चंडीगढ़ में 1 करोड़ की ठगी के बाद मुरादाबाद में जमाया डेरा: टेलीग्राम पर बोली लगाकर 4% में खरीदते थे म्यूल बैंक खाते
चंडीगढ़ में एक करोड़ से अधिक की ठगी के बाद इस साइबर गिरोह ने मुरादाबाद को निशाना बनाया, जहां वे ...और पढ़ें

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HighLights
मुरादाबाद आने से पहले चंडीगढ़ में एक माह तक रुका था गिरोह
चंडीगढ़ में बना रखा था आफिस, बोली लगाकर खरीदे जाते थे सिम
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। सिविल लाइंस पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए साइबर टेलीग्राम पर बोली लगाकर म्यूल खाते खरीदते थे। खातों में आने वाले ठगी के रुपये के तीन से चार प्रतिशत तक बैंक खाता धारक को दिया जाता था। एक मोबाइल सिम देने वाले को 1500 रुपये मिलते थे। मुरादाबाद से पहले गिरोह चंडीगढ़ में था।
यहां पर करीब एक माह में ही गिरोह ने एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की थी। चंडीगढ़ में गिरोह ने एक आफिस बना रखा था। जहां लोग अपना बैंक खाता और मोबाइल सिम लेकर आते थे। आने से पहले उस आफिस को बंद कर दिया गया। अब इस गिरोह के निशाने पर मुरादाबाद के लोग थे।
26 सितंबर की शाम सिविल लाइंस पुलिस ने श्रीनिवास लू निवासी गांव चंद्रपडिया थाना बीजा मुरु जनपद नल्लौर आंध्र प्रदेश, विविध पटेरिया निवासी रहेली खास थाना सहेली जिला सागर मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया था।
इनके अलावा दिव्यम कुमार निवासी मटोर थाना मोहाली चंडीगढ़, अरमान शाह जसपुर उत्तराखंड, सतेंद्र कुमार, राजकुमार निवासी भगवंतपुर थाना जसपुर उत्तराखंड, मंजीत सिंह उर्फ नन्हे निवासी मुहल्ला बीरेनी थाना बाजपुर उत्तराखंड से पकड़ा गया।
साथ ही शिवम विश्वास निवासी धर्म नगरी थाना कोतवाली बिजनौर, मोहम्मद दनियाल निवासी मुहल्ला गेट जाफरा खां ओल्ड सिटी थाना बरादरी बरेली, दलवीर चौहान निवासी विकास नगर मझोला, आजम निवासी देवापुर कटघर, सुनित बैंक कालोनी खुशहालपुर मझोला, महेंद्र सिंह निवासी हजीरा बाजपुर उत्तराखंड को गिरफ्तार किया था।
गिरफ्तारी के तीन दिन पहले ही गिरोह मुरादाबाद आया था। यहां पर इन सभी को सम्राट होटल में रुकवाया गया था। गिरोह सरगना उत्तराखंडा के रुद्रपुर निवासी संजय है। उसके इशारे पर ही यह लोग काम कर रहे थे।
यहां से पहले यह पूरा गिरोह चंडीगढ़ में था। चंडीगढ़ में यह गिरोह एक माह तक रुका। वहां पर इन्होंने करीब 500 म्यूल बैंक खाते खरीदे थे। उन बैंक खाता धारकों को यह ठगी के रुपये के तीन से चार प्रतिशत देते थे।
इस गिरोह के प्रत्येक सदस्य को ठगी के रुपये से पांच प्रतिशत मिलता था। बाकी रुपये संजय, महेंद्र बांट लेते थे। टेलीग्राम चैनल का संचालन गिरोह का सरगना संजय खुद करता है। वह मैसेज डालता था तो बैंक खाता बेचने वाले उसे अपनी डिटेल उपलब्ध कराते थे।
मुरादाबाद में आकर भी इन्होंने म्यूल बैंक खातों की बोली लगानी शुरू कर दी थी। बताया जाता है कि कुछ लोगों ने इन्हें अपने बैंक खाते की चेकबुक दे भी दी थी।
दिन में उत्तराखंड और रात में मुरादाबाद रुकता गिरोह
गिरोह के सरगना संजय ने इन्हें निर्देश दिए थे कि ठगी करने के लिए जो भी एपीके फाइल भेजी जाएगी वह उत्तराखंड की सीमा में आकर भेजी जाएगी। पूरे दिन उत्तराखंड की सड़कों पर गाड़ी में ही सवार होकर लोगों को एपीके फाइल भेजकर ठगी होगी और सभी आरोपित शाम होने के बाद मुरादाबाद आ जाएंगे। खाना भी इन्हें मुरादाबाद में खाने के लिए कहा गया था। जिससे पुलिस की पकड़ में न आ सके।
