मुरादाबाद: मात्र ₹2000 मानदेय में नहीं मिल रहे रसोइये, 220 स्कूलों में मिड-डे मील पर गहराया संकट
मुरादाबाद के परिषदीय विद्यालयों में ₹2000 मानदेय पर रसोइये नहीं मिल रहे, जिससे मध्यान्ह भोजन योजना संकट में है। 1 ...और पढ़ें

शहर के एक विद्यालय में मध्यान्ह भोजन करते विद्यार्थी। जागरण आर्काइव
HighLights
विभाग के पास प्रधान और पार्षद भेज रहे पत्र
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। एक अप्रैल से नया सत्र शुरू होने जा रहा है, लेकिन परिषदीय विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन योजना की संचालन व्यवस्था रसोइये नहीं मिल पा रहे हैं। विभाग के पास रसोइये नहीं मिलने के कारण हो रही दिक्कतों के पत्र पहुंच रहे हैं। ऐसे विभाग के सामने भी रसोइयों के बिना मध्यान्न व्यवस्था चलाने की चुनौती बनी हुई है।
जिले के 1408 स्कूलों में 1.57 लाख विद्यार्थी पंजीकृत हैं, इसके लिए नए सत्र से जिलाधिकारी के निर्देशों के तहत स्कूल में ही भोजन बनाने की व्यवस्था होनी है। अब तक ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में पंचायत रसोइयों की व्यवस्था करती है वहीं नगर में संस्थाओं के माध्यम से मिड डे मील रेडी टू ईट भोजन देकर चल रही है।
परिषदीय विद्यालयों में रसोइयों की स्थिति
| विवरण | संख्या / विवरण |
| कुल परिषदीय विद्यालय (जिला) | 1408 |
| कुल पंजीकृत छात्र | 1.57 लाख |
| ऐसे विद्यालय जहाँ रसोइया नहीं मिले | 220 |
| नगर क्षेत्र में समस्याग्रस्त स्कूल | 64 |
| किराये के भवन में संचालित स्कूल | 20 (रसोई घर का अभाव) |
| वर्तमान मानदेय (वेतन) | ₹2,000 प्रति माह |
| नया सत्र शुरू होने की तिथि | 1 अप्रैल, 2026 |
नए सत्र से अब सभी विद्यालयों में ताजा भोजन बनाकर उसी समय भोजन बांटने की व्यवस्था होनी है। विभाग ने क्षेत्र के अनुसार रसोईये की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी शहर क्षेत्र में निगम और ग्रामीण क्षेत्र में पंचायत को दी है। इसके बावजूद उन्हें 220 विद्यालयों में खाना बनाने वाले नहीं मिल पा रहे हैं। इसके लिए कम मानदेय बड़ी वजह बन रहा है।
दो हजार रुपये में काम करने को लोग तैयार नहीं हैं, जिससे नगर निगम और पंचायतों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। नगर क्षेत्र में स्थिति ज्यादा गंभीर है, यहां करीब 64 विद्यालयों में से कहीं भी अब तक रसोइयों की व्यवस्था नहीं हो पाई है। सत्र शुरू होने में 10 दिन बचे हैं, ऐसे में बच्चों को समय पर मध्यान्ह भोजन मिल पाना चुनौती बनता जा रहा है।
किराये के भवन में चल रहे स्कूलों में रसोई की व्यवस्था भी नहीं
जहां 64 में से 20 स्कूल किराए के भवनों में चल रहे हैं और वहां रसोई की व्यवस्था नहीं है, ऐसे में रसोइया मिल भी जाए तो यहां रसोई के लिए कक्ष नहीं हाेने के कारण व्यवस्था नहीं हो पा रही है।
कम वेतन के कारण छोड़ रहे रसोइये काम
रसोइयों के वेतन में वृद्धि नहीं होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में भी दिक्कतें हो रही हैं। कई रसोइये विद्यालयों से काम छोड़ रहे हैं। हर माह करीब दर्जनों प्रधानों के पत्र विभाग के पास दूसरे रसोइये रखने के लिए आ रहे हैं।
छात्र संख्या के आधार पर रसोइयों की तैनाती
| छात्र संख्या (पंजीकृत) | आवश्यक रसोइयों की संख्या |
| 01 से 25 | 1 रसोइया |
| 26 से 100 | 2 रसोइये |
| 101 से 200 | 3 रसोइये |
| 201 से 300 | 4 रसोइये |
हमारे वार्ड में दो विद्यालय हैं दोनों में ही रसोइये इतने कम वेतन में आने को तैयार नहीं है। हमने विभाग को ही लिखकर दे दिया है। - सरोज, पार्षद, वार्ड 22 सूर्यनगर
हमारे वार्ड में हमने पूरा प्रयास किया लेकिन कोई भी आने को तैयार नहीं था। रसोइये के लिए समय और धनराशि को लेकर संकोच कर रहे हैं। - राहुल, पार्षद, वार्ड नंबर 29 रामतलेय्या।
विद्यालयों में मिड डे मील अब परिसर में ही बनाने की व्यवस्था होनी है। इसके लिए रसोइया रखने के लिए ग्राम पंचायत और नगर निगम कहा गया है। अगर पार्षद व्यवस्था नहीं करा पाए तो स्कूल स्तर से व्यवस्थाएं होंगी। जिन विद्यालयों में रसोई नहीं है वहां कक्ष लेकर रसोई की व्यवस्था करवाई जायेगी।
- विमलेश कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, मुरादाबाद
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