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RoDTEP Scheme: 30 सितंबर को खत्म हो रही योजना, नए आर्डर लें या ठहरें? असमंजस में निर्यातक

Published: Sat, 05 Sep 2026 04:07 PM (IST)

आरओडीटीईपी योजना की 30 सितंबर को समाप्ति से मुरादाबाद के निर्यातकों में असमंजस है। नए ऑर्डर लेने या इंतजार करने ...और पढ़ें

कारखाने मे पीतल के उत्पाद को पालिश से चमकाते कारीगर और साथ में रखे पीतल के तैयार उत्पाद जागरण

कारखाने मे पीतल के उत्पाद को पालिश से चमकाते कारीगर और साथ में रखे पीतल के तैयार उत्पाद जागरण 

जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। 30 सितंबर को आरओडीटीईपी (निर्यात किए गए उत्पादों पर लगने वाले करों और शुल्कों की भरपाई योजना) की अवधि समाप्त हो रही है। इसको लेकर निर्यातकों के सामने विदेशी ग्राहकों से उत्पाद के रेट तय करने का संकट खड़ा हो गया है। योजना की तारीख आगे बढ़ेगी या नहीं इस बात को लेकर सरकार के निर्णय पर नजर है।

एक अक्टूबर से योजना का क्या स्वरूप होगा, इस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। सरकार ने 31 मार्च को योजना को केवल छह महीने के लिए एक अप्रैल से 30 सितंबर तक बढ़ाया था।

मौजूदा राहत दरों और अधिकतम सीमा को भी इस अवधि में बरकरार रखा गया था। अब नए सरकारी आदेश का इंतजार है। मुरादाबाद के हस्तशिल्प निर्यातकों के लिए यह फैसला खास मायने रखता है।

यहां से बड़ी मात्रा में सजावटी सामान विदेश भेजा जाता है। निर्यातक कई महीने पहले विदेशी खरीदारों से सौदा और कीमत तय करते हैं। सितंबर में तय होने वाले कई सौदों का माल अक्टूबर के बाद भेजा जाएगा।

मुरादाबाद जैसे हस्तशिल्प निर्यात केंद्र के लिए यह व्यवस्था बहुत महत्वपूर्ण है। यहां से पीतल, एल्युमीनियम, लोहा, लकड़ी और अन्य सामग्री से बने हजारों प्रकार के सजावटी सामान विदेश भेजे जाते हैं।

यस चेयरमैन जेपी सिंह ने बताया कि कोई फर्म विदेश भेजने के लिए सजावटी सामान तैयार करता है। सामान बनाने में बिजली, ईंधन, माल ढुलाई और दूसरे खर्च होते हैं।

इन खर्चों में कुछ ऐसे कर और शुल्क शामिल होते हैं, जिनकी वापसी वस्तु एवं सेवा कर या किसी दूसरी व्यवस्था से नहीं होती। सरकार ऐसे पात्र करों और शुल्कों की भरपाई आरओडीटीईपी योजना के माध्यम से करती है।

निर्यातक कर रहे खरीदारों से बात

योजना को लेकर निर्यातको ने खरीदारो से बातचीत शुरू कर दी है। निर्यातक अंकित सिंह के अनुसार, कई बार सितंबर में आर्डर तय होता है, लेकिन माल अक्टूबर, नवंबर या दिसंबर में भेजा जाता है। यहीं सबसे बड़ी चिंता शुरू होती है।

अगर, निर्यातक आज मिलने वाली आरओडीटीईपी राहत को ध्यान में रखकर खरीदार को कीमत बता रहा है तो उसे यह जानना जरूरी है कि जिस समय माल विदेश भेजा जाएगा, उस समय भी यह राहत मिलेगी या नहीं।

छह महीने में कभी आधी हुई राहत, फिर मिली पूरी

  • 23 फरवरी 2026 : सरकार ने पात्र उत्पादों पर मिलने वाली राहत दरों और अधिकतम सीमा को घटाकर आधा कर दिया था। इससे सहायता कम हो गई।
  • 23 मार्च 2026 : करीब एक महीने बाद सरकार ने अपना निर्णय बदला और पुरानी दरें तथा अधिकतम सीमा फिर बहाल कर दी।
  • 31 मार्च 2026 : सरकार ने योजना को केवल छह महीने के लिए बढ़ाते हुए एक अप्रैल से 30 सितंबर 2026 तक जारी रखा। अभी कोई बदलाव नहीं हुआ है।

पहले भी बढ़ती रही योजना की तारीख

आरओडीटीईपी योजना एक जनवरी 2021 में शुरू हुई थी। इसका मकसद भारतीय निर्यातकों को उन करों और शुल्कों से राहत देना था, जिनकी भरपाई किसी अन्य सरकारी व्यवस्था से नहीं होती।

इसके बाद सरकार समय-समय पर योजना की अवधि बढ़ाती रही है। सितंबर 2023 में अवधि बढ़ाई गई। सितंबर 2024 में फिर विस्तार मिला। सितंबर 2025 में भी योजना आगे बढ़ाई गई।

इसलिए महत्वपूर्ण है योजना

मुरादाबाद का हस्तशिल्प कारोबार विदेशी बाजार निर्भर है। निर्यातकों को विदेशों के खरीदारों से कीमत को लेकर प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है। कच्चे माल की बढ़ती कीमत, मजदूरी, बिजली, पैकिंग, माल ढुलाई और बैंक संबंधी खर्च पहले ही निर्यातकों की परेशानी बढ़ा रहे हैं।

ऐसे में करों और शुल्कों की भरपाई के रूप में मिलने वाली राहत लागत तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। छोटी प्रतिशत की राहत भी बड़े सौदे में लाखों रुपये का अंतर पैदा कर सकती है।

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