रुपया मजबूत, पर टेंशन में मुरादाबाद के निर्यातक! 1 लाख डॉलर पर ₹44,000 तक घटेगा मुनाफा
रुपये की मजबूती आम आदमी और आयातकों के लिए राहत ला सकती है, लेकिन मुरादाबाद के हस्तशिल्प निर्यातकों के लिए ...और पढ़ें

मुरादाबाद का कंटेनर डिपो।
HighLights
सातवें कारोबारी सत्र में भी बढ़ी रुपये की ताकत
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। रुपये की मजबूती आम आदमी और आयातकों के लिए राहत लेकर आ सकती है, लेकिन मुरादाबाद के हस्तशिल्प निर्यातकों के लिए यह मुनाफे का गणित बिगाड़ने वाली साबित हो सकती है। डालर के मुकाबले रुपया लगातार सातवें कारोबारी सत्र में मजबूत हुआ है।
विदेशी निवेश की आमद और भारतीय रिजर्व बैंक के कदमों से रुपये को सहारा मिला है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें रुपये की मजबूती के सामने चुनौती बनी हैं।
डालर के मुकाबले रुपया कारोबार के दौरान 94.4925 के स्तर तक पहुंचा, जो करीब छह सप्ताह का मजबूत स्तर है। बाद में यह लगभग 94.56 प्रति डालर पर रहा।
एक दिन में रुपये में करीब 0.4 प्रतिशत का सुधार दर्ज हुआ। अक्टूबर के शुरुआती दिनों में रिकार्ड निचले स्तर तक पहुंचने के बाद रुपये में दो प्रतिशत से अधिक की रिकवरी हुई। इसका असर अब डालर में भुगतान पाने वाले निर्यातकों के कारोबार पर पड़ने की संभावना है।
मुरादाबाद का हस्तशिल्प उद्योग मुख्य रूप से डालर में कारोबार करता है। पीतल, लोहा, एल्युमीनियम, लकड़ी, रेजिन और अन्य सामग्री से बने होम डेकोर, लाइटिंग, टेबलवेयर तथा फैशन ज्वेलरी का निर्यात करने वाली इकाइयों का उत्पादन खर्च रुपये में होता है, जबकि विदेशी ग्राहक से भुगतान डालर में मिलता है।
ऐसे में डालर कमजोर और रुपया मजबूत होने पर निर्यातक को उतने ही डालर के बदले कम रुपये मिलते हैं। विनिमय दर में मामूली बदलाव भी बड़े आर्डर पर असर डाल सकता है।
अगर किसी निर्यातक को एक लाख डालर का भुगतान मिलना है और उसने 95 रुपये प्रति डालर की दर से लागत और मुनाफे का आकलन किया है, लेकिन भुगतान के समय बैंक की डालर खरीद दर 94.56 रुपये रहती है, तो उसे 95 लाख रुपये के बजाय 94.56 लाख रुपये मिलेंगे। यानी 44 हजार रुपये कम मिलेंगे।
दस लाख डालर के भुगतान पर यही अंतर 4.40 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। यंग एंटरप्रिंयोर सोसायटी अध्यक्ष जेपी सिंह के अनुसार, यह अंतर वास्तविक बैंक दर, भुगतान की तारीख और पहले से किए गए मुद्रा विनिमय अनुबंध पर निर्भर करेगा। जिन निर्यातकों ने डालर की प्राप्ति को पहले ही फारवर्ड अनुबंध के जरिए सुरक्षित कर लिया है, उन पर तत्काल असर अलग हो सकता है।
बढ़ी लागत के बीच मुनाफे पर दोहरी मार की आशंका
हस्तशिल्प निर्यातकों के सामने चुनौती केवल रुपये की मजबूती नहीं है। पीतल, एल्युमीनियम, पैकेजिंग, मजदूरी और परिवहन की लागत बढ़ने से पहले ही उत्पादन महंगा हो रहा है।
मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट एक्सपोटर्स एसोसिएशन अध्यक्ष नवेदुर्रहमान के अनुसार, ऐसे में लंबे समय के लिए तय की गई कीमत वाले आर्डर पर डालर की प्राप्ति घटने से मुनाफे का अंतर और कम हो सकता है।
खासकर उन इकाइयों को अधिक सतर्क रहना होगा, जिन्होंने विदेशी ग्राहक को कीमत तो तय करके दे दी, लेकिन डालर भुगतान की विनिमय दर सुरक्षित नहीं की है।
दूसरी ओर, रुपये की मजबूती से आयातित मशीनरी, उपकरण और डालर में खरीदी जाने वाली सामग्री की रुपये में लागत घट सकती है। हालांकि, इसका लाभ तभी मिलेगा जब विदेशी आपूर्तिकर्ता की कीमत स्थिर रहे और समुद्री भाड़े, बीमा तथा अन्य खर्चों में बढ़ोतरी न हो।
