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मुरादाबाद सपा में फिर भड़की 'टिकट की आग': रुचि वीरा का पलटवार, बोलीं- 'अपने गिरेबान में झांकें ST हसन'

Published: Mon, 26 Oct 2026 09:58 PM (IST)

मुरादाबाद सपा में सांसद रुचि वीरा और पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन के बीच टिकट को लेकर पुरानी तकरार फिर ...और पढ़ें

रुचि वीरा और एसटी हसन

रुचि वीरा और एसटी हसन

HighLights

  1. सांसद बोलीं- राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भरोसा जताया, पूर्व सांसद का साथ न देने का प्रमाण मेरे पास

  2. हकतल्फी की बात करने वाले अपने बारे में भी सोचें, नासिर कुरैशी का टिकट कटकर मिला था

जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। लोकसभा चुनाव के नतीजे आए दो साल, चार महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन मुरादाबाद की सियासत में टिकट को लेकर छिड़ी रार अब भी थमने का नाम नहीं ले रही है। सांसद रुचि वीरा और पूर्व सांसद डा. एसटी हसन के बीच की तल्खी एक बार फिर चर्चा में है।

टिकट को लेकर दोनों के पुराने बयानों और आरोपों से जुड़े वीडियो लगातार इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं। इससे सपा की अंदरूनी खींचतान फिर सुर्खियों में आ गई है।

सांसद रूचि वीरा का कहना है कि हकतल्फी की बात करने वाले अपने गिरेवां में भी झांकें। उन्हें भी 2019 में हाजी नासिर कुरैशी का टिकट कटने के बाद ही मिला था। इसे भी तो हकतल्फी ही कहा जाएगा।

रविवार को मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र से सपा सांसद रुचि वीरा से पत्रकारों ने जब उनके सिविल लाइंस स्थित आवास पर पूर्व सांसद डा. एसटी हसन के उस आरोप को लेकर सवाल किया गया कि उनका हक मारकर टिकट लिया गया और वह चुनाव जीत गईं तो सांसद ने पलटवार किया।

उन्होंने टिकट देने का फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का बताते हुए कहा कि उन्होंने मुझे इस योग्य समझा, इसलिए टिकट दिया। रुचि वीरा ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव और महापौर के टिकट का प्रसंग उठाकर पूर्व सांसद पर भी सवाल खड़े किए।

साथ ही दावा किया कि लोकसभा चुनाव में डा. एसटी हसन ने उनका साथ नहीं दिया हालांकि, अब उन्होंने भविष्य में पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखने की बात कही है।

लोकसभा चुनाव 2024 में टिकट को लेकर शुरू हुआ विवाद अब केवल पुराने फैसले तक सीमित नहीं है। दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप की चर्चा लगातार बनी हुई है।

इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहे वीडियो इस विवाद को बार-बार हवा दे रहे हैं। एक ओर सांसद रुचि वीरा अपने टिकट को राष्ट्रीय नेतृत्व का फैसला बता रही हैं। पूर्व सांसद डा. एसटी हसन का नाम आते ही यह पुराना विवाद फिर सामने आ जाता है।

हालांकि, अब डा. एसटी हसन ने इस मुद्दे पर आगे कुछ भी कहने से किनारा कर लिया है। उनका कहना है कि पुराने विवादों में उलझने के बजाय नेताओं को विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटना चाहिए।

ऐसे में सवाल यह है कि क्या दोनों नेताओं के बीच की यह राजनीतिक दूरी आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कम हो पाएगी या टिकट की यह खाई सपा की सियासत में चर्चा का विषय बनी रहेगी।

 

मैंने लोकसभा चुनाव में पूरी मेहनत से वोट जोड़े और एक लाख से अधिक मतों से जीत हासिल की। पूर्व सांसद डा. एसटी हसन ने मेरा साथ नहीं दिया, इसका प्रमाण मेरे पास है। राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुझे टिकट दिया और मैंने उनका भरोसा नहीं तोड़ा। आगे भी पार्टी के प्रति निष्ठावान रहूंगी।

- रुचि वीरा, सांसद

 

मुझे इस मुद्दे पर अब कुछ नहीं कहना है। लोकसभा चुनाव में टिकट को लेकर जो बातें होनी थीं, वे हो चुकी हैं। अब पुराने विवादों और आरोप-प्रत्यारोप में उलझने के बजाए सभी नेताओं को विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटना चाहिए। पार्टी को मजबूत करना और चुनाव की तैयारी करना ही प्राथमिकता होनी चाहिए।

- डाॅ. एसटी हसन, पूर्व सांसद


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