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मुरादाबाद की 80 साल पुरानी दाल-चाट का इंटरनेशनल शो में जलवा, रोजाना 30-40 हजार की बिक्री से लखनऊ-नोएडा तक से आए ऑफर

Published: Wed, 30 Sep 2026 05:28 PM (IST)

मुरादाबाद की 80 साल पुरानी दाल-चाट ने ग्रेटर नोएडा के इंटरनेशनल ट्रेड शो में धूम मचाई है, जहाँ रोजाना हजारों ...और पढ़ें

मुरादाबादी दाल चाट

मुरादाबादी दाल चाट

HighLights

  1. ग्रेटर नोएडा ट्रेड शो में रोज दो-तीन हजार लोग ले रहे दाल-चाट का स्वाद

जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। मुरादाबाद की पहचान अब पीतल के साथ दाल की खुशबू से भी दूर तक पहुंच रही है। ग्रेटर नोएडा में चल रहे इंटरनेशनल ट्रेड शो में शहर की करीब आठ दशक पुरानी दाल-चाट ने ऐसा स्वाद बिखेरा कि रोजाना दो से तीन हजार लोग काउंटर नंबर 30 तक पहुंच रहे हैं। कोई पहली बार चखकर लौट रहा है तो कोई परिवार और दोस्तों को साथ लेकर दोबारा पहुंच रहा है।

शनिवार और रविवार को रोजाना 30 से 40 हजार रुपये की बिक्री हुई। पूरे आयोजन में चार से पांच लाख रुपये के कारोबार की उम्मीद है। वहीं, पीतल उत्पाद के स्टालों पर वियतनाम के ग्राहक पहुंचे।

उन्होंने पीतल के अलावा एल्यूमिनियम, स्टील, आयरन, मिक्स धातु से बने फर्नीचर को भी पसंद किया। इससे उम्मीद लगाई जा रही है कि यूपी ट्रेड शो से स्थानीय स्तर के अलावा विदेशी ग्राहकों द्वारा आर्डर की बौछार होगी।

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शहर के गुरहट्टी स्थित बालाजी मंदिर के नीचे ढाल पर असली स्वाद कैटरर्स चलाने वाले अमित कुमार की तीसरी पीढ़ी इस पारंपरिक स्वाद को आगे बढ़ा रही है।

ट्रेड शो में रोज डेढ़ कट्टा तक दाल प्रतिदिन खप रही है। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नोएडा और लखनऊ के कारोबारियों ने स्थायी स्टाल के लिए सीधे प्रस्ताव दिया।

एक कड़छी दाल, चार दशक नहीं आठ दशक की कहानी अमित कुमार बताते हैं कि उनके दादा ने वर्ष 1946-47 के आसपास इस काम की शुरुआत की थी। टेलरिंग से शुरू हुआ सफर धीरे-धीरे दाल-चाट की पहचान में बदल गया।

पिता के बाद अब तीसरी पीढ़ी इसकी कमान संभाल रही है। मुख्य दुकान से तैयार होने वाली दाल ने परिवार के साथ 12 लोगों के लिए रोजगार का रास्ता खोला है। टीम में पांच महिलाएं और सात पुरुष हैं।

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मुरादाबादी दाल की खासियत इसका स्वाद और हल्कापन बताया जाता है। इसमें धोबा मूंग दाल का इस्तेमाल किया जाता है। अमित के अनुसार, इसे पत्तल-दोने में परोसने और लकड़ी की चम्मच से खाने की पुरानी परंपरा भी इसके स्वाद को अलग पहचान देती है।

सहायक आयुक्त उद्योग योगेश कुमार ने बताया कि ट्रेड शो में मुरादाबादी उत्पादों को पसंद किया गया है। वहीं, एक जनपद एक व्यंजन के तहत लगाए गए मूंग दाल के स्टाल पर लोग जायका लेने के लिए जुट रहे हैं। मंगलवार को समापन है।

उदीषा मेले से ट्रेड शो तक बढ़ा कारोबार

ओडीओसी योजना से जुड़ने के बाद अमित को स्थानीय स्तर से बाहर पहचान मिलने लगी। जनवरी में आयोजित उदीषा मेले में तीन दिन के आयोजन में खराब मौसम के बावजूद करीब डेढ़ से दो लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा होने का दावा किया गया।

अब अंतरराष्ट्रीय ट्रेड शो में मिल रहे ग्राहकों और कारोबारियों के रुझान ने कारोबार विस्तार की उम्मीद बढ़ाई है। अमित अब दाल की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी तरीके तलाश रहे हैं, ताकि इसे दूर-दराज के ग्राहकों तक पार्सल किया जा सके। मूंग दाल से विशेष समोसा तैयार करने पर भी काम चल रहा है।

बेटी के दाखिले से कारोबार के विस्तार तक जुड़ी याद

अमित के मुताबिक, जून 2025 में बेटी वांची के स्कूल दाखिले को लेकर वह गोरखपुर में मुख्यमंत्री के जनता दर्शन में पहुंचे थे। उनके अनुसार, आरटीई के तहत तीन घंटे में बेटी का दाखिला सीएल गुप्ता वर्ल्ड स्कूल में कराया गया।

बाद में मुरादाबाद आगमन पर मुख्यमंत्री ने उनकी दोनों बेटियों वांची और आची को बुलाकर श्री राम वाटिका का लोकार्पण भी कराया था। अमित इसे अपने परिवार के लिए यादगार क्षण बताते हैं।

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