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तेंदुओं के खौफ ने बदला खेती का तरीका! जान बचाने को कंबाइन मशीन का सहारा ले रहे किसान

Published: Fri, 30 Oct 2026 03:19 PM (IST)

तेंदुओं के खौफ से मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा क्षेत्र में किसानों ने खेती का तरीका बदल दिया है। जान बचाने के ...और पढ़ें

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HighLights

  1. 150 गांवों तक तेंदुओं का खौफ, ठाकुरद्वारा के 50 से अधिक गांवों में दहशत

संवाद सहयोगी, ठाकुरद्वारा, (मुरादाबाद)। धान खेतों में पककर तैयार है, लेकिन तेंदुओं के खौफ के कारण किसानों के कदम खेतों तक जाने से पहले ही ठिठक रहे हैं। गन्ने की ऊंची फसल और झाड़ियों में छिपे तेंदुओं के खौफ ने खेती का तरीका बदल दिया है।

जिले के करीब 150 गांव में तेंदुए का खौफ है लेकिन, ठाकुरद्वारा क्षेत्र के 50 से अधिक गांवों में दहशत के बीच अब छोटे किसान भी किराये पर कंबाइन मशीन लेकर धान कटवा रहे हैं ताकि गन्ने के खेतों में घर बनाए बैठे तेंदुए के खतरे से बचा जा सके।

जिले के ठाकुरद्वारा क्षेत्र में रामगंगा नदी के किनारे बसे से 50 से अधिक गांवों में तेंदुओं की गतिविधियों की सूचनाएं सामने आ चुकी हैं। तेंदुओं इसी साल चार लोगों की जान ले ली है।

दो दर्जन से अधिक लोगों पर हमला करके घायल होने की घटनाओं ने चिंता बढ़ाई है। गन्ने के खेत और झाड़ियां तेंदुओं के छिपने का ठिकाना बने हुए हैं।

वन विभाग के अभियान के बावजूद ग्रामीणों को खेतों में जाने से पहले आसपास नजर दौड़ानी पड़ रही है। आलमगीरपुर गांव के किसान शीशपाल सिंह, लालापुर पीपलसाना के प्रदीप कुमार और रोहित कुमार का कहना है कि खेत पर जाने से डर लगता है।

तेंदुओं के हमलों ने किसानों को डरा दिया है। महफूज चौधरी का कहना है कि धान की हाथ से कटाई में कई घंटे खेत में बिताने पड़ते हैं। ऊंची फसल और झाड़ियों में छिपे तेंदुए के अचानक सामने आने का डर बना रहता है।

ऐसे में कंबाइन मशीन से कटाई कराकर वे खेत में रुकने का समय कम कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि फसल काटने से ज्यादा चिंता अब सुरक्षित घर लौटने की है।

सुरक्षा की कीमत चुका रहे छोटे किसान

कंबाइन मशीन से कटाई कराने पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह बोझ कम नहीं है, लेकिन जान का खतरा देखते हुए वे मजबूरी में मशीन का सहारा ले रहे हैं।

हाथ से कटाई में मिलने वाली धान की पुआल पशुओं के चारे के काम आती है। कंबाइन से कटाई के बाद पुआल खेत में बिखर जाती है और उसे समेटना कठिन हो सकता है।

ऐसे में कटाई का खर्च बढ़ने के साथ पशुओं के चारे का इंतजाम भी महंगा पड़ेगा। किसान रईस चौधरी ने बताया कि कंबाइन एक एकड़ जमीन का धान काटने के लिए दो हजार रुपये तक लेती है।

 

वन विभाग अब तक 26 तेंदुओं को पकड़ चुका है। खादर क्षेत्र के जंगलों और संवेदनशील स्थानों पर पिंजरे लगाए गए हैं। ग्रामीणों से अपील है कि खेतों में अकेले न जाएं और तेंदुआ दिखाई देने पर वन विभाग को तत्काल सूचना दें। विभाग लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है।

- आदर्श कुमार, वन संरक्षक, मुरादाबाद मंडल


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