मुरादाबाद, जागरण संवाददाता। Swachh Survekshan 2021 : स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 में सम्मान पाने के लिए नगर निगम ने काम किए और 42वें पायदान पर छलांग लगाकर रैंकिंग में सुधार किया। कूड़ा निस्तारण में मुरादाबाद ने भी काम करके रैंकिंग सुधारी। लेकिन, इंदौर इससे भी आगे रहा कि उसने कूड़े से रियूज, रिसाइकिल, रिडयूज और रिफ्यूज पर भी काम किया। रियूज, रिसाइकिल के तहत घरों में वेस्ट मैटेरियल से सजावट का सामान तैयार करके पार्कों को सजाने का काम किया। रिडयूज के तहत प्लास्टिक डिस्पोजल और पालीथिन की थैलियों पर रोक लगाई।

रिफ्यूज के तहत लोगों को जागरूकता फैलाई कि प्लास्टिक का उपयोग बंद करें। मुरादाबाद में भी इस दिशा में काम हुआ लेकिन, हम कूड़े को रिसाइकिल करके केवल अभी जैविक खाद बनाने तक ही पहुंचे हैं। जबकि इंदौर ने कूड़े के निस्तारण से कई अन्य काम करके पांचवीं बार प्रथम पुरस्कार हासिल किया। मुरादाबाद में शहर में पड़े मलबे का निस्तारण करने के लिए प्लांट लगाया जा रहा है। लेकिन, स्वच्छ सर्वेक्षण 2022 तक प्लांट लगा तो रैंकिंग में सुधार होना अपेक्षित है।

पालीथिन के विरुद्ध अभियान चलाया लेकिन तोड़ गया दम : नगर निगम ने पालीथिन के विरुद्ध अभियान चलाया। पालीथिन के थोक कारोबारियों के यहां छापेमारी से तीन साल में करीब 50 कुंटल पालीथिन भी पकड़ी थी। इस पालीथिन को गोदाम में स्टोर तो किया लेकिन, इसका रियूज व रिसाइकिल की कोई प्लानिंग नहीं है। अब भी यह पालीथिन स्टोर में कैद है। अगर इस पालीथिन का रियूज, रिसाइकिल हुआ होता सर्वेक्षण टीम को मिलता तो रैंकिंग में और भी सुधार होता। कुछ एनजीओ से संपर्क करके प्लास्टिक के रेपर को बोतल में भरकर ईंट बनाने का काम शुरू कराया, जिससे पार्क को सजाने का काम हो सकता था। लेकिन, यह भी परवान नहीं चढ़ा।

मैं भी हूं स्वच्छता प्रहरी : कांशीराम नगर निवासी रमेश आर्य एडवोकेट की दिनचर्या स्वच्छता से शुरू होती है। वह पार्कों में गंदगी को साफ करने में निरंतर लगे रहते हैं। उनके साथ क्षेत्र के कई लोग भी जुड़कर स्वच्छता पर ध्यान देते हैं। कांशीराम नगर स्थित गौतम बुद्ध पार्क समेत आसपास के क्षेत्र में स्वच्छता अभियान भी चलाया। कई अन्य संस्थाओं के स्वच्छता अभियान के साथ जुड़कर भी वह स्वच्छता प्रहरी का संदेश देते हैं। कहते हैं कि स्वच्छता किसी और के लिए नहीं अपने लिए करना सीखना चाहिए। आसपास स्वच्छता रहेगी तो कई तरह के संक्रमण कम होंगे।

पालीथिन पर रोक लगनी चाहिए। इससे नाले और नालियां चोक होते हैं। एक बार पूरी तरह प्रतिबंध लगेगा तो लोग थैला लेकर चलने की आदत डालेंगे।

रविता पाल

हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझने की जरूरत है। दूसरे को दोष देना ठीक नहीं। नगर निगम अपना काम करे और हम भी सफाई में सहयोग करें।

डाॅ.संदीप वर्मा

 

Edited By: Narendra Kumar