12वीं पास ने पैसे देकर खरीदी आयुर्वेद की डॉक्टर डिग्री, जांच शुरू होते ही कॉलेज को लौटाई; मुरादाबाद का हैरान करने वाला मामला
मुरादाबाद में 12वीं पास तनवीर ने पैसे देकर आयुर्वेद की डिग्री खरीदी, जिसे जांच शुरू होने पर कॉलेज को लौटा ...और पढ़ें

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HighLights
हरियाणा के कालेज से वर्ष 2022-23 में हासिल की थी डिग्री, 2025 में वापस के बाद कार्रवाई पर सवाल
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। फर्जी चिकित्सकों के मामले में अब सिर्फ संदिग्ध चिकित्सकों पर ही नहीं, बल्कि उन्हें डिग्री और पंजीयन तक पहुंचाने वाली व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। पाकबड़ा के तनवीर का नाम फर्जी चिकित्सकों की सूची में सामने आने पर उसकी शैक्षिक योग्यता की जांच हुई तो वह 12 वीं पास निकला।
जांच की भनक लगने पर उसने वर्ष 2025 में कालेज को डिग्री वापस कर दी। यह सिर्फ 12 वीं पास की ही मामला नहीं है बल्कि गांव-गांव की गलियों में बैठे झोलाछाप और आयुर्वेद के नाम पर ठीक करने वाले 10 वीं-12 वीं पास एलोपैथिक दवाएं मिलाकर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।
वर्ष 2022-23 में हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित श्रीकृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक कालेज एवं अस्पताल से आयुर्वेद की डिग्री तनवीर ने रुपये देकर हासिल कर ली। उसने मरीजों की जिंदगी से भी खिलवाड़ किया। डिग्री के आधार पर दवाइयां भी मरीजों को दीं।
मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब डिग्री के लिए आवश्यक शैक्षिक योग्यता पूरी नहीं थी तो तनवीर को प्रवेश और डिग्री कैसे मिली? यदि प्रमाणपत्र फर्जी थे तो उनकी जांच किस स्तर पर हुई और डिग्री लौटाने के बाद उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
केवल डिग्री वापस कर देने से मामला खत्म नहीं हो सकता। यह भी जांच जरूरी है कि तनवीर ने डिग्री के आधार पर कहीं चिकित्सा कार्य तो नहीं किया। उसे डिग्री दिलाने वाला कौन है। इससे उस सिंडिकेट का पता लगाया जा सकता है जो 12 वीं पास को फर्जी डिग्री बांट रहा है।
क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डा. अमरदीप सिंह नायक ने बताया कि पाकबड़ा निवासी तनवीर अहमद का मुरादाबाद में पंजीयन नहीं है। भारतीय चिकित्सा परिषद में उसका पंजीयन है। हमने सभी नए पंजीयन की स्क्रीनिंग के बाद ही पंजीयन किया है। बाकी अन्य के बारे में भी जानकारी जुटाने का प्रयास करेंगे।
फर्जीवाड़े के चक्कर में पैनल से बाहर हो चुके हैं सात अस्पताल
प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना के तहत पैनल में शामिल सात अस्पतालों को स्टेट हेल्थ एजेंसी डी-पैनल कर चुकी है। दो फोटोन, सिलेक्ट, एमआइ, एवीएस, सर्जिमेड, गैलेक्सी अस्पतालों ने मरीजों से जुड़े अभिलेखों में गड़बड़ी की थी।
पोर्टल पर पूरी जानकारी नहीं होने की वजह से दो बार नोटिस भी दिए गए थे। फिर स्टेट हेल्थ एजेंसी की टीम ने मुरादाबाद में जांच भी कराई थी। अस्पतालों में पत्रों की जांच भी की थी। इसके बाद इन अस्पतालों को पैनल की सूची से बाहर कर दिया गया।
बिना डिग्री मरीजों का इलाज, मिश्रित पद्धति से खतरा
जिले में बिना डिग्री के उपचार करने वालों की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। कई स्थानों पर आयुर्वेद और एलोपैथी की दवाओं को मिलाकर मरीजों को देने की शिकायत है।
दर्द निवारक दवाओं का मनमाना इस्तेमाल मरीजों के लिए नुकसानदायक है। इंटरनेट पर उपचार की ब्रांडिंग कर मरीजों को भ्रमित किया जा रहा है। कटघर छोटी मंडी निवासी नूर हसन ने दलपतपुर में झोलाछाप को दिखाया था।
तीन माह दवा करने के बाद भी ठीक नहीं हुए। उनका कहना था कि दवा खाने के बाद आराम तो आ जाता था। लेकिन, तीन माह बाद फिर उससे ज्यादा तबीयत खराब हो गई। ऐसे लोगों की भी जांच की जरूरत है।
