मुरादाबाद में सीएम सामूहिक विवाह घोटाला: कागजी दूल्हा-दुल्हन का मंडप सजाने में सहयोगी प्रधान सहायक निलंबित
मुरादाबाद में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना घोटाले की परतें खुल रही हैं, जिसमें कागजी दूल्हा-दुल्हन के बाद अब उपहार सामग्री में अनियमितता सामने आई है।

यह फोटो एआई टूल की मदद से बनाई गई है।
HighLights
प्रधान सहायक हरिशंकर उपहार सामग्री भुगतान में निलंबित।
567 जोड़ों के लिए सामग्री आपूर्ति में अनियमितता।
पहले भी सहायक विकास अधिकारी निलंबित हुए थे।
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में सामने आए घपले की परतें अब एक-एक कर खुलने लगी हैं। कागजी दूल्हा-दुल्हन से सरकारी मंडप सजाने के मामले में सहायक विकास अधिकारी (समाज कल्याण) प्रशांत कुमार के निलंबन के बाद अब उनके सहयोगी रहे जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय के प्रधान सहायक हरिशंकर पर भी कार्रवाई हुई है।
निदेशक समाज कल्याण संजीव सिंह ने उन्हें निलंबित कर दिया है। उन पर 567 जोड़ों के लिए उपहार सामग्री की आपूर्ति और भुगतान में नियमों की अनदेखी का आरोप है।
समाज कल्याण निदेशक के निलंबन आदेश के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में 25 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आयोजन कराया गया था। इसमें 567 जोड़ों को उपहार सामग्री उपलब्ध कराने के लिए एक फर्म को नामित किया गया था।
आरोप है कि फर्म ने विभाग को सामग्री उपलब्ध नहीं कराई, इसके बावजूद आपूर्ति का चालान प्राप्त किए बिना ही उपहार सामग्री की धनराशि का भुगतान कर दिया गया।
नियमों के अनुसार सामग्री मिलने के बाद उसका विवरण स्टाक पंजिका में दर्ज किया जाना जरूरी था। आरोप है कि इसका भी पालन नहीं हुआ। निदेशालय ने प्रथम दृष्टया प्रधान सहायक हरिशंकर को इसके लिए जिम्मेदार मानते हुए निलंबित किया है।
निलंबन अवधि में उन्हें उप निदेशक समाज कल्याण, मुरादाबाद मंडल के कार्यालय से संबद्ध किया गया है। विभागीय अनुशासनिक जांच के लिए समाज कल्याण मुख्यालय के उप निदेशक सुधीर कुमार को जांच अधिकारी बनाया गया है। उप निदेशक समाज कल्याण मुश्ताक अहमद ने बताया कि प्रधान सहायक का निलंबन आदेश मिल गया है।
कर्मचारी दागदार तो अफसर कैसे बच गए बेदाग
सामूहिक विवाह योजना में सामने आई गड़बड़ियों का दायरा केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं दिख रहा है। मूंढापांडे और भगतपुर टांडा में फर्जी जोड़ों की कागजों पर शादी कराने के आरोप पहले ही सामने आ चुके हैं।
अब 567 जोड़ों की उपहार सामग्री के भुगतान में बिना आपूर्ति धनराशि जारी होने का मामला सामने आने से विभागीय निगरानी और भुगतान प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सामग्री की आपूर्ति ही नहीं हुई तो भुगतान किस आधार पर हुआ?
चालान नहीं था तो भुगतान प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ी और स्टाक पंजिका में अंकन के बिना सामग्री उपलब्ध मानने की स्थिति कैसे बनी? यदि भुगतान में प्रधान सहायक की भूमिका रही तो फर्म को भुगतान की स्वीकृति देने और अभिलेखों की जांच करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हुई? इससे यह बात साफ है कि बड़े अधिकारी स्वयं को बचाने में सफल रहे।
