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₹8.90 करोड़ का बीमा, किराये का मकान और रहस्यमयी मौत: मुरादाबाद में संभल जैसे 'मर्डर फॉर क्लेम' का शक!

Published: Fri, 18 Sep 2026 03:46 PM (IST)

मुरादाबाद में सलाउद्दीन की सड़क हादसे में मौत के बाद 8.90 करोड़ रुपये की बीमा पॉलिसियों पर टाटा एआईजी ने ...और पढ़ें

एआई इमेज है।

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HighLights

  1. 2024 में शुरू कराई थी बीमा पालिसी, 30 दिसंबर 2025 को हो गई थी मौत

  2. टाटा एआईजी चीफ मैनेजर ने एसएसपी को शिकायती पत्र देकर जांच की मांग उठाई

  3. बीमा के सालाना दो लाख रुपये भरते थे प्रीमियम, किराये के मकान में रहते थे

जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। बीमा पालिसी कराने के एक साल बाद सलाउद्दीन की सड़क हादसे में हुई मौत पर बीमा कंपनी ने सवाल खड़े कर दिए है। टाटा एआइजी के चीफ मैनेजर डा. आनंद बहादुर सिंह ने एसएसपी को शिकायती पत्र देकर पूरे मामले की जांच की मांग की है। सलाउद्दीन ने अलग-अलग कंपनियों से करीब 8.90 करोड़ रुपये की बीमा पालिसियां करा रखी थीं।

इनमें आईसीआईसीआई लोम्बार्ड की 2.80 करोड़, मैक्स लाइफ की करीब 3.54 करोड़, टाटा एआईजी की एक करोड़, निवा बूपा की एक करोड़ और बजाज लाइफ की 16.50 लाख रुपये की पालिसी शामिल है। एसएसपी सतपाल अंतिल ने बताया कि शिकायती पत्र पर जांच के आदेश दिए गए है।

जिगर कालोनी निवासी सलाउद्दीन की 30 दिसंबर को भोजपुर क्षेत्र में सड़क हादसे में मौत हो गई थी। वह बाइक पर सवार थे और बोलेरो ने टक्कर मार दी थी। सलाउद्दीन ने वर्ष 2024 में टाटा एआइजी से बीमा पालिसी शुरू कराई थी। सभी बीमा पालिसी की सालाना करीब दो लाख रुपये प्रीमियम जमा कर रहे थे।

मामले में टाटा एआइजी के चीफ मैनेजर ने बीमा कराने के करीब एक साल बाद हुई मौत और अलग-अलग कंपनियों में बड़ी धनराशि की पालिसियां होने की जानकारी सामने आने के बाद उनकी मौत कैसे हुई इस पर शक जाहिर किया है। बीमा कंपनी ने सलाउद्दीन के दस्तावेजों को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

वर्ष 2019 में बनवाए गए उनके पहले पैन कार्ड में हस्ताक्षर की जगह अंगूठा लगाया गया था। इसके बाद दोबारा बनवाए गए पैन कार्ड में हस्ताक्षर किए गए। बीमा कंपनियों की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों में भी हस्ताक्षर से संबंधित तथ्यों की जांच की जा रही है।

बताया गया है कि सलाउद्दीन किराये के मकान में रहते थे। परिवार में पत्नी नगमा और तीन बच्चे हैं। खास बात यह है कि पत्नी को भी पति के नाम पर कराई गई सभी बीमा पालिसियों की जानकारी नहीं थी। जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि सलाउद्दीन ने बीमा पालिसियां लेने से कुछ दिन पहले ही जीएसटी पंजीकरण कराया था।

बीमा कराने से करीब एक वर्ष पहले से वह आयकर रिटर्न दाखिल कर रहे थे। पुलिस अब जीएसटी पंजीकरण, आयकर रिटर्न, बैंक खातों, बीमा पालिसियों और हादसे से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।

ताकि यह पता लगाया जा सके कि इतनी बड़ी धनराशि की बीमा पालिसियां किस उद्देश्य से कराई गई थीं और उनके प्रीमियम का भुगतान किस स्रोत से किया जा रहा था। सलाउद्दीन की पत्नी नगमा ने बताया कि मेरे पति की सड़क हादसे में मौत हुई थी।

संभल में खुला था 100 करोड़ के बीमा फर्जीवाड़े का नेटवर्क

संभल में बदायूं के दरियाब, संजय, दिल्ली निवासी अमन और सलीम की हत्या करने के बाद उनकी मौत को हादसे का रूप देने के बाद बीमा क्लेम की धनराशि हड़पने के बाद शुरू हुई जांच में 100 करोड़ रुपये के बीमा फर्जीवाड़े का नेटवर्क सामने आया था।

पुलिस की जांच में 18 जनवरी 2025 की रात रजपुरा क्षेत्र में संदिग्ध स्कार्पियो की जांच से शुरू हुई कार्रवाई ने बीमा फर्जीवाड़े के अंतरराज्यीय नेटवर्क की परतें खोल दीं थी।

पुलिस ने वाराणसी निवासी ओंकारेश्वर मिश्रा उर्फ करण को गिरफ्तार किया तो उसकी कार से 11.44 लाख रुपये नकद और बीमा व मृत्यु प्रमाण पत्रों से जुड़े दस्तावेज मिले।

इसके बाद जांच आगे बढ़ी और मरणासन्न व मृत लोगों के नाम फर्जी पालिसी कराने, फर्जी दस्तावेज और मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कर क्लेम हड़पने का खेल सामने आया। नेटवर्क के तार उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली-एनसीआर समेत 12 राज्यों तक मिले।

अब तक करीब 74 आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं और 27 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। जांच में बीमा क्लेम के लिए हत्या कर उसे हादसा दिखाने के मामले भी सामने आए।

गिरोह के सरगना ओंकारेश्वर मिश्रा, बबराला निवासी सचिन शर्मा उर्फ मोनू और उसके भाई गौरव शर्मा की अपराध से अर्जित करीब 11 करोड़ 89 लाख 51 हजार रुपये की संपत्ति गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क की जा चुकी है। जांच में आशा कार्यकर्ताओं, बैंक कर्मचारियों, जनसेवा केंद्र संचालकों और बीमा सत्यापन से जुड़े लोगों की भूमिका भी सामने आई थी।

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