबंधन द्वारा पूरी सक्रियता के साथ चुनाव की तैयारी की जा रही हैं। गठबंधन मजबूत स्थिति में है। पश्चिम में तीन बड़ी रैली हो चुकी हैं। आचार संहिता लागू होते ही गठबंधन की रैली आयोजित की जाएंगी।

निर्मोज यादव, सपा जिलाध्यक्ष।

गठबंधन भी चुनाव की तैयारियां युद्ध स्तर पर कर रहा है। रालोद-सपा के बड़े नेता भी जनता के बीच पहुंच रहे हैं तथा भविष्य में रैलियां आयोजित की जाएंगी। शीघ्र ही रालोद के नेतृत्व में गठबंधन की रथयात्रा भी शुरू की जाएगी।

सचिन चौधरी, रालोद जिलाध्यक्ष।

 

Edited By: Narendra Kumar