यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 18, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Ramlila 2022: रामपुर में आखिरी नवाब रजा अली खां ने शुरू कराई थी रामलीला, दान में दी 80 बीघा जमीन
Ramlila of Rampur रामपुर में लंबे समय तक नवाबों का राज रहा। नवाबों ने सभी धर्मों का सम्मान करते हुए ...और पढ़ें

रामपुर, (मुस्लेमीन)। नवाबों के शहर रामपुर में रामलीला की शुरुआत आखिरी नवाब रजा अली खां ने कराई थी। इसके लिए उन्होंने कोसी मंदिर मार्ग पर 80 बीघा जमीन उपलब्ध कराई। रामलीला का इतना बड़ा मैदान आसपास के किसी जिले में नहीं है। यहां रामलीला में वृंदावन से कलाकार आते हैं।
रामपुर में लंबे समय तक नवाबों का राज रहा। नवाबों ने सभी धर्मों का सम्मान करते हुए उनके धर्मिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देने का भी प्रयास किया। नवाब रजा अली खां ने खुद होली गीत लिखे। भमरौआ में श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर के लिए भूमि उपलब्ध कराई तो शहर में रामलीला के लिए 80 बीघा जमीन की व्यवस्था कराई।
(1).jpg)
श्री सनातन धर्म रामलीला कमेटी के अध्यक्ष विष्णु सरन सर्राफ कहते हैं कि रामलीला का इतना बड़ा मैदान शायद ही प्रदेश के किसी अन्य जिले में हो। यहां मैदान बड़ा होने के कारण दूर-दूर से लोग रामलीला देखने आते थे। पहले 25 हजार लोग यहां पहुंचते थे। उस समय सभी लोग जमीन पर बैठते थे। कुर्सियों की व्यवस्था नहीं होती थी। उनकी उम्र 83 वर्ष हो चुकी है और 60 साल से रामलीला कमेटी से जुड़े हैं।
रामपुर शहर में 1947 से रामलीला मंचन हो रहा है। पहले कई साल पनबड़िया में नुमाईश ग्राउंड पर रामलीला मंचन हुआ, लेकिन शहर से दूर होने के कारण दर्शकों को वहां पहुंचने में परेशानी होती थी। इसके बाद 1949 में नवाब रजा अली खां ने कोसी मंदिर मार्ग पर 80 बीघा जमीन उपलब्ध कराई।
तब भी रामपुर में नवाबों का राज था। रामपुर 1949 में आजाद हुआ था। तब से ही यहां लगातार मंचन होता रहा, लेकिन कोरोना महामारी के चलते 2020 में रामलीला मंचन नहीं हो सका। रामलीला मैदान में ही 1997 से रामलीला पब्लिक स्कूल भी संचालित है।
वृंदावन से आते हैं कलाकार
रामलीला कमेटी के महामंत्री वीरेंद्र कुमार गर्ग बताते हैं कि रामपुर में रामलीला मंचन के लिए नामचीन कलाकार आते रहे हैं। अयोध्या से भी कई बार कलाकार आए। इसके बाद मथुरा से और अब कई साल से वृंदावन से कलाकार आ रहे हैं। वृंदावन और मथुरा के कलाकार तो रामपुर में आने के लिए बहुत इच्छुक रहते हैं।
दर्शकों की संख्या घटी
रामलीला कमेटी के सदस्य जुगेश अरोरा बताते हैं कि रामपुर में कलाकार अच्छे आते रहे हैं, इसीलिए दूर-दूर से लोग यहां आते थे, लेकिन अब कम लोग आते हैं। मेले वाले दिन ही ज्यादा लोग पहुंचते हैं। टीवी पर भी अब रामलीला आती है। लोग घर बैठे ही टीवी पर रामलीला देख लेते हैं। इसीलिए दर्शकों की संख्या में कमी आई है।
ज्वालानगर में भी रामलीला मंचन
पूर्व मंत्री शिव बहादुर सक्सेना बताते हैं कि रामपुर शहर में रामलीला तीन स्थानों पर होती है। पहले केवल कोसी मंदिर मार्ग पर होती थी, लेकिन इसके बाद सिविल लाइंस में आदर्श कालोनी और फिर ज्वालानगर में भी रामलीला का मंचन शुरू हो गया। अब सिविल लाइंस के लोग आदर्श कालोनी में और ज्वालानगर क्षेत्र के लोग ज्वालानगर में ही रामलीला देखते हैं। तीनों स्थानों पर ही दशहरे के दिन मेला लगता है और उस दिन भारी भीड़ जमा होती है।
गंगा जमुनी तहजीब को दिया बढ़ावा
पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां कहते हैं कि नवाबों ने हमेशा गंगा जमुनी तहजीब को बढ़ावा दिया। उनके दादा नवाब रजा अली खां ने शहर में रामलीला के लिए जमीन उपलब्ध कराई। ब्रिटिश राज में 28 मुस्लिम राजघराने थे। इनमें रामपुर अकेला ऐसा राजघराना था, जहां नवाब को गद्दी पर बैठाने वाला एक ब्राह्मण होता था। रामपुर रियासत के आखिरी राजपुरोहित भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी के ससुर थे। इन्होंने ही अंतिम शासक रजा अली खां को गद्दी पर बैठाया था।
