गन्ने की खेती से उड़ रही मिठास: 1 बीघे में 24 हजार की बिक्री, फिर भी किसान के हाथ बचे सिर्फ ₹5,130! जानिए पूरा गणित
मुरादाबाद के गन्ना किसानों को खेती में बढ़ती लागत और घटते उत्पादन के कारण कम मुनाफा हो रहा है। एक ...और पढ़ें

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HighLights
0238 प्रजाति में लाल सड़न रोग के बाद दूसरी किस्मों से कम उत्पादन, महंगे बीज ने बढ़ाई किसानों की चिंता
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। छजलैट ब्लाक के संदलीपुर गांव के प्रगतिशील किसान गौरव कुमार के पास करीब 150 बीघा जमीन है। गन्ने की खेती का उनका अनुभव बताता है कि अब खेती में मेहनत और खर्च दोनों बढ़ रहे हैं, लेकिन पैदावार घटने से कमाई का गणित बिगड़ा है। अच्छी पैदावार होने पर एक बीघा में 60 क्विंटल गन्ना पैदा करने पर 18,870 रुपये खर्च हो रहे हैं।
गन्ना 400 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बिके तो कुल 24 हजार रुपये मिलेंगे यानी पूरी फसल तैयार करने, छिलाई और ढुलाई का खर्च निकालने के बाद महज 5130 रुपये बचेंगे।
गौरव कुमार कहते हैं कि कभी 0238 प्रजाति के गन्ने से अच्छी पैदावार होती थी, लेकिन लाल सड़न रोग ने इस प्रजाति को बड़ा नुकसान पहुंचाया। अब किसान दूसरी प्रजातियों की ओर रुख कर रहे हैं।

मगर उनका उत्पादन अपेक्षा के अनुरूप नहीं मिल रहा। गन्ने का बीज भी लगातार महंगा हो रहा है। ऐसे में किसानों की लागत बढ़ रही है और आमदनी घट रही है।
उनका कहना है कि चीनी का थोक मूल्य बढ़ाने से भी किसानों और चीनी मिलों को राहत मिल सकती है। किसानों को चीनी के दाम बढ़ने से परेशानी नहीं है, जरूरत गन्ने का उचित मूल्य मिलने की है।
खेती से ढुलाई तक खर्च का हिसाब
गन्ना किसान गौरव कुमार ने बताया कि एक बीघा खेत में चार जुताई पर 1000 रुपये, पलेवा पर 170 रुपये, गोबर की खाद पर 3000 रुपये और चार क्विंटल बीज पर 1600 रुपये खर्च होते हैं।
एनपीके खाद और दवा पर 700 रुपये, बुवाई पर 500 रुपये तथा कोराजन पर 300 रुपये लगते हैं। चार बार निराई-गुड़ाई पर 2000 रुपये, नौ बार सिंचाई पर 1500 रुपये, खाद और दवा पर 700 रुपये खर्च होता है।
वहीं, दो बार गन्ना बांधने पर 900 रुपये और यूरिया पर 300 रुपये खर्च होते हैं। इसके अलावा 60 क्विंटल गन्ने की छिलाई पर 3300 रुपये और ढुलाई पर 3000 रुपये देने पड़ते हैं। इस तरह कुल लागत 18,870 रुपये बैठती है।
कम उत्पादन से बिगड़ रहा खेती का गणित
गन्ना किसान राहुल कुमार निवासी कुचावली का कहना है कि खाद, बीज, दवा, सिंचाई और मजदूरी का खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में केवल गन्ने की कीमत तय करते समय पुरानी लागत को आधार बनाना किसानों के हित में नहीं है।
उत्पादन और खर्च को ध्यान में रखकर मूल्य तय किया जाना चाहिए, ताकि खेती घाटे का सौदा न बने। ग्राम लदावली के किसान नेत्रपाल सिंह के मुताबिक, गन्ने की खेती में किसानों को पूरे साल मेहनत करनी पड़ती है।
फसल तैयार होने के बाद छिलाई और ढुलाई का खर्च भी कम नहीं है। गन्ने का उचित मूल्य मिलेगा तो किसानों को अगली फसल में खाद, बीज और दूसरी जरूरतों पर खर्च करने में सहूलियत होगी।
गन्ना किसान उमेश कुमार निवासी शाहपुर मुबारिकपुर का कहना है कि नई प्रजातियों से अपेक्षित उत्पादन नहीं मिलने और खेती की लागत बढ़ने के कारण किसानों की बचत प्रभावित हो रही है।
चीनी मिलों का गणित भी अहम
चीनी मिलों के दो प्रबंधकों से हुई बातचीत के मुताबिक, एक क्विंटल गन्ने से करीब 10 से सवा 10 किलोग्राम चीनी बनती है। इस हिसाब से 60 क्विंटल गन्ने से लगभग छह क्विंटल चीनी तैयार हो सकती है।
मिल प्रबंधन के अनुसार, एक क्विंटल चीनी के उत्पादन पर गन्ने की खरीद समेत करीब 4200 रुपये तक खर्च आता है, जबकि चीनी का मौजूदा थोक मूल्य करीब 4500 रुपये प्रति क्विंटल है।
इस आधार पर करीब 300 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर दिखता है, हालांकि मिलों को अन्य खर्च भी वहन करने पड़ते हैं। किसानों का कहना है कि सरकार गन्ने के मूल्य और चीनी के थोक मूल्य, दोनों पर विचार करे। इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिल सकता है और चीनी मिलों के लिए भी आर्थिक संतुलन बनाए रखना आसान होगा।
