इतिहास रचने की तैयारी: 60 साल पुरानी परंपरा में पहली बार महिलाएं बनेंगी 'राम और रावण', गूंजने लगी लंकेश की गर्जना
मुरादाबाद में पहली बार पूरी तरह से महिलाओं द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली रामलीला की तैयारियां शुरू हो गई हैं। ...और पढ़ें

आकृति सिन्हा और आयुषी यादव
HighLights
मुरादाबाद की पहली महिला रामलीला की तैयारी शुरू
30 से अधिक बालिकाओं-महिलाओं को मिलेंगे पात्र
दशहरे के बाद होगा कलाकारों के लिए ओपन आडिशन
रजनी मेहता, मुरादाबाद। 'मैं लंकेश हूं...' स्टूडियो में गूंजती यह आवाज अभी रामलीला के मंच तक नहीं पहुंची है, लेकिन मुरादाबाद की पहली महिला रामलीला की तैयारियां जोर पकड़ चुकी है। प्रकाश नगर स्थित स्टूडियो में इन दिनों पात्रों के संवाद रिकार्ड किए जा रहे हैं। दिसंबर के पहले पखवाड़े में महासंघठन से प्रस्तावित रामलीला में राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान, रावण समेत सभी पात्रों की भूमिका महिलाएं और बालिकाएं निभाएंगी। 30 से अधिक कलाकारों को मंच मिलेगा।
महिला रामलीला का मंचन मुरादाबाद की करीब छह दशक पुरानी रामलीला शैली में किया जाएगा। इसकी शुरुआत वर्ष 1966 में हुई थी। रामलीला महासंघठन के सचिव प्रमोद रस्तोगी के अनुसार स्व. बलबीर पाठक, स्व. ज्ञान प्रकाश सोती और स्व. राम सिंह ने मिलकर इस शैली को आकार दिया था।
इसमें संवाद मंच के सामने से होते हैं, जबकि कलाकार खुले मंच पर लिप्सिंग के साथ अभिनय करते हैं। 70 से 120 फीट तक के खुले मंच पर होने वाली इस शैली की रामलीला में समय के साथ कई बदलाव हुए, लेकिन इसकी मूल पहचान अब भी कायम है।
अब इसी परंपरा में महिला कलाकारों को सभी प्रमुख पात्र सौंपे जाएंगे। पुरुष पात्रों के लिए भी महिला कलाकारों का ही चयन होगा। यानी मंच पर राम, रावण और अन्य पुरुष पात्रों के किरदार भी बेटियां निभाएंगी।
पहले रिकाॅर्ड हो रहे संवाद, फिर होगा ऑडिशन
मुरादाबाद शैली में संवाद और अभिनय के बीच तालमेल महत्वपूर्ण होता है। इसलिए मंचन से पहले पात्रों के संवादों का ट्रैक तैयार किया जा रहा है। दाऊ दयाल खन्ना नगर के प्रकाश नगर स्थित स्टूडियो में संगीतज्ञ बृजेश के निर्देशन में रिकार्डिंग चल रही है।

पुरुष पात्रों के संवाद को कमेटी के अध्यक्ष बाबा संजीव आकांक्षी और दिनेश शर्मा ने स्वर दिए हैं। महिला पात्रों के संवाद प्रिया और सुमन करेंगी। दशहरे के बाद ओपन आडिशन कराया जाएगा। इसमें शहर के विद्यालयों की छात्राओं के साथ अभिनय में रुचि रखने वाली महिलाओं को भी अवसर मिलेगा।
16 साल पहले आया था महिला रामलीला मंचन का विचार
रामलीला संघठन के सचिव प्रदीप के मन में महिला रामलीला का विचार वर्ष 2010 में आया था। देहरादून में रामलीला वर्कशाॅप के दौरान उन्होंने संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत भातखंडे संगीत विद्यालय की बालिकाओं की रामलीला देखी थी।
वहां बालिकाओं को प्रशिक्षण देकर मंचन कराया गया था। इसी से प्रेरित होकर उन्हे मुरादाबाद में भी ऐसा आयोजन करने का विचार आया। करीब 16 वर्ष बाद यह योजना अब मंच तक पहुंचने जा रही है।
रामलीला के साथ बच्चों के लिए गतिविधियां
दिसंबर में करीब 10 दिन चलने वाली रामलीला के दौरान दिन में बच्चों के लिए चित्रकला समेत धार्मिक और रचनात्मक गतिविधियां कराने की भी तैयारी है। इससे बच्चे राम के जीवन और प्रसंगों को गतिविधियों के माध्यम से समझ सकेंगे।
प्रदीप ने बताया कि महिला कलाकारों को सभी प्रमुख पात्रों में अवसर देकर उन्हें मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। अध्यक्ष बाबा संजीव आकांक्षी के अनुसार मुरादाबाद की पारंपरिक रामलीला शैली को बरकरार रखते हुए महिला कलाकारों के माध्यम से नया प्रयोग किया जा रहा है।
छह साल में कई किरदार, बढ़ा आत्मविश्वास
नवीन नगर निवासी आकृति सिन्हा पिछले छह साल से अपने क्षेत्र की रामलीला में अभिनय कर रही हैं। वह इससे पहले दो साल सीता की भूमिका निभाने के साथ मंदोदरी, सुलोचना, शबरी, मंथरा और तारा जैसे किरदार निभा चुकी हैं। वहां उन्हें इस बार उन्हें कैकयी की भूमिका मिली है।
उनके अनुसार, रामलीला में अभिनय से मंच का डर दूर हुआ और आत्मविश्वास बढ़ा। उन्हें चुनौतीपूर्ण और नकारात्मक किरदार अधिक पसंद हैं। वह महिला रामलीला को प्रतिभा दिखाने और संस्कृति से जुड़ने का अवसर मानती हैं।
15 साल से मंच पर, अब कैकयी की भूमिका
रामलीला में करीब 15 साल से अभिनय कर रहीं मिलन विहार निवासी आयुषी यादव इस बार कैकेयी की भूमिका निभाएंगी। उन्होंने सीता की सखी के किरदार से शुरुआत की थी। इसके बाद शूर्पणखा, सुलोचना और मंथरा के पात्र निभाए।
अभिनय के साथ वह मेकअप की व्यवस्था भी संभालती हैं। उनका कहना है कि महिला रामलीला मंच पर अभिनय की चाह रखने वाली बालिकाओं और महिलाओं के लिए प्रतिभा दिखाने का विशेष अवसर साबित होगी।
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