शादी के मंडप तक पहुंचने से पहले 560 जोड़ों की होगी 'कुंडली' की जांच, गड़बड़ी रोकने को कड़ा पहरा!
मुरादाबाद में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 560 जोड़ों की शादी की तैयारी चल रही है। अपात्रों को रोकने ...और पढ़ें

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HighLights
अधिकारियों को 10 प्रतिशत आवेदनों की दोबारा जांच के आदेश
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 26 अक्टूबर को बुद्धि विहार में गरीब परिवारों की बेटियों के हाथ पीले कराने के लिए सरकारी मंडप सजने जा रहा है। 30 अक्टूबर को भदासना स्थित महर्षि दयानंद सरस्वती ला कालेज में शहनाई गूंजेगी लेकिन, इस मंडप तक पहुंचने से पहले लाभार्थियों को पात्रता की कसौटी पर खरा उतरना होगा।
आवेदन से लेकर बैंक खाते और उम्र तक की जांच के बाद ही जोड़ों को योजना में शामिल किया जाएगा। किसी अपात्र जोड़े का चयन हुआ तो संबंधित अधिकारी और सत्यापनकर्ता की जिम्मेदारी तय होगी।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के पोर्टल पर 897 जोड़ों का लक्ष्य दिया गया है। फिलहाल दो चरणों में 560 जोड़ों के विवाह का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
पहले चरण में 26 अक्टूबर को मुरादाबाद नगर, देहात, ठाकुरद्वारा और कांठ विधानसभा क्षेत्रों के लिए बुद्धि विहार में कार्यक्रम होगा यहां 335 जोड़ों की शादी कराने की तैयारी है।
दूसरे चरण में 30 अक्टूबर को कुंदरकी और बिलारी विधानसभा क्षेत्रों के 225 जोड़ों के लिए भदासना में आयोजन प्रस्तावित है। सामूहिक विवाह योजना में गड़बड़ी की आशंका खत्म करने के लिए सत्यापन की कई परतें तय की गई हैं। सहायक विकास अधिकारी समाज कल्याण और नगर निकायों के सत्यापनकर्ताओं को सभी आवेदनों का दोबारा स्थलीय सत्यापन करना होगा।
इसके अलावा अपर नगर आयुक्त, खंड विकास अधिकारी और नगर निकायों के अधिशासी अधिकारी पात्र पाए गए आवेदनों में से 10 प्रतिशत की आकस्मिक जांच करेंगे। किसी गांव या वार्ड में पांच से अधिक पात्र आवेदक मिलने पर वहां के सभी आवेदनों का फिर से भौतिक सत्यापन कराया जाएगा।
उम्र से लेकर बैंक खाते तक की होगी पड़ताल
सरकारी योजना में शामिल होने के लिए वधू की उम्र कम से कम 18 वर्ष और वर की उम्र 21 वर्ष होना जरूरी है। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि आवेदन में दिया गया बैंक खाता सही है और आवेदक पात्रता की सभी शर्तें पूरी करता है।
निराश्रित और विधवा महिलाओं की बेटियों, दिव्यांग अभिभावकों की बेटियों और स्वयं दिव्यांग कन्याओं को प्राथमिकता दी जाएगी। आवेदन पत्रों पर सत्यापन करने वाले अधिकारी और कर्मचारी का नाम, पदनाम, हस्ताक्षर और मुहर दर्ज करना अनिवार्य होगा।
अपात्र पाए जाने वाले आवेदनों को पोर्टल पर निरस्त किया जाएगा। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि किसी भी स्थिति में अपात्र जोड़ों का चयन नहीं होना चाहिए।
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