दुबई से सीखा 'सिम बॉक्स' का खेल, खाड़ी देशों के ठगों को भारत से दे रहा था सहारा; ऐसे हुआ पर्दाफाश
दुबई से 'सिम बॉक्स' का खेल सीखकर कादिर विदेशी साइबर ठगों के लिए कॉल परिवर्तित कर भारतीय बैंक खाते उपलब्ध ...और पढ़ें

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HighLights
मुरादाबाद में कार्रवाई होने के बाद बदला ठिकाना, 2022 में गया था दुबई
भगतपुर क्षेत्र के कई युवा गिरोह में शामिल, उपलब्ध कराते हैं बैंक खाते
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। दुबई में मेहनत मजदूरी करने के लिए गया कादिर ने वापस मुरादाबाद आकर पहले अपने बहनोई व अन्य लोगों के साथ मिलकर सऊदी अरब समेत अन्य खाड़ी देशों से आने वाले भारतीयों की सस्ती कार दरों में बात कराने के नाम पर भारत सरकार को चूना लगाने का काम करने शुरू कर दिया।
यहां से उस समय यह रोजाना करीब पांच लाख रुपये का चूना सरकार को लगा रहा था। मुरादाबाद पुलिस कादिर और इसके बहनोई को गिरफ्तार करके जेल भेजा तो जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद अपना ठिकाना बदल दिया।
उत्तराखंड को ठिकाना बनाकर विदेशों से आने वाली काल को परिवर्तित करके लोगों की सस्ते दामों में तो बात करा ही रहा था, साथ ही विदेशी साइबर ठगों की काल भी परिवर्तित कर रहा था।
विदेशी ठगों को यहां के बैंक खाते उपलब्ध कराने के लिए कुछ युवकों को अपने गिरोह में शामिल कर रखा था। भगतपुर पुलिस आरोपित के संपर्क में रहने वाले आरोपितों की कुंडली खंगाल रही है।
संचार मंत्रालय की ओर से मिले गोपनीय पत्र के आधार पर साइबर थाना पुलिस रुद्रपुर 72 संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जांच कर रही थी। जांच के बाद साइबर और एसटीएफ टीम ने मंगलवार को कादिर को गिरफ्तार किया था।
यह भगतपुर क्षेत्र के गांव जुम्मा वाली मिलक का निवासी है। कादिर के कमरे से 32-स्लाट सिम वाले दो बाक्स एंटीना, सिम, मीडिया कन्वर्टर समेत अन्य उपकरण तथा एक मोबाइल भी मिला।
पूछताछ में कादिर ने बताया कि वह इंटरनेट के माध्यम से विदेश से आने वाली साइबर अपराधियों की काल को सिम बाक्स में लगे भारतीय सिम के जरिए सामान्य मोबाइल काल में बदलता था। इससे काल करने वाले का वास्तविक मोबाइल नंबर और पहचान छिप जाती थी।
उसने बांग्लादेश निवासी शाहिद से वाट्सएप पर संपर्क होने की बात बताई। शाहिद ने उसे सिम बाक्स उपलब्ध कराए और इनके संचालन के बदले हर माह 50 हजार रुपये भेजता था। इसकी गिरफ्तारी के बाद भगतपुर पुलिस ने भी जांच शुरू कर दी है।
जांच में सामने आया है कि जब यह 2022 में दुबई गया तो वहीं से सिम बाक्स के जरिए काल परिवर्तित करने का तरीका सीखा। इसके बाद यह मुरादाबाद आया और अपने बहनोई के साथ मिलकर कटघर क्षेत्र में सिम बाक्स के माध्यम से काल परिवर्तित करके सरकार को चूना लगाने लगा।
कटघर पुलिस ने इसे और इसके बहनोई को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। सात माह पहले यह जेल से बाहर आया। यहां की पुलिस को पता था कि यह जेल से बाहर आकर दोबारा साइबर अपराध में शामिल होगा।
इसलिए इसने ठिकाना बदल दिया और यह उत्तराखंड के बाजपुर में अपनी बहन के घर पहुंच गया। यहां भी इसने सिम बाक्स के बदले विदेश से आने वाली काल को परिवर्तित करना शुरू कर दिया, लेकिन यह काल किसी भारतीय से बात कराने के लिए कम बल्कि ठगों की अधिक आती थी।
अभी तक की जांच में सामने आया कि दुबई, सऊदी अरब, बांग्लादेश समेत कई खाड़ी देशों से साइबर ठगों की आने वाली काल को यह भारतीय काल में परिवर्तित करता था। क्योंकि अगर विदेशी नंबर से किसी व्यक्ति पर काल जाएगी तो वह ठगों के जाल में नहीं फंसेगा।
कुछ युवा संपर्क में, उपलब्ध कराते थे बैंक खाते
बताया जाता है कि विदेश में बैठकर ठगी करने वालों को भारतीय बैंक खाते के ही जरूरत पड़ती है। ऐसे में इसने अपने क्षेत्र के ही कुछ युवाओं को अपने गिरोह में शामिल कर लिया था।
एक बैंक खाते का ठगी के लिए एक बार ही इस्तेमाल होता है। क्योंकि बाद में साइबर पुलिस उस खाते को होल्ड करा देती है। इसलिए कादिर को इसके संपर्क में रहने वाले युवा रोजाना बैंक खाते उपलब्ध कराते थे।
यह बैंक खातों की पूरी डिटेल विदेश में बैठे ठगों को भेज देता था। अब भगतपुर पुलिस के अलावा जिले की साइबर पुलिस ने भी उन युवकों की कुंडली खंगालनी शुरू कर दी है जो इसके संपर्क में थे।
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