मुरादाबाद, जेएनएन। लॉकडाउन और गर्मी दोनों फलों के बाजार के लिए खतरा बन रहे हैं। पूरी कीमत नहीं मिलने से किसान तरबूज और खरबूजा मंडी तक लाने से परहेज कर रहे हैं। गर्मी की वजह से बाहर से आने वाला पपीता खराब हो रहा है।

मजबूरन आढ़ती पपीता फेंक रहे हैं। तमिलनाडु के कोयंबटूर और महाराष्ट्र के जिलों से आने वाला पपीता यहां बाजार की मार झेल रहा है। गर्मी और लंबे सफर की वजह से आढ़तियों को इसके कारोबार में मुनाफा नहीं हो रहा है। तरबूज और खरबूजे से मंडी अटी पड़ी है। सरकार की ओर से मंडी शुल्क खत्म करने का प्रभाव भी थोक बाजार में दिख रहा है। पिछले साल इस सीजन में रोजाना आठ से दस ट्रक पपीता आता था। इन दिनों यह संख्या एक से दो ट्रक तक सिमट गयी है। अबकी बार थोक में पपीता 10-11 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है। पिछले साल 20 से 25 रुपये की दर से बिका था।

जानकारों का कहना है कि इस साल तीन से चार दिन में गाड़ी पहुंच रही है। इस गर्मी में पपीता खराब हो जा रहा है। इस वजह से रोजाना भारी मात्रा में इसे नष्ट करना पड़ रहा है। एक ट्रक पर एक सौ बीस से तीस क्विंटल माल आता है। - लॉकडाउन में वाहनों के आने में देर हो रही है। जबकि मौसम ने फलों का हाल खराब कर दिया है। स्थानीय तरबूज और खरबूजा तो ठीक है लेकिन, बाहर से आने वाला पपीता खराब हो जा रहा है।

हाजी जिकरान, अध्यक्ष, फल विक्रेता संघ - सरकार ने फलों से मंडी शुल्क खत्म कर दिया है। अब केवल विक्रेता से एक फीसद यूजर चार्ज लिया जा रहा है। पपीता की खेप लगातार खराब हो रही है।

मुकेश सिंह, मंडी इंस्पेक्टर

Posted By: Jagran

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