मुरादाबाद के 71 गांवों की खुलेगी किस्मत! कहीं बसेंगी कॉलोनियां तो कहीं खुलेंगी फैक्ट्रियां, लागू हुआ नया मास्टर प्लान
मुरादाबाद विकास प्राधिकरण 71 गांवों के लिए विस्तारित महायोजना तैयार कर रहा है, जिससे इन क्षेत्रों में आवासीय कॉलोनियां, उद्योग ...और पढ़ें

एआई इमेज
HighLights
अब पुराने निर्माणों से लेकर नए नक्शों तक बदलेंगे नियम
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। मुरादाबाद शहर अब अपनी पुरानी सीमाओं से आगे बढ़ने की तैयारी में है। शहर के आसपास बसे गांव आने वाले समय में विकास के नए केंद्र बन सकते हैं। कहीं आवासीय बस्तियां बसेंगी तो कहीं उद्योग, अस्पताल, शिक्षण संस्थान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान आकार लेंगे।
मगर यह सब कहां और किस तरह होगा, इसका फैसला अब विस्तारित महायोजना करेगी। मुरादाबाद, कांठ, संभल और अमरोहा तहसीलों के 71 राजस्व गांवों को शामिल कर तैयार की जा रही महायोजना शहर के भविष्य की दिशा तय करेगी।
मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) के विस्तारित क्षेत्र की महायोजना तैयार करने का जिम्मा चयनित कंसल्टेंट को दिया गया है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण होगा जमीन का उपयोग यानी लैंड यूज।
अभी जिस जमीन पर खेती हो रही है, वह भविष्य में किस तरह के विकास के लिए निर्धारित होगी और कहां आवासीय, औद्योगिक, व्यावसायिक या संस्थागत गतिविधियों को जगह मिलेगी।
इसका खाका महायोजना में सामने आएगा। इससे शहर के विस्तार को व्यवस्थित करने और भविष्य की जरूरतों के अनुसार सुविधाएं विकसित करने का रास्ता तैयार होगा।
पुराने निर्माणों के सामने भी आएगी नियमों की कसौटी
विस्तारित क्षेत्र में पहले से खड़े कारखाने, अस्पताल, नर्सिंग होम, शिक्षण संस्थान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं। इनके मानचित्र, स्वीकृति और निर्धारित भू-उपयोग के अनुरूप स्थिति की जांच जरूरी होगी।
स्थानीय स्तर पर ऐसे निर्माणों की जानकारी सामने आई है, जिन्हें पहले जिला पंचायत से सशर्त स्वीकृति मिली थी। संबंधित स्वीकृति पत्रों में प्रावधान था कि क्षेत्र एमडीए के अधीन आने पर प्राधिकरण के नियम प्रभावी होंगे।
ऐसे में पुराने निर्माणों का भविष्य स्वीकृति की शर्तों, लागू नियमों और संबंधित प्राधिकारी के निर्णय पर निर्भर करेगा। महायोजना लागू होने के बाद केवल जमीन का मालिक होना निर्माण की खुली छूट नहीं होगा।
प्रस्तावित निर्माण का भू-उपयोग के अनुरूप होना और नक्शा स्वीकृत कराना जरूरी होगा। नियमों के तहत भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क, विकास शुल्क और मानचित्र स्वीकृति शुल्क देय हो सकते हैं।
पुराने निर्माणों के नियमितीकरण या शमन का मामला भी निर्धारित पात्रता और नियमों के अनुसार तय होगा। यानी जमीन खरीदने, कारोबार शुरू करने या नया निर्माण कराने की योजना बना रहे लोगों के लिए महायोजना का भू-उपयोग बेहद अहम होगा।
बुनियादी सुविधाओं की बढ़ेगी जरूरत
महायोजना का असर केवल नक्शे और निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा। शहर के फैलाव के साथ सड़क, जलापूर्ति, जल निकासी और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की जरूरत भी बढ़ेगी। नियोजित विकास से इन जरूरतों को पहले से ध्यान में रखने का अवसर मिलेगा।
अब निगाहें महायोजना के अंतिम स्वरूप पर हैं। इससे साफ होगा कि 71 गांवों में विकास की कौन सी राह खुलेगी, कहां किस तरह की गतिविधियों को अनुमति मिलेगी और पुराने निर्माणों को नियमों के दायरे में लाने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
जिला पंचायत की सशर्त मंजूरी का भी खुलेगा हिसाब
एमडीए उपाध्यक्ष अनुभव सिंह ने बताया कि विस्तारित क्षेत्र में पहले जिला पंचायत से मानचित्र स्वीकृत कराने वाले निर्माणों की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ इकाइयों को सशर्त मंजूरी दी गई थी।
स्वीकृति पत्रों में उल्लेख था कि क्षेत्र एमडीए के अधीन आने पर प्राधिकरण के नियम प्रभावी होंगे। ऐसे में संबंधित निर्माणों के नक्शे, स्वीकृति की शर्तों और मौजूदा स्थिति की जांच जरूरी होगी।
पुराने निर्माणों को नियमित करने या शमन का लाभ स्वतः नहीं मिलेगा। इसके लिए लागू नियमों, पात्रता और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।
यह भी पढ़ें- रुपया मजबूत, पर टेंशन में मुरादाबाद के निर्यातक! 1 लाख डॉलर पर ₹44,000 तक घटेगा मुनाफा
