Moradabad Sanskarshala 2022 : मुरादाबाद के एसडीएम इंटर कालेज के प्रधानाचार्य उदयराज सिंह का कहना है कि कोई भी कार्य तब तक ठीक रूप से संचालित नहीं हो सकता जब तक उसमें अनुशासन न हो। ऐसे ही इंटरनेट मीडिया पर बहस में भी अनुशासन आवश्यक है। इसका अर्थ है कि अपनी बात को किसी गंभीर विषय पर रखने से पहले उसकी सत्यता, स्पष्टता, भद्रता और परिणामों को परख लेना।

जानें कैसी हो गई है इंटरनेट मीडिया की भाषा

वर्तमान में इंटरनेट पर अफवाह और अभद्र भाषा का प्रयोग हो रहा है, जिससे समाज में हिंसा तक बढ़ जाती है और राष्ट्र को क्षति होती है। उदाहरण के लिए कोरोना काल में अफवाहें, नागरिकता संशोधन बिल था। फिर धार्मिक एवं राष्ट्र संबंधी विषयों पर होती बहस में अभद्र भाषा का प्रयोग और उसके परिणाम भी उतने ही भयावह होते रहे हैं।

दिशाहीन बहस राष्ट्र को पहुंचा सकती है नुकसान

उठाई तलवार और कर दिया कत्ल कुछ यूं बहस इंटरनेट मीडिया पर बढ़ रही है। देश की राजधानी हिंसा में जलने लगी। जैसे मानो इंसानियत ही समाज में दम तोड़ने लगी। आजकल लोग अभद्र भाषा का प्रयोग, हिंसक अफवाहों को साझा करने और यहां तक कि बहस के अनुशासन को तोड़ने तक भयभीत नहीं होते, जिसका नतीजा भी हम सभी जानते हैं कि राष्ट्र की हानि।

क्या कहता है हमारा संविधान

मगर इसका दोष हम इंटरनेट को नहीं दे सकते क्योंकि यह तो एक माध्यम है जिसका प्रयोग हम मनुष्य के हाथ में है। हमारे देश का संविधान प्रत्येक नागरिक को विचारों की स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है किंतु हमें अपने इस अधिकार का गलत उपयोग नहीं करना चाहिए और ऐसा करना हमारा कर्तव्य है।

हमें इसका पालन करना है और इंटरनेट पर कोई भी टिप्पणी देने से पहले उसकी सार्थकता और परिणामों पर विचार करना चाहिए। इस कर्तव्य की पूर्ति के लिए राष्ट्रहित में जो विषय हो उसमें सहमति देनी चाहिए ताकि देश के युवाओं में देश के विकास करने का जज्बा और संस्कार हो। ‘’ राष्ट्र विकास में अपना योगदान देंगे, इंटरनेट पर बहस के अनुशासन का पालन करेंगे ‘’

Edited By: Samanvay Pandey