धीमरी जमीन विवाद:मुरादाबाद मेयर ने अपनी सरकार के खिलाफ क्यों खोला मोर्चा? कमिश्नर को लिखी चिट्ठी में किया ये खुलासा!
मुरादाबाद के महापौर विनोद अग्रवाल ने धीमरी गांव में अपनी बाउंड्रीवाल गिराए जाने के बाद प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल ...और पढ़ें

पैमाइश के दौरान तहसील प्रशासन की टीम
HighLights
दूसरे दिन भी पैमाइश के लिए पहुंची प्रशासन की टीम, अफसरों ने साधी चुप्पी
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। यह आमजन नहीं शहर के प्रथम नागरिक हैं महापौर विनोद अग्रवाल। सत्ता में रहते हुए भी उन्हें प्रशासन पर भरोसा नहीं है। धीमरी गांव में बाउंड्रीवाल गिराए जाने के बाद महापौर विनाेद अग्रवाल ने प्रशासन के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह को पत्र लिखते हुए कहा कि बिना सुनवाई का अवसर दिये उनकी बाउंड्रीवाल गिरा दी गई जबकि 15 दिन का नोटिस अनिवार्य है।
प्रशासन के साथ विशेष रूप से एसडीएम सदर डा. राम मोहन मीणा व धीमरी गांव के लेखपाल राकेश चौहान को प्रकरण से पूरी तरह दूरी रखने की बात कही। मांग करते हुए कहा कि किसी दूसरे जनपद के उपजिलाधिकारी की टीम गठित कर पैमाइश कराई जाए, तभी न्याय संभव है। इतना ही नहीं महापौर ने लखनऊ में एसीएस होम संजय प्रसाद से मिलकर बिंदुवार पूरे घटनाक्रम की शिकायत की बात कही है।
14 घंटे चली पैमाइश
बरेली-मुरादाबाद हाईवे स्थित पुराने टोल के पास धीमरी गांव में कंपोजिट विद्यालय निर्माण के लिए भूमि चिह्नांकन से घटनाक्रम की शुरुआत हुई। गुरुवार को सदर तहसील की टीम ने पैमाइश के दौरान सरकारी नंबर में पड़ रही बाउंड्रीवाल को गिरा दिया। बाउंड्रीवाल व संबंधित जमीन खुद की होने का दावा कर महापौर ने विरोध दर्ज कराया। प्रशासन ने राजस्व अभिलेखों में संबंधित भूमि सरकारी होने का तर्क दिया।
इस पर महापौर अड़ गए और डीएम और कमिश्नर से शिकायत करते हुए निष्पक्ष पैमाइश की बात कही। मामले ने तूल पकड़ा तो शुक्रवार को डीएम अनुज सिंह खुद एसडीएम सदर डा. राम मोहन मीणा, एसडीएम बिलारी विनय सिंह, दोनों तहसील व चकबंदी की टीम लेकर पहुंचे। सुबह छह बजे से लेकर रात आठ बजे तक 14 घंटे लगातार पैमाइश चली।
सरकारी भूमि बताकर गिराई बाउंड्रीवाल
डीएम के सामने महापौर ने कहा कि जिसे सरकारी भूमि बताकर बाउंड्रीवाल गिराई गई है। वह मेरी है। उसका दाखिल-खारिज भी मेरे पास है। उनकी भूमि गाटा संख्या 1086 में है। गाटा संख्या 1086 में वह, अंजू रस्तोगी व भाजपा नेता रिषिपाल सिंह चौधरी के छोटे भाई व निर्यातक अमित चौधरी कास्तकार हैं। अंजू रस्तोगी ने हाल में ही अपने हिस्से की जमीन बेची है।
महापौर ने बताया कि दस साल पहले उन्होंने चांद बाबू से यह भूमि खरीदी थी। इस गाटे में शेष 0.2430 मीटर जमीन सरकारी है जिस पर एमडीए की ओर से सड़क बनाई गई है। एनओसी भी जारी हो चुकी है। इससे सटे गाटा संख्या 1087 में सरकारी भूमि है। धीमरी के साथ उससे सटे उवीरपुर व सब्जीपुर गांव के संबंधित गाटा की भी पैमाइश हुई। पूरे दिन पैमाइश के बाद प्रशासन हल नहीं निकाल पाया।
रोवर मशीन से कराई पैमाइश, प्रशासन ने साधी चुप्पी
महापौर व सरकारी जमीन के बीच पैमाइश उलझी रही। शनिवार को फिर से सुबह छह बजे टीमें पहुंचे गईं। अबकी बार रोवर मशीन से पैमाइश की गई। यह मशीन सौ प्रतिशत सटीकता के साथ डिजिटल नक्शा तैयार करती है। यह प्रक्रिया पारंपरिक ज़रीब (चेन) सर्वे की तुलना में बहुत तेज होती है। 11 बजे तक पैमाइश के बाद टीमें वापस लौट गईं।
