RTO का बड़ा खेल: रातोंरात बदल गया सीज ऑटो का मालिक, 'ब्लैकलिस्ट' गाड़ी मिनटों में हुई 'फिट'
मुरादाबाद आरटीओ में एक सीज ऑटो का मालिक रातोंरात बदल दिया गया और ब्लैकलिस्टेड वाहन को मिनटों में 'फिट' कर ...और पढ़ें

एआई इमेज
HighLights
यूपी 21 सीएन-4230 से खुला आरटीओ के कथित खेल का राज
आटो के पंजीकरण पर उठे सवाल, एजेंसी की भूमिका भी संदिग्ध
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। संभागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में जिस आटो के पंजीकरण के लिए एक महिला वर्षों तक चक्कर काटती रही, उसी आटो का मालिकाना हक कागजों में कब और कैसे बदल गया, इसका जवाब परिवहन विभाग से अधिकारी देने के बच रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि ब्लैकलिस्ट होने वाले आटो रिक्शा की फिटनेस पिछले महीने कर दी गई। इसके लिए कुछ देर के लिए उसे ब्लैकलिस्ट की सूची से बाहर कर दिया गया। फिटनेस होने के बाद फिर से ब्लैकलिस्ट कर दिया।
मामला यूपी 21 सीएन-4230 का है। तहसील बिलारी के मसेबी रसूलपुर गांव की रहने वाली रुखसाना बेगम का आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2016 में आटो खरीदा, एजेंसी ने उन्हें बिक्री संबंधी कागजात भी दिए, लेकिन उनके नाम आटो रिक्शा का पंजीकरण नहीं हुआ।
बाद में उसी चेसिस और इंजन नंबर पर किसी दूसरे व्यक्ति के नाम वाहन दर्ज हो गया और सिटी परमिट भी जारी कर दिया। मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। यह आटो रिक्शा वर्ष 2019 में ब्लैकलिस्ट था।
आरोप है कि वर्ष 2026 में आनलाइन पोर्टल पर इसकी स्थिति में बदलाव किया गया। कुछ समय के लिए ब्लैकलिस्ट की स्थिति हटाकर फिटनेस संबंधी प्रविष्टि की गई और फिर वाहन को दोबारा ब्लैकलिस्ट कर दिया।
अब सवाल यह है कि पोर्टल पर यह खेल किस यूजर आइडी से हुआ और किसकी अनुमति से हुआ? बताते हैं कि आरटीओ की पंजीयन शाखा के बाबू ने इस तरह से कई और भी खेल किए हैं। जांच हो जाए तो सारा राज खुल जाएगा।
आटो सीज होने के कारण बढ़ता गया कर्ज
रुखसाना बेगम ने अपर जिलाधिकारी नगर को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि परिवार की रोजी-रोटी के लिए उन्होंने वर्ष 2016 में बजाज एजेंसी से नया आटो खरीदा था।
एजेंसी से बिक्री प्रमाणपत्र, फार्म 21-22 और बिल समेत दस्तावेज मिले थे। इन्हीं कागजात के साथ वह पंजीकरण और परमिट के लिए आरटीओ कार्यालय पहुंचीं, लेकिन उनका काम नहीं हुआ।
कागज नहीं मिले तो परिवार चलाने के लिए आटो सड़क पर उतारना पड़ा। बिना दस्तावेज वाहन चलाने पर आटो तीन बार पकड़ा गया और सीज हुआ। छूटने के लिए उनको करीब 70 हजार रुपये जमा करने पड़े।
आर्थिक परेशानी बढ़ती गई तो रुखसाना ने आटो 90 हजार रुपये में किसी दूसरे व्यक्ति को बेच दिया था। इसके बाद जब उन्होंने आरटीओ कार्यालय से वाहन के कागजात की जानकारी की तो उनके सामने दूसरा ही रिकार्ड आया।
शिकायत के मुताबिक, उनके नाम पंजीकरण होने के बजाए उसी चेसिस और इंजन नंबर पर दूसरे व्यक्ति के नाम यूपी 21 सीएन-4230 दर्ज हो चुका था जबकि नियम के मुताबिक पहले उनके नाम से पंजीयन होना था।
यह मामला मेरी जानकारी में आया है। जांच कराई जा रही है। प्रथमदृष्टया पंजीयन व परमिट गलत जारी होने के कारण उसे निरस्त करने की कार्रवाई की गई है। आगे जांच में जिसका दोष होगा, उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
- राजेश सिंह, संभागीय परिवहन अधिकारी
यह भी पढ़ें- मुरादाबाद में बड़ा खेल: परिवहन अफसर का ड्राइवर ही निकला खनन माफियाओं का 'जासूस', लोकेशन बेचकर हर महीने कमा रहा लाखों
