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‘बीच खेल में नियम बदल दिए...’ 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर भी TET अनिवार्य, नौकरी पर गहराया संकट!

Published: Fri, 23 Oct 2026 07:23 PM (IST)

टीईटी की अनिवार्यता ने 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि उन्हें लगता है कि नौकरी ...और पढ़ें

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HighLights

  1.  2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी परीक्षा पास करने की बाध्यता पर जताया विरोध

जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता ने बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है। वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों का कहना है कि नियुक्ति के समय निर्धारित नियमों के अनुसार उन्होंने नौकरी प्राप्त की थी। वर्षों तक शिक्षण कार्य करने के बाद अब टीईटी उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता लागू होने से उनके सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।

पहली बार आयोजित टीईटी में कई शिक्षक सफल नहीं हो सके। ऐसे में परीक्षा पास नहीं करने वाले शिक्षकों को भविष्य की चिंता सता रही है। शिक्षकों का कहना है कि यह परीक्षा उनके लिए भविष्य और नौकरी से जुड़ा गंभीर विषय बन गई है।

उन्होंने इसकी तुलना खेल के बीच में नियम बदलने से करते हुए कहा कि नियुक्ति के समय तय मानकों के आधार पर सेवा में आए शिक्षकों पर बाद में नई बाध्यता थोपना उचित नहीं है।

प्रश्न पुस्तिका में एक गोला छूटने से नहीं आया परिणाम

प्राथमिक विद्यालय मिलक, बीजना के प्रधानाध्यापक सत्यप्रकाश ने बताया कि टीईटी के दोनों प्रश्नपत्रों की परीक्षा दी थी। दोनों ही पेपर अच्छे हुए थे। जूनियर स्तर की टीईटी में वह उत्तीर्ण हो गए, लेकिन प्राथमिक स्तर की परीक्षा में प्रश्न पुस्तिका पर एक प्रश्न का गोला भरने से छूट गया।

इस कारण उनका परिणाम नहीं आया। उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्तर की टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य होने के कारण अब उन्हें नौकरी को लेकर चिंता है। परीक्षा में एक छोटी सी चूक के चलते परिणाम प्रभावित होने से परेशानी बढ़ गई है।

बीच खेल में बदले जा रहे नियम

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के ब्लाक मंत्री रविंद्र सिंह ने बताया कि जो 2011 से पहले की भर्ती के हैं उन पर भी टेट लागू करना सर्वथा नियम विरुद्ध व अनुचित है।

यह ठीक उसी प्रकार है जैसे कि खेल के बीच में मन मर्जी खेल के नियम बदलना। सरकार को शिक्षकों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए अधिनियम में संशोधन करना चाहिए, जिससे उन्हें राहत मिल सके।

हर बार नये नियम लाकर शिक्षकों को प्रभावित किया जा रहा है। शिक्षकों पर पहले ही विद्यालय में शिक्षण के अलावा अन्य कार्यों का बोझ डाला।

टीईटी उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता परेशानी बनीं

शिक्षक अमित सिंह ने बताया कि पहली बार आयोजित टीईटी में कई शिक्षक सफल नहीं हो सके। ऐसे में परीक्षा पास नहीं करने वाले शिक्षकों को भविष्य की चिंता सता रही है। शिक्षकों का कहना है कि यह परीक्षा उनके लिए भविष्य और नौकरी से जुड़ा गंभीर विषय बन गई है।

उन्होंने इसकी तुलना खेल के बीच में नियम बदलने से करते हुए कहा कि नियुक्ति के समय तय मानकों के आधार पर सेवा में आए शिक्षकों पर बाद में नई बाध्यता थोपना उचित नहीं है।

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