पैमाइश के बाद क्या हल निकला, इस पर प्रशासन के अफसर चुप्पी साधे रहे। कुछ भी बोलने से बचते नजर आए। यहां तक कि महापौर भी हल की जानकारी के लिए जद्दोजहद करते दिखे। कोई जानकारी नहीं मिलने पर उन्होंने प्रशासन के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया और कमिश्नर को पत्र लिखकर दूसरे जनपद के उपजिलाधिकारी की टीम गठित कर पैमाइश की मांग की है।
एसीएस होम से महापौर बयां करेंगे दास्तां
महापौर विनाेद अग्रवाल ने कमिशन को पत्र लिखकर जहां दूसरे जनपद की टीम से पैमाइश की मांग की है। वहीं वह लखनऊ में पूरे प्रकरण का पुलिंदा लेकर एसीएम होम संजय प्रसाद से मिलने की तैयारी में हैं। हालांकि, पहले ही मामला लखनऊ तक पहुंच चुका है। शासन स्तर से फीडबैक लिया जा रहा है। मगर, जिस तरह से मामला आगे बढ़ रहा है। उससे महापौर व प्रशासन के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है।
महापौर बोले-धीमरी के लेखपाल को बचाया जा रहा
महापौर ने कहा कि धीमरी गांव का लेखपाल राकेश चौहान, बस्तौर गांव के लेखपाल तेहर सिंह के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा कर रहा है। दिखाने के लिए बस्तौर के लेखपाल पर कार्रवाई तो कर दी गई। मगर, धीमरी के लेखपाल को क्यों बचाया जा रहा है? जिसके कारण रजिस्ट्री हुई। फर्द हुई। कहा कि पूरे फर्जीवाड़े के यही सब जिम्मेदार हैं। मगर, अफसर चुप्पी साधे बैठे हैं। ऐसे में मुरादाबाद जिला प्रशासन से निष्पक्ष पैमाइश की उम्मीद नहीं है।
शुरू से जोड़ी जाएं पूरी कड़ियां, तब निकलेगा बड़ा भूमाफिया गिरोह
महापौर खुद की जमीन का दावा कर रहे हैं। प्रशासन उसे सरकारी बता रहा है। प्रशासन की कहानी इसी के इर्द-गिर्द ही घूम रही है जबकि असल कहानी तक वह जा ही नहीं रहा। मसलन 1086, 1087 गाटा संख्या के साथ 1079, 1080, 1081, 1082 में भी खेल की बात जगजाहिर है।
इन सरकारी गाटोें की जमीनों को फर्जी तरीके से बेचा गया। प्रशासन भले ही जांच का हवाला देकर संबंधित गाटो की भूमि के सरकारी होने का दावा कर रहा है। मगर, अब तक यह सार्वजनिक नहीं कर पाया कि आखिर इस जमीन की खरीद-फरोख्त शुरू कैसे हुई। कैसे-कैसे लोग इस सरकारी जमीन की खरीद-फरोख्त में शामिल होते गए।
पार्टियों ने एक-दूसरे को जमीनें बेच दीं। इतना ही नहीं खरीद-फरोख्त में शामिल लोगों के अन्य जगहों पर तो इस तरह से सरकारी जमीनों में फर्जीवाड़े की संलिप्तता तो नहीं है? इस तरह यदि पूरी कड़ियां जोड़ी जाए तो जनपद में बड़े भूमाफिया गिरोह का राजफाश हो सकता है। मगर, जांचें सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित हैं। लिहाजा, सरकारी जमीनें बेचने से गिरोह में शामिल लोग कतरा नहीं रहे।
चर्चा है कि इस खेल में शामिल एक व्यक्ति की भूमाफिया की फाइल चली थी, मगर बाद में वह दब गई। इसी के बाद उसने गिराेह के गुर्गों संग मिलकर हर तरह से मनमानी की। चर्चा है कि खुलकर जांच हुई तो कुछ बड़ों के चेहरे बेनकाब हो जाएंगे। जिसकी अफसर हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
महापौर ने प्रकरण में दूसरे जनपद के उपजिलाधिकारी की एक टीम बनाकर पैमाइश की मांग की है। उस पर विचार किया जा रहा है।
- आंजनेय कुमार सिंह, कमिश्नर
यह भी पढ़ें- मेयर की बाउंड्रीवाॅल पर बुलडोजर चलाकर भाग गई प्रशासन की टीम, डीएम-कमिश्नर तक पहुंची बात तो मचा हड़कंप
