मुरादाबाद: जिले में धान खरीद का बुरा हाल है। जिले में खोले गए 57 केंद्रों में से कोई भी केंद्र लक्ष्य पूरा नहीं कर पा रहा है। मंडी समिति में संचालित क्रय केंद्र पर रोजाना 600 क्विटल खरीद का लक्ष्य है। खरीद का लक्ष्य किसी का पूरा नहीं हो पा रहा है। यही हाल सभी केंद्रों का है। किसान तहसीलों में पंजीकरण और सत्यापन कराने को भटकते रहते हैं। धान खरीद केंद्रों के प्रभारियों को भी उनसे कोई हमदर्दी नहीं है। इन्हीं अव्यवस्थाओं की वजह से एक महीने में धान खरीद का अभी तक 20 फीसद लक्ष्य ही पूरा हुआ है।

जिले को आठ लाख टन धान खरीद का लक्ष्य मिला है। कुंदरकी के धान खरीद केंद्र में तीन कांटे लगे हैं। एक अक्टूबर से धान खरीद शुरू हुई है। यहां का लक्ष्य 55 हजार क्विटल खरीद का है। रोजाना केंद्र पर 900 क्विटल खरीद होने चाहिए लेकिन, यह पूरा नहीं हो पा रहा है। बिलारी का भी यही हाल है। ठाकुरद्वारा, मुरादाबाद, कांठ तहसीलों में भी खरीद की गति धीमी है। कृषि उत्पादन मंडी समिति के एफसीआइ के धान खरीद केंद्र की हालत सबसे बुरी है। यहां रोजाना 600 क्विटल धान खरीद के लक्ष्य के सापेक्ष गुरुवार को सिर्फ 90 क्विटल खरीद हुई। आरएफसी के क्रय केंद्रों की स्थिति बेहतर है। मंडी परिषद स्थित आरएफसी के धान क्रय केंद्र की शुरुआत तो अच्छी नहीं रही। चार दिन पहले तो इस केंद्र पर सिर्फ 50 क्विटल ही खरीद हुई थी। ठेकेदार धान खरीद केंद्र की प्रभारी अर्चना शर्मा का सहयोग नहीं कर रहे थे। अब कुछ सुधार हुआ है। इसलिए धान खरीद ने रफ्तार पकड़ ली है।

खादर में नहीं खुला धान क्रय केंद्र, किसान परेशान

रामगंगा के खादर में रहने वाले किसानों के धान खरीद के लिए केंद्र नहीं खोले गए। नेताओं की सिफारिश पर उनकी पंसद के कई केंद्र खोल दिए गए। इसकी वजह से किसान बिचौलियों को धान बेचने के लिए मजबूर हैं। खादर क्षेत्र के गांव खपरैल मिलक, सीकमपुर पांडेय, गुलडि़या, आंवला, गिलपुरा, हमीरपुर, नकटपुरी, कोहरुआ, रानीनांगला, रायपुर गंजों वाली, मानपुर, समदा, परसूपुरा, किसुआनगला, लखनपुर, सरदार नगर, अटरिया, बैरखेड़ा, बिलाकुदान, चूहा नगला, मजरा काकरखेड़ा, रतनपुरा खैरखाता, अहमदपुर, सक्टूनगला, खरकपुर, मेहंदीरामपुर, गोविदपुर, नरखेड़ा, सिरसखेड़ा, वीरपुर, दलपतपुर में बड़ी संख्या में किसान धान की पैदावार करते हैं। यह मूंढापांडे और भगतपुर टांडा ब्लाक के गांव हैं। यहां के किसानों की अफसरों ने परवाह नहीं की। यहां के किसानों को कम पढ़े-लिखे होने का भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराने में तमाम मुश्किलें उठानी पड़ रही हैं।

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