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यूपी के परिषदीय स्कूलों का नया प्रयोग: रोजाना 1 हिंदी और 1 अंग्रेजी शब्द से बढ़ेगी बच्चों की भाषा की जानकारी

Published: Fri, 02 Oct 2026 05:24 PM (IST)

मुरादाबाद मंडल के परिषदीय विद्यालयों में बच्चों का शब्द भंडार बढ़ाने के लिए प्रतिदिन एक हिंदी और एक अंग्रेजी शब्द ...और पढ़ें

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HighLights

  1. परिषदीय विद्यालयों में हिंदी-अंग्रेजी के नये शब्दों को बोलने का कराया जा रहा है अभ्यास

  2. लिखने और वाक्य में प्रयोग, कक्षा स्तर पर विद्यालय भी कर रहे हैं प्रयास

रजनी मेहता, मुरादाबाद। परिषदीय विद्यालयों के बच्चों का शब्द भंडार बढ़ाने और भाषा के प्रयोग की समझ विकसित करने के लिए मंडल में नई पहल शुरू की जा रही है। इसके तहत बच्चों को हर दिन एक हिंदी और एक अंग्रेजी शब्द सिखाया जाएगा। कमिश्नर संगीता सिंह ने पहले अलीगढ़ जिले में इस तरह की पहल कराई थी। उसी प्रयोग को अब मुरादाबाद मंडल के विद्यालयों में लागू किया जा रहा है।

इसके तहत बच्चे इन शब्दों को बोलने और लिखने के साथ ही वाक्य में प्रयोग करना भी सीख रहे हैं। विभागीय ग्रुप के माध्यम से एडी बेसिक कार्यालय से प्रतिदिन बीएसए को शब्द भेजे जा रहे हैं।

जिन्हें विद्यालयों में बच्चों के स्तर के अनुसार अभ्यास कराया जा रहा है। इसकी शुरुआत मुरादाबाद जिले में हो गई है। वहीं दूसरे जिलों में भी बीएसए के माध्यम से प्रयास किये जा रहे हैं।

मुरादाबाद मंडल के पांच जिलों मुरादाबाद, संभल, बिजनौर, अमरोहा और रामपुर में वर्ष 2026 में कुल 6,74,812 विद्यार्थियों का नामांकन है। इन जिलों में कुल 7,872 विद्यालय हैं।

इनमें 7,677 परिषदीय, 147 एडेड और 48 कस्तूरबा विद्यालय शामिल हैं। अकेले मुरादाबाद जिले में करीब 1.60 लाख विद्यार्थी 1,409 परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत हैं।

इस पहल के तहत केवल शब्द याद कराने के बजाय विद्यार्थियों को उसका सही उच्चारण, लिखने और वाक्य में प्रयोग करने का अभ्यास कराया जा रहा है। इससे बच्चों की शब्दावली के साथ उनकी भाषा में अभिव्यक्ति की क्षमता को भी विकसित करने का प्रयास होगा।

हिंदी और अंग्रेजी के शब्दों का स्तर कक्षा के अनुसार अलग रखा जा रहा है। एडी बेसिक दिनेश यादव ने बताया कि पहल के तहत प्रतिदिन हिंदी और अंग्रेजी के शब्द बीएसए को भेजे जा रहे हैं।

विद्यालयों में बच्चों को इन शब्दों का अर्थ समझाने के साथ बोलने, लिखने और वाक्य में प्रयोग कराया जा रहा। इसका उद्देश्य बच्चों की शब्दावली और भाषा प्रयोग की क्षमता को बेहतर करना है।

हिंदी-अंग्रेजी के शिक्षक भी कर रहे सहभागिता

बच्चों के शब्दों का भंडार बढ़ाने के लिए हिंदी अंग्रेजी के शिक्षक भी अपनी सहभागिता कर रहे हैं। हर दिन नये शब्दों के लिए शिक्षकों से भी सुझाव लिए जा रहे हैं। जिसमें शिक्षक विद्यार्थियों की समझ बढाने के लिए नये-नये शब्द खोजकर दे रहे हैं।

कक्षाओं के अनुसार दिये जा रहे हैं शब्द

विभागीय ग्रुप में आने वाले शब्द छोटी कक्षाओं की सुविधा अनुसार बनाने के लिए अब विद्यालय स्तर पर भी प्रयास हो रहे हैं। विद्यालय में एक से चार तक की कक्षाओं के लिए शिक्षक भी अपने स्तर से प्रयास कर रहे हैं। छोटी कक्षा के बच्चों को वर्णमाला के अनुसार सिखाया जा रहा है।

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