'अब सिर्फ कागज पर नहीं मिलेगा समाधान': शिकायतों के फर्जी निस्तारण पर मंडलायुक्त की बड़ी कार्रवाई, 7 दिन का अल्टीमेटम
मंडलायुक्त संगीता सिंह ने मुरादाबाद मंडल के अधिकारियों को समाधान दिवस की शिकायतों का सात दिन में वास्तविक निस्तारण करने ...और पढ़ें

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HighLights
अब निस्तारित’ लिखकर नहीं बचेंगे अफसर, शिकायतकर्ता को खुद बताना होगा क्या कार्रवाई हुई
मंडलायुक्त का पांचों जिलों के अफसरों को सख्त संदेश, फाइल पर नहीं जमीन पर होगा निस्तारण
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। तहसीलों पर आयोजित होने वाले समाधान दिवस में शिकायत लेकर पहुंचे फरियादी की उम्मीद अब सिर्फ एक रजिस्टर की एंट्री तक सीमित नहीं रहेगी। शिकायत दर्ज होने के बाद उसकी फाइल कहां पहुंची, क्या कार्रवाई हुई और वास्तव में समस्या दूर हुई या नहीं, इसका जवाब अधिकारियों को देना होगा।
मंडलायुक्त संगीता सिंह ने मंडल के मुरादाबाद, बिजनौर, संभल, अमरोहा और रामपुर के अधिकारियों को समाधान दिवस की शिकायतों पर अधिकतम सात दिन में वास्तविक और गुणवत्तापूर्ण कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
मंडलायुक्त ने कहा कि समाधान दिवस उस आम व्यक्ति की उम्मीद का मंच है, जो कई बार अपनी समस्या बताने के बाद इस भरोसे के साथ तहसील पहुंचता है कि इस बार उसकी सुनवाई होगी। ऐसे में शिकायतों के निस्तारण में संवेदनशीलता जरूरी है।
समाधान दिवस खत्म होते ही प्राप्त शिकायतों का पूरा विवरण पंजिका के निर्धारित कालम के अनुसार मंडलायुक्त कार्यालय को उपलब्ध कराना होगा। इसके बाद प्रत्येक प्रकरण पर हुई कार्रवाई की अनुपालन आख्या अधिकतम सात दिन में प्रस्तुत करनी होगी।
दूरभाष या संबंधित क्षेत्रीय अधिकारी के माध्यम से उसे सिर्फ यह बताना पर्याप्त नहीं होगा कि शिकायत का निस्तारण कर दिया गया। उसे यह भी बताया जाए कि उसकी समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
जो शिकायतें सात दिन में पूरी तरह निस्तारित नहीं हो सकेंगी, उनकी स्थिति छिपाई नहीं जा सकेगी। अनुपालन आख्या में कारण और समस्या के समाधान की अपेक्षित समय-सीमा स्पष्ट करनी होगी। इससे प्रकरणों को अनिश्चितकाल तक लंबित रखने पर भी निगरानी रहेगी।
बार-बार वही शिकायत आई तो तलाशेंगे बीमारी की जड़
किसी तहसील या विभाग से एक ही प्रकृति की शिकायतें बार-बार समाधान दिवस में पहुंचीं तो इसे व्यवस्था की समस्या माना जाएगा। जिलाधिकारी को ऐसी शिकायतों के मूल कारण के साथ व्यवस्थागत सुधार की प्रस्तावित कार्ययोजना भी देनी होगी।
मंडलायुक्त कार्यालय स्तर से पूरी प्रक्रिया का अनुश्रवण किया जाएगा, ताकि समाधान दिवस में पहुंची फरियाद का अंत सिर्फ रजिस्टर में दर्ज ‘निस्तारित’ शब्द के साथ न हो, बल्कि उसका असर जमीन पर दिखाई दे।
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