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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 24, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मुरादाबाद के अस्पतालों ने जिसको कर दिया था मृत घोषित वह 107 घंटे रहा जीवित, जानें पूरा मामला

By Samanvay PandeyEdited By:
Published: Wed, 24 Nov 2021 10:35 AM (IST)Updated: Wed, 24 Nov 2021 04:12 PM (IST)

Hospital declared alive to be dead मेरठ के लाला लाजपत राय मेडिकल कालेज में मौत से लड़ रहे श्रीकेश 107 ...और पढ़ें

मुरादाबाद नगर निगम कर्मचारी श्रीकेश के अस्पताल में भर्ती होने का फाइल फोटो।
मुरादाबाद नगर निगम कर्मचारी श्रीकेश के अस्पताल में भर्ती होने का फाइल फोटो।

मुरादाबाद, जेएनएन। Hospital declared alive to be dead : मेरठ के लाला लाजपत राय मेडिकल कालेज में मौत से लड़ रहे श्रीकेश 107 घंटे बाद जिंदगी की जंग हार गए। उनको निजी चिकित्सकों ने जीते जी मार दिया था। मंगलवार को दिन में हाथ-पैरों में हरकत होने से चिकित्सकों ने गुरुवार को आपरेशन की बात कही थी। इसके बाद स्वजन को आस बंधी थी लेकिन, शाम साढ़े छह बजे मौत होने की जानकारी स्वजन को दी थी। एक बार फिर चिकित्सकों ने जांच की, रात 9.30 बजे कालेज के प्राचार्य आर सी गुप्ता ने मौत की पुष्टि कर दी।

मुरादाबाद के हजरत नगर गढ़ी अंतर्गत गांव कोटा के श्रीकेश गुरुवार शाम दूध लेने के लिए घर से निकले थे। रास्ते में बाइक की टक्कर लगने से घायल हो गए, सिर में चोट आने पर स्वजन तीन निजी अस्पतालों में ले गए, वहां मृत घोषित कर दिया तो रात तीन बजे जिला अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर आए। वहां चिकित्सा अधिकारी डा. मनोज यादव ने भी मृत घोषित कर ‘शव’ को मर्चरी भिजवा दिया। वह सुबह साढ़े 10 बजे तक ठंड में मर्चरी की स्लैब पर ही पड़े रहे।

पुलिस पंचनामा भरने पहुंची तो पत्नी दीक्षा ने सीने पर हाथ रखा तो धड़कन चल रही थी। इसके बाद मेरठ भेजा गया था। डाक्टरों ने भी इसे चिकित्सकीय भाषा में सस्पेंडेड एनिमेशन बताया। श्रीकेश के छोटे भाई सत्यानंद गौतम ने बताया कि दोपहर तक कोई दिक्कत नहीं थी। शाम साढ़े छह बजे डाक्टरों ने मौत की जानकारी दी थी। स्वजन को भरोसा नहीं था। रात में कालेज के प्राचार्य आरसी गुप्ता ने मौत की पुष्टि कर दी।

क्या होता है सस्पेंडेड एनिमेशनः जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. शिव सिंह के मुताबिक सस्पेंडेड एनिमेशन स्थिति में मौत के पूरे लक्षण नजर आते हैं। मरीज पूरी तरह लो फंक्शन पर होता है। इस वजह से यह पता नहीं चल पाता कि मरीज जिंदा है। श्रीकेश के मामले में भी ऐसा ही था। सिर में गंभीर चोट होने की वजह से वह कोमा में जा चुका था। जब अस्पताल लाया गया, तब उसमें मृत अवस्था वाले ही लक्षण थे।

दीक्षा की टूटी उम्मीदः पति की सांस लौटकर आने के बाद से दीक्षा के चेहरे की चमक बढ़ गई थी। उन्हें पूरा यकीन था कि अब श्रीकेश ठीक होकर जल्द घर आ जाएंगे लेकिन, पांचवें दिन दोबारा आस टूट गई। शादी के आठ साल होने के बाद भी उनके कोई संतान नहीं थी।