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₹400 का कट्टा, ₹200 का किराया: आलू की मंदी ने तोड़ी किसानों की कमर, सरकारी बीज लेने से भी खींचे हाथ

Published: Fri, 23 Oct 2026 05:00 PM (IST)

मुरादाबाद के आलू किसानों को इस बार भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, जिससे वे खेती का रकबा ...और पढ़ें

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HighLights

  1. जिले को 312 क्विंटल बीज आवंटित, सिर्फ सात किसानों ने कराई बुकिंग

जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। जिले के सलेमपुर बंगर गांव के आलू किसान शेर सिंह के लिए इस बार आलू की खेती घाटे का सौदा बन गई है। फसल तैयार हुई तो मंडी में 50 किलो आलू का कट्टा 300 रुपये में बिका। बेहतर दाम मिलने की उम्मीद में आलू कोल्ड स्टोरेज में रखवा दिया। अब निकालने की बारी आई तो किराया और दूसरे खर्च ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

शेर सिंह बताते हैं कि कोल्ड स्टोरेज से आलू निकालने का किराया 170 रुपये प्रति कट्टा है। छंटाई से लेकर मंडी तक पहुंचाने में 30 रुपये और खर्च हो जाते हैं, यानी आलू बेचने से पहले ही 200 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। बाजार में आलू का भाव करीब 400 रुपये कट्टा मिल रहा है। ऐसे में लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।

किसान शेर सिंह के परिवार की यह परेशानी अब जिले के तमाम आलू किसानों के फैसले में भी दिख रही है। आलू की बेकद्री से परेशान किसानों ने इस बार खेती का रकबा घटाने के साथ सरकारी बीज से भी किनारा कर लिया है।

Potato Farming Cost Infographic in Hindi

जिले में सरकारी आलू बीज की उपलब्धता के बावजूद अब तक केवल सात किसानों ने ही आनलाइन बुकिंग कराई है। किसानों के लिए 312 क्विंटल बीज आवंटित किया गया है, लेकिन मांग बेहद कम है।

इसी गांव के युवा किसान विकास कुमार बताते हैं कि उनका परिवार हर साल 50 बीघा में आलू की खेती करता था, लेकिन इस बार केवल 15 बीघा में आलू लगाने की तैयारी है। जब फसल की लागत तक नहीं निकल रही तो ज्यादा खेती करने का क्या फायदा है।

विकास कहते हैं कि किसानों के पास पिछले साल का अपना बीज भी है। जिन्हें बीज की जरूरत है, वे दूसरे किसानों से खरीद रहे हैं। ऐसे में महंगा सरकारी बीज खरीदने में किसी किसान की रुचि नहीं है।

कुंदरकी के किसान अमन सैनी भी सरकारी बीज की कीमत को अधिक बताते हैं। नानकार गांव के मशकूर अहमद का कहना है कि आलू की खेती में जोखिम बढ़ गया है। पिछले साल भी अच्छे दाम नहीं मिले, इसलिए इस बार खेती बढ़ाने की हिम्मत नहीं हो रही है।

बाजार में भाव गिरने से आलू किसानों का भरोसा डगमगाया है। सरकारी बीज पर एक हजार रुपये की सब्सिडी भी किसानों को आकर्षित नहीं कर पा रही।

विभागीय अधिकारी बीज की बुकिंग बढ़ाने में जुटे हैं, लेकिन किसानों की प्राथमिकता इस बार खर्च घटाना और घाटे से बचना है। उप निदेशक उद्यान विनीत कुमार का कहना है कि आलू के बीज कई तरह से उपलब्ध हैं। प्रमाणित बीज लेने के लिए किसान बुकिंग करा रहे हैं। एक हजार रुपये प्रति क्विंटल सब्सिडी भी मिल रही है।

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