मुरादाबाद: CM योगी के लोकार्पण के 4 माह बाद भी बंद है वार म्यूजियम और श्रीराम वाटिका, अब दीपावली से उम्मीद
मुरादाबाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा चार माह पहले लोकार्पित वार म्यूजियम, श्रीराम वाटिका और खेल पार्क अब तक जनता ...और पढ़ें

मुरादाबाद में बुद्धि विहार में बना मेजर ध्यानचंद भारतीय खेल पार्क जागरण
HighLights
पहले 10 जुलाई फिर 15 अगस्त और अब दीपावली तक खोलने की बात कर रहा नगर निगम
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। बुद्धि विहार फेस-दो में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार वार म्यूजियम, श्रीराम वाटिका और मेजर ध्यानचंद भारतीय खेल पार्क का शहरवासी अब तक इंतजार कर रहे हैं। 29 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन परियोजनाओं का लोकार्पण कर चुके हैं, लेकिन चार महीने बाद भी इन्हें आम जनता के लिए नहीं खोला जा सका है।
पहले 10 जुलाई से प्रवेश शुरू करने की बात कही गई, फिर 15 अगस्त का लक्ष्य रखा गया। अब दीपावली तक खोलने की चर्चा है, लेकिन नगर निगम ने अभी तक कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की है।
वार म्यूजियम, खेल पार्क बनकर तैयार था लेकिन, फिनिशिंग के काम अब भी जारी हैं। निगम अधिकारियों का कहना है कि उद्घाटन के बाद सेना के अधिकारियों के चीजों को व्यवस्थित करने के सुझाव के चलते भी कुछ अतिरिक्त काम कराना पड़ा। वार म्यूजियम यही नहीं एडवेंचर गतिविधि भी अब नई जोड़ी गईं।
हनुमान वाटिका के सामने ही वार म्यूजियम है। हनुमान वाटिका में आने वाले लोगों की नजर वार म्यूजियम की ओर भी जाती है। यहां मिग-27 लड़ाकू विमान और युद्ध में इस्तेमाल किया गया टैंक लोगों के आकर्षण का केंद्र हैं।
बच्चे बाहर से ही इन्हें देखकर उत्साहित होते हैं, लेकिन म्यूजियम के भीतर जाकर देश के सैन्य इतिहास और वीरता की झलक देखने का अवसर नहीं मिल पा रहा है।
करीब 31 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार वार मेमोरियल में तीनों सेनाओं के शौर्य और पराक्रम को प्रदर्शित किया गया है। इसकी लागत को लेकर पहले करीब 35 करोड़ रुपये और बाद में 36 करोड़ रुपये के आंकड़े भी सामने आए थे।
श्रीराम वाटिका में रामचरित्र के पैनल और विशाल प्रतिमा आकर्षण का केंद्र हैं। यहां करीब 66 फीट ऊंची श्रीराम की प्रतिमा दूर से दिखाई देती है।
लोग वाटिका के भीतर जाकर रामचरित्र से जुड़े प्रसंगों को देखने और प्रतिमा के निकट दर्शन करने की इच्छा रखते हैं। श्रीराम वाटिका और वीर साहिबजादे स्मारक की संयुक्त लागत करीब 12 करोड़ रुपये बताई गई है।
खेल पार्क में देसी खेलों के स्टैचू भी नहीं देख पा रहे
आठ करोड़ रुपये की लागत से विकसित मेजर ध्यानचंद भारतीय खेल पार्क में पारंपरिक खेलों की झलक देखने को मिलेगी। यहां लूडो, कबड्डी, कुश्ती, खो-खो, कंचे और अन्य देसी खेलों से जुड़े स्टैच्यू लगाए गए हैं।
इनसे बच्चों को भारतीय खेलों की परंपरा और महत्व जानने का अवसर मिलेगा। पार्क में कुछ खेलों को खेलने की सुविधाएं भी विकसित की गई हैं।
तीनों परियोजनाओं के लोकार्पण के बाद कुछ मरम्मत और फिनिशिंग का काम शेष होने की बात कही गई थी। इसके बाद भी इन्हें शुरू करने की तारीख लगातार आगे बढ़ती रही।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि दीपावाली तक इन्हें आम जनता के लिए खोलने का भरोसा कितना पुख्ता है। मुख्य अभियंता मोइनउद्दीन ने बताया कि तीनों परियोजनाओं को आम जनता के लिए खोलने की तैयारी चल रही है। कुछ जरूरी काम पूरे कराए जा रहे हैं।